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परिचय
सर जामसेटजी जीजीभॉय स्कूल ऑफ आर्ट (Sir J.J. School of Art), जिसे सामान्यतः जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट के नाम से जाना जाता है, भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित कला संस्थाओं में से एक है। 1857 में स्थापित यह संस्थान भारतीय आधुनिक कला के विकास में एक मील का पत्थर रहा है। मुंबई के दक्षिणी भाग में स्थित यह संस्थान न केवल कला शिक्षा का केंद्र है, बल्कि भारतीय कला इतिहास का एक जीवंत संग्रहालय भी है।
इस विद्यालय ने एम.एफ. हुसैन, फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा, एस.एच. राज़ा, अकबर पदमसी, त्यब मेहता, वी.एस. गायतोंडे जैसे महान कलाकारों को प्रशिक्षित किया है। 2023 में इसे डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला और 2024-25 शैक्षणिक वर्ष से यह सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) के रूप में कार्य कर रहा है।
स्थापना और प्रारंभिक इतिहास
सर जामसेटजी जीजीभॉय का योगदान
जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना मार्च 1857 में हुई थी। इसका नाम प्रसिद्ध पारसी व्यवसायी और परोपकारी सर जामसेटजी जीजीभॉय के नाम पर रखा गया, जिन्होंने इसकी स्थापना के लिए 1,00,000 रुपये दान दिए थे। जीजीभॉय भारत से पहले बैरोनेट थे और उन्होंने मुंबई के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 1851 के महान प्रदर्शनी (ग्रेट एक्जीबिशन) की चयन समिति में रहते हुए भारतीय वस्तुओं को मिली प्रतिक्रिया से प्रेरित होकर कला शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
प्रथम कक्षा और प्रारंभिक संचालन
विद्यालय की पहली कक्षा 2 मार्च 1857 को एल्फिंस्टन संस्थान में ड्राइंग की शुरू हुई। प्रारंभ में इसका संचालन बॉम्बे के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा किया जाता था। शुरुआत में यह संस्थान औद्योगिक कला और शिल्प पर केंद्रित था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन की आवश्यकताओं को पूरा करना था।
प्रमुख व्यक्तित्व और विकास
जॉन लॉकवुड किपलिंग का योगदान
1866 में संस्थान का प्रबंधन भारत सरकार द्वारा संभाल लिया गया। उसी वर्ष लॉकवुड किपलिंग, जो 1865 में स्कूल के प्रोफेसर बने थे, ने तीन कार्यशालाएं स्थापित कीं: (i) सजावटी चित्रकारी, (ii) मॉडलिंग, और (iii) सजावटी लौह कार्य। वे संस्थान के पहले डीन बने। किपलिंग प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग के पिता थे, जिनका जन्म 30 दिसंबर 1865 को स्कूल के परिसर में ही हुआ था। रुडयार्ड किपलिंग को बाद में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
जॉन ग्रिफिथ्स और अजंता की प्रतियां
1865 में जॉन ग्रिफिथ्स स्कूल के प्रिंसिपल बने। वे अजंता गुफाओं के भित्तिचित्रों की प्रतिलिपि बनाने के लिए प्रसिद्ध हुए। 1872 से 1891 तक चले इस प्रोजेक्ट में स्कूल के छात्रों ने सहायता की। यह कार्य भारतीय प्राचीन कला के संरक्षण और अध्ययन में महत्वपूर्ण था। छात्रों ने विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन (अब छत्रपति शिवाजी टर्मिनस), क्रॉफर्ड मार्केट और राजाबाई टावर की सजावट में भी योगदान दिया।
क्लॉड बैटली का आधुनिकतावादी दृष्टिकोण
1917 में वास्तुकार क्लॉड बैटली विजिटिंग प्रोफेसर बने और 1923 से 1943 तक वे संस्थान के प्रिंसिपल रहे। उन्होंने वास्तुकला में आधुनिकतावाद को बढ़ावा दिया और बॉहौस से प्रेरित सिद्धांतों को पाठ्यक्रम में शामिल किया। उनकी स्मृति में 1996 में क्लॉड बैटली आर्किटेक्चरल गैलरी खोली गई।
विभाग और पाठ्यक्रम का विकास
कला और शिल्प विभाग
1879 में ड्राइंग को एक विषय के रूप में शामिल किया गया। 1891 में कला-शिल्प विभाग की स्थापना हुई। 1893 में ड्राइंग शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया गया। 1890 तक पांच अलग-अलग विभाग संचालित हो रहे थे: ड्राइंग और चित्रकला, मूर्तिकला और मॉडलिंग, वास्तुकला, अप्लाइड आर्ट्स और आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स।
वास्तुकला विभाग
1896 में ड्राफ्ट्समैन की कक्षाएं जोड़ी गईं, जो वास्तुकला विभाग की नींव बनीं। 1900 में स्कूल ने वास्तुकला में अपना पहला पाठ्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसे जॉन बेग पढ़ाते थे, जो बाद में बॉम्बे और भारत सरकार के परामर्शदाता वास्तुकार बने। 1908 में बेग के सहायक जॉर्ज विटेट के तहत एक पूर्ण 4-वर्षीय कार्यक्रम स्थापित किया गया। 1910 में सर जॉर्ज क्लार्क स्टडीज़ और प्रयोगशालाएं शिल्प के उन्नत अध्ययन के लिए बनाई गईं, जिसमें मिट्टी के बर्तन पहली शिल्प कला थी।
अप्लाइड आर्ट संस्थान
1935 में सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट के परिसर में सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट ने संचालन शुरू किया। 1946 में कमर्शियल आर्ट सेक्शन (CAS) शुरू किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह विभाग सरकार के युद्ध प्रचार और सार्वजनिक जागरूकता पोस्टर डिजाइन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अनुभाग में प्रशिक्षित छात्रों की व्यावसायिक मांग बढ़ी और भारतीय विज्ञापन उद्योग के संस्थापकों में कई CAS के छात्र थे।
स्वतंत्रता के बाद पुनर्गठन
1958 में स्कूल को विभाजित किया गया। वास्तुकला और अप्लाइड आर्ट विभाग क्रमशः सर जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर और सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट बन गए। 1981 में स्कूल मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गया। 2018-19 शैक्षणिक वर्ष से इसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की मंजूरी मिली।
वर्तमान पाठ्यक्रम और डिग्री
स्नातक पाठ्यक्रम (BFA)
वर्तमान में स्कूल निम्नलिखित विषयों में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) की डिग्री प्रदान करता है:
- चित्रकला (Painting)
- मूर्तिकला (Sculpture)
- धातु कार्य (Metal Work)
- आंतरिक सज्जा (Interior Decoration)
- वस्त्र डिजाइन (Textile Design)
- सिरेमिक (Ceramics)
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (MFA)
मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (MFA) की डिग्री निम्नलिखित विषयों में दी जाती है:
- चित्र चित्रण (Portraiture)
- रचनात्मक चित्रकला (Creative Painting)
- भित्तिचित्र (Murals)
- मूर्तिकला (Sculpture)
- प्रिंटमेकिंग (Printmaking)
डिप्लोमा पाठ्यक्रम
- कला शिक्षा में डिप्लोमा (Art Education)
- शिक्षण में डिप्लोमा
परिसर और विरासत भवन
नव-गॉथिक वास्तुकला
1878 में स्कूल अपने वर्तमान भवन में स्थानांतरित हुआ, जहां यह आज भी स्थित है। यह भवन वास्तुकार जॉर्ज ट्विग मोलेसी द्वारा नव-गॉथिक शैली में डिजाइन किया गया था। स्कूल परिसर, किपलिंग हाउस (डीन के बंगले के रूप में जाना जाता है) सहित, महाराष्ट्र सरकार द्वारा ग्रेड II विरासत संरचना के रूप में वर्गीकृत है। 2002-2006 और फिर 2008 में इसका जीर्णोद्धार किया गया।
किपलिंग बंगला
रुडयार्ड किपलिंग के जन्म के मूल बंगले को बाद में ध्वस्त कर दिया गया था। इस स्थान के पास 1882 में किपलिंग बंगला बनाया गया। इस घर के प्रवेश द्वार पर एक पट्टिका पर लिखा है: “रुडयार्ड किपलिंग, लॉकवुड किपलिंग के पुत्र, सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट के पहले डीन, का जन्म यहां 30 दिसंबर 1865 को हुआ था।” बंगले के प्रवेश द्वार पर रुडयार्ड किपलिंग की एक प्रतिमा है। 2019 की शुरुआत में इमारत की भौतिक बहाली पूरी हुई।
विरासत परिसर
परिसर दक्षिण मुंबई में स्थित है (सीएसएमटी स्टेशन के सामने) और इसमें सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट, सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट, सर जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर, और सरकारी मुद्रण प्रौद्योगिकी संस्थान हैं। परिसर में एक सदी से अधिक पुराने कई पेड़ हैं और कई विरासत भवन हैं। नौ एकड़ के इस परिसर को भारत सरकार द्वारा विरासत परिसर के रूप में मान्यता प्राप्त है।
प्रगतिशील कलाकार समूह (PAG) का जन्मस्थान
सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट भारत के सबसे महत्वपूर्ण कला आंदोलन – प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप (PAG) – का जन्मस्थान था। 1947 में फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा, एम.एफ. हुसैन, एस.एच. राज़ा, के.एच. आरा, एच.ए. गाडे और एस.के. बकरे ने मिलकर इस समूह की स्थापना की।
प्रगतिशील समूह का दर्शन
PAG का उद्देश्य औपनिवेशिक और पारंपरिक कला शैलियों से मुक्त होकर एक नई भारतीय कला भाषा विकसित करना था। इस समूह ने पश्चिमी आधुनिकतावादी तकनीकों को भारतीय विषयों और संवेदनाओं के साथ मिलाया। यह भारतीय कला इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था जिसने देश में आधुनिक कला की नींव रखी।
समूह का विकास
1950 के दशक की शुरुआत में जब सूज़ा, बकरे और राज़ा लंदन और पेरिस चले गए, तो नए कलाकार समूह से जुड़े। कृष्णेन खन्ना, वसुदेव एस. गायतोंडे, अकबर पदमसी, त्यब मेहता, मोहन सामंत, बाल छाबड़ा और राम कुमार समूह के सहयोगी सदस्य बने।
प्रतिष्ठित पूर्व छात्र
सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट ने भारतीय कला, वास्तुकला, फिल्म, और अन्य क्षेत्रों में अनेक महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है।
चित्रकार और कलाकार
एम.एफ. हुसैन (1915-2011): 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध भारतीय कलाकारों में से एक। पद्म विभूषण से सम्मानित। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा (1924-2002): प्रगतिशील कलाकार समूह के संस्थापक सदस्य। उन्हें 1945 में भारत छोड़ो आंदोलन का समर्थन करने के कारण स्कूल से निष्कासित कर दिया गया था। स्वतंत्रता के बाद पश्चिम में उच्च मान्यता प्राप्त करने वाले पहले भारतीय कलाकार।
एस.एच. राज़ा (1922-2016): पद्म विभूषण से सम्मानित। उनकी पेंटिंग “सौराष्ट्र” 2010 में क्रिस्टीज की नीलामी में 3,486,965 अमेरिकी डॉलर में बिकी।
अकबर पदमसी (1928-2020): पद्म भूषण से सम्मानित। आधुनिक भारतीय चित्रकला के अग्रणी। उनकी पेंटिंग “रिक्लाइनिंग न्यूड” 2011 में सोथबी की न्यूयॉर्क नीलामी में 1,426,500 अमेरिकी डॉलर में बिकी।
त्यब मेहता (1925-2009): भारतीय आधुनिक कला के महान हस्ताक्षर। उनकी शक्तिशाली अभिव्यक्तिवादी शैली प्रसिद्ध है।
वी.एस. गायतोंडे (1924-2001): भारतीय अमूर्त कला के सबसे महत्वपूर्ण कलाकारों में से एक। उनकी ध्यानात्मक, ज़ेन-प्रभावित शैली अद्वितीय थी।
एम.वी. धुरंधर (1867-1944): चित्रकार और स्कूल के उप-प्रधानाचार्य। राजा रवि वर्मा के बाद भारतीय यथार्थवादी चित्रकला के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि।
के.के. हेब्बार (1911-1996): कर्नाटक के प्रसिद्ध चित्रकार जिन्होंने भारतीय लोक कला और आधुनिकता का समन्वय किया।
प्रभाकर बर्वे (1936-1995): महाराष्ट्र के प्रभावशाली समकालीन चित्रकार।
अतुल डोडिया (जन्म 1959): समकालीन भारतीय कला के प्रमुख नाम।
जितीश कल्लाट (जन्म 1974): युवा पीढ़ी के प्रभावशाली समकालीन कलाकार।
एस.एल. हल्दनकर (1882-1968): जल रंग चित्रकला में विशेषज्ञ। उनकी प्रसिद्ध पेंटिंग “ग्लो ऑफ होप” (“वुमन विद द लैम्प”) भारतीय कला का प्रतिष्ठित चित्र है।
ए.ए. राइबा (1922-2016): लघु चित्रकला तकनीक और आधुनिकतावादी प्रयोग का अद्भुत संयोजन करने वाले कलाकार।
वास्तुकार
बी.वी. दोशी (1927-2023): भारत के पहले प्रित्ज़कर पुरस्कार विजेता (वास्तुकला का सर्वोच्च पुरस्कार)। पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित।
फिल्म और मनोरंजन
दादासाहेब फाल्के (1870-1944): भारतीय सिनेमा के जनक। पहली भारतीय फीचर फिल्म “राजा हरिश्चंद्र” (1913) के निर्देशक।
भानु अथैया (1929-2020): भारत की पहली ऑस्कर विजेता। फिल्म “गांधी” (1982) के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिज़ाइन का अकादमी पुरस्कार।
अमोल पालेकर (जन्म 1944): प्रसिद्ध अभिनेता और फिल्म निर्देशक।
नृत्य
उदय शंकर (1900-1977): भारतीय आधुनिक नृत्य के अग्रदूत।
फोटोग्राफी
होमाई व्यारवाल्ला (1913-2012): भारत की पहली महिला फोटो पत्रकार।
अन्य क्षेत्र
प्रमिला दंडवते (1928-2001): समाजवादी नेता और लोकसभा सदस्य।
राज ठाकरे (जन्म 1968): महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के संस्थापक और राजनीतिज्ञ।
शैक्षणिक उत्कृष्टता और पुरस्कार
जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व छात्रों ने लगभग 16 पद्म पुरस्कार प्राप्त किए हैं, जो भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के संस्थान स्थापित करने में भी मदद की है जैसे:
- राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), अहमदाबाद
- इंडस्ट्रियल डिज़ाइन सेंटर (IIT-B), मुंबई
- सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी (CEPT), अहमदाबाद
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स
- काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर
- नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स ऑफ आर्किटेक्चर
भारतीय आधुनिक कला में योगदान
औपनिवेशिक से राष्ट्रीय पहचान की ओर
स्वतंत्रता के बाद स्कूल ने प्रशासनिक सुधार किए और औपनिवेशिक सौंदर्यशास्त्र को अस्वीकार करते हुए आधुनिक भारतीय अभिव्यक्ति को बढ़ावा दिया। प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप के माध्यम से इस संस्थान ने भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
बहु-विषयक दृष्टिकोण
जे.जे. स्कूल ने कला, वास्तुकला और डिज़ाइन के बीच संवाद स्थापित किया। यहां के छात्रों ने विभिन्न माध्यमों में प्रयोग किया और भारतीय सौंदर्यशास्त्र की एक नई भाषा विकसित की।
सामाजिक जागरूकता
संस्थान ने विभिन्न सामाजिक जागरूकता परियोजनाओं में योगदान दिया है जैसे 1950 के दशक में “नो द फाइव-ईयर प्लान”, 1963 के भारत-चीन युद्ध के दौरान “आवर हिमालयाज़”, और 1965 में “इंटरनेशनल टूरिस्ट फेयर – बॉम्बे”।
वर्तमान स्थिति और भविष्य
डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा
2023 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट को डी नोवो डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा प्रदान किया। 2024-25 शैक्षणिक वर्ष से यह “सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी)” के रूप में कार्य कर रहा है। यह भारतीय कला शिक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
आधुनिक सुविधाएं और विस्तार
विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद संस्थान ने नए पाठ्यक्रम, शोध सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की योजनाएं शुरू की हैं। यह आधुनिक कला शिक्षा के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक विरासत को भी संरक्षित रख रहा है।
चुनौतियां
- अवसंरचना का आधुनिकीकरण: विरासत भवन को संरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाएं प्रदान करना
- प्रवेश की प्रतिस्पर्धा: सीमित सीटों के लिए हजारों आवेदक
- वित्तीय संसाधन: अनुदान और वित्तपोषण की निरंतर आवश्यकता
- पाठ्यक्रम का समकालीनीकरण: परंपरागत तकनीकों के साथ डिजिटल कला का समन्वय
अवसर
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: विदेशी संस्थानों के साथ साझेदारी
- डिजिटल कला: नई तकनीकों में पाठ्यक्रम विकास
- अनुसंधान: कला इतिहास और समकालीन अभ्यास में शोध
- सांस्कृतिक संरक्षण: भारतीय कला परंपराओं का दस्तावेजीकरण और संरक्षण
प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक गतिविधियां
वार्षिक प्रदर्शनियां
स्कूल नियमित रूप से छात्रों की कृतियों की प्रदर्शनियां आयोजित करता है। ये प्रदर्शनियां कला प्रेमियों, संग्राहकों और आलोचकों को आकर्षित करती हैं। कई छात्र इन प्रदर्शनियों के माध्यम से अपना व्यावसायिक करियर शुरू करते हैं।
कार्यशालाएं और व्याख्यान
संस्थान नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को आमंत्रित करता है। ये कार्यशालाएं छात्रों को नई तकनीकों और दृष्टिकोणों से परिचित कराती हैं।
सांस्कृतिक उत्सव
स्कूल विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है जो कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच को एक साथ लाते हैं। ये आयोजन बहु-विषयक सोच को प्रोत्साहित करते हैं।
संग्रहालय और आर्काइव
कला संग्रह
स्कूल के पास एक समृद्ध संग्रह है जिसमें ऐतिहासिक पेंटिंग्स, मूर्तियां, प्रिंट और कलाकृतियां शामिल हैं। इनमें से कई अजंता की प्रतियां और पूर्व छात्रों की महत्वपूर्ण कृतियां हैं।
आर्काइव और दस्तावेज़
स्कूल का आर्काइव भारतीय कला इतिहास के लिए अमूल्य है। इसमें ऐतिहासिक दस्तावेज़, पत्राचार, फोटोग्राफ और पूर्व छात्रों के अभिलेख सुरक्षित हैं।
समाज में योगदान
कला शिक्षा का लोकतंत्रीकरण
जे.जे. स्कूल ने कला शिक्षा को विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एम.एफ. हुसैन जैसे कलाकार जो साधारण पृष्ठभूमि से आए थे, इस संस्थान ने उन्हें विश्व स्तरीय कलाकार बनाया।
भारतीय पहचान का निर्माण
स्कूल ने स्वतंत्रता के बाद भारतीय कला की पहचान बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई। यहां प्रशिक्षित कलाकारों ने देश की दृश्य संस्कृति को आकार दिया – फिल्म पोस्टर से लेकर किताबों के चित्रण तक, विज्ञापन डिज़ाइन से लेकर स्मारकों की मूर्तियों तक।
सामुदायिक जुड़ाव
संस्थान नियमित रूप से सार्वजनिक कला परियोजनाएं और सामुदायिक कार्यशालाएं आयोजित करता है। यह कला को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास करता है।
तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य: अन्य भारतीय कला संस्थानों से तुलना
शांतिनिकेतन (कला भवन)
रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन ने भारतीय परंपराओं पर अधिक जोर दिया, जबकि जे.जे. स्कूल ने पश्चिमी तकनीकों के साथ भारतीय विषयों को मिलाया। दोनों संस्थानों ने मिलकर भारतीय आधुनिक कला की नींव रखी।
फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स, बनारस
यह संस्थान भारतीय शास्त्रीय परंपराओं और आध्यात्मिकता पर केंद्रित रहा। जे.जे. स्कूल अधिक शहरी और आधुनिकतावादी दृष्टिकोण वाला रहा।
मद्रास स्कूल ऑफ आर्ट्स
दक्षिण भारतीय कला परंपराओं से प्रभावित, मद्रास स्कूल ने अपनी क्षेत्रीय विशिष्टता बनाए रखी। जे.जे. स्कूल अधिक विविध और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण वाला रहा।
निष्कर्ष
सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि भारतीय कला के जीवंत इतिहास का साक्षी और निर्माता है। 167 वर्षों की अपनी यात्रा में इस संस्थान ने भारतीय कला को औपनिवेशिक प्रभावों से मुक्त कराया, आधुनिक भारतीय कला की भाषा विकसित की और अनगिनत महान कलाकारों को जन्म दिया।
एम.एफ. हुसैन, एस.एच. राज़ा, फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा, अकबर पदमसी, त्यब मेहता जैसे महान कलाकारों की कर्मभूमि होने के साथ-साथ, इस संस्थान ने भारतीय सिनेमा (दादासाहेब फाल्के), वास्तुकला (बी.वी. दोशी), और अन्य कई क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है।
प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप का जन्मस्थान होने के नाते, यह संस्थान भारतीय आधुनिक कला आंदोलन का केंद्र रहा है। आज, डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के रूप में, यह नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रशिक्षित करते हुए अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
इसकी विरासत भवन, ऐतिहासिक परिसर, और समृद्ध आर्काइव भारतीय कला इतिहास के अमूल्य संसाधन हैं। किपलिंग बंगला और अजंता की प्रतियां इसकी विरासत का हिस्सा हैं जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित की जा रही हैं।
आधुनिक युग में भी, यह संस्थान परंपरा और नवाचार के बीच संतुलन बनाते हुए भारतीय कला शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डिजिटल कला, समकालीन अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसरों को अपनाते हुए, सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट भारतीय कला के भविष्य को आकार देने के लिए तैयार है।
यह संस्थान केवल कला तकनीक सिखाने का स्थान नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहां कलाकार अपनी रचनात्मकता को खोजते हैं, अपनी दृष्टि विकसित करते हैं, और समाज के लिए अर्थपूर्ण कला का निर्माण करते हैं। इसकी शिक्षा पद्धति, विविध पाठ्यक्रम और प्रेरक वातावरण ने इसे भारत के सबसे प्रतिष्ठित कला संस्थान के रूप में स्थापित किया है।
सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट की कहानी भारतीय कला की कहानी है – औपनिवेशिक युग से लेकर स्वतंत्रता तक, आधुनिकता से लेकर समकालीनता तक। यह संस्थान भारतीय कला के अतीत का गौरव, वर्तमान की जीवंतता और भविष्य की आशा का प्रतीक है।
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Minecraft Quiz NEXT RESTART QUIZ NEXT: Mine Craft Quiz Can You Name These Iconic Actors? - QUIZ: Can You Name These Iconic Actors?Start Quiz Archive Photos/Getty Images Are you an expert on Hollywood’s leading men? We’re going back 50 years and more here, digging into historic Hollywood … Read more
- कला के प्रमुख तत्व: सौंदर्य, अभिव्यक्ति, सृजनात्मकता और कल्पना
elements of art are: beauty, expression, creativity, and imagination. प्रस्तावना कला मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन और सार्वभौमिक अभिव्यक्तियों … Read more - कला शिक्षण के उद्देश्य
प्रस्तावना कला शिक्षण मानव विकास का एक महत्वपूर्ण अंग है जो व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक होता है। … Read more - कला का अर्थ: B.Ed. के लिए विस्तृत अध्ययन सामग्री
The meaning of art: Detailed study material for B.Ed. प्रस्तावना कला मानव सभ्यता का अभिन्न अंग है। यह मानवीय … Read more - कला क्या है? (B.Ed. परिप्रेक्ष्य)
कला मानवता की सबसे मौलिक अभिव्यक्ति के रूपों में से एक है, फिर भी इसे परिभाषित करना आश्चर्यजनक रूप … Read more - कला का अर्थ (Kala ka Arth) — एक समग्र एवं विस्तृत लेख
भूमिका कला मानव सभ्यता की आत्मा है। जब मनुष्य ने बोलना, सोचना और महसूस करना सीखा, तभी से कला … Read more - COLOUR THEORY — 100 MCQs
1. Primary colours in pigment (RYB) are— A) Red, Yellow, BlueB) Red, Green, BlueC) Cyan, Magenta, YellowD) Green, Orange, … Read more - Tanjore Painting: The Timeless Gold-Leaf Legacy of South Indian Art
Introduction to Tanjore Painting What Is Tanjore (Thanjavur) Painting? Tanjore painting represents one of India’s most celebrated classical art … Read more - General Knowledge of Art & Culture
Understanding art and culture requires recognizing how creative expression reflects and shapes human experience across time and geography. This knowledge encompasses diverse traditions, movements, cultural contexts, and the interconnections between artistic practice and society. - Drawing & Painting Techniques
Mastering drawing and painting requires understanding fundamental techniques that have been refined over centuries. Whether you’re a beginner or advancing your skills, these core methods form the foundation of visual art. - Art History of India: Ancient to Modern
The artistic heritage of India spans over 5,000 years, reflecting the subcontinent’s rich cultural, religious, and political transformations. From … Read more - TGT/PGT ART SCULPTURE – 100 MCQs
1. The subtractive method of sculpture involves— A. Adding materialB. Removing materialC. CastingD. ModelingAnswer: B 2. “Pietà” was sculpted … Read more - ART PEDAGOGY — 100 MCQs
1. The primary aim of art education is to— A) Train professional artistsB) Develop aesthetic and creative expressionC) Improve … Read more - MCQs for TGT / PGT ART (with answers)
Topic-wise sets (painting, sculpture, pedagogy, colour theory, Indian art) SET 1 — PAINTING (20 MCQs) SET 2 — SCULPTURE … Read more - 100 MCQs for TGT / PGT ART (with answers)
SECTION A — INDIAN ART (1–30) SECTION B — WESTERN ART (31–55) SECTION C — TECHNIQUES & MATERIALS (56–80) … Read more - 100 MCQs for TGT/PGT ART
(Answers provided at the end) SECTION A — INDIAN ART (1–25) SECTION B — WESTERN ART (26–45) SECTION C … Read more - Sculpture & Craft Techniques
Sculpture and craft encompass three-dimensional art forms that transform materials into expressive objects. From ancient clay modeling to contemporary installations, these techniques allow artists to manipulate space, form, and texture in ways unique to physical making. - Ajanta Cave Paintings (MCQs)
100 multiple choice questions (MCQs) about Ajanta Cave Paintings, divided into categories 🏛️ General Information 🕰️ Historical Context 🖌️ Art and Paintings 🏛️ Architecture … Read more
- प्रागैतिहासिक कालीन भारतीय मूर्तिकला और वास्तुकला का इतिहास | History of Prehistoric Indian Sculpture and Architecture
प्रागैतिहासिक काल (लगभग 3000 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व) पृष्ठभूमि भारतीय मूर्तिकला और वास्तुकला का इतिहास बहुत प्राचीन … Read more - सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास,प्रमुख नगर,वास्तुकला,चित्र कला,मोहरें और प्रतिमाएं | History of Indus Valley Civilization, Major Cities, Architecture, Paintings, Seals and Statues
हड़प्पा व मोहनजोदड़ो की कला पाषाण युगीन सहस्त्रों वर्षों के पश्चात् की प्राचीनतम संस्कृतियाँ सिन्धु घाटी में मोहनजोदड़ो व … Read more - कला क्या है | कला का अर्थ, कला के प्रकार
“जीवन के प्रत्येक अंगों को नियमित रूप से निर्मित करने को ही कला कहते हैं।” समय-समय पर कुछ विद्वानों ने अपने विचार कला की परिभाषा के प्रति व्यक्त किए हैं, कुछ जो निम्न है… - भारतीय चित्रकला के छः अंग | Six Limbs Of Painting
षडंग चित्रकार अपने निरंतर अभ्यास के द्वारा अपने भावों सम्वेदनाओं तथा अनुभवों के प्रकाशन हेतु एक प्रविधि को जन्म … Read more - Cave painting | गुफ़ा चित्र
गुहा चित्रण (जोगीमारा, अजन्ता, बाघ, बादामी, एलोरा, सित्तनवासल इत्यादि) जोगीमारा गुफाएँ Join our WhatsApp channel for the latest updates. … Read more - भारतीय लघु चित्रकला की विभिन्न शैलियां | Different Styles of Indian Miniature Paintings
भारतीय लघु चित्रकला जैन शैली Join our WhatsApp channel for the latest updates. पाल शैली (730-1197 ई०) अपभ्रंश शैली … Read more - राजस्थानी चित्र शैली | राजस्थानी चित्र शैली के प्रमुख केंद्र | Rajasthani Schools of Painting | Major centers of Rajasthani painting style
राजस्थानी शैली परिचय राजस्थान का एक वृहद क्षेत्र है जो ‘अवोड ऑफ प्रिंसेज’ (Abode of Princes) माना जाता है। … Read more - अजंता गुफाओं की संख्या, चित्रकला,निर्माण काल और अजन्ता चित्र शैली की विशेषताएँ | Number of Ajanta Caves, Painting, Construction Period and Characteristics of Ajanta Painting Style
अजन्ता की गुफाएँ महाराष्ट्र में औरंगाबाद में 68 किलोमीटर दूर पहाड़ियों में विराजमान हैं। जहाँ प्रकृति ने मुक्त हस्त से अपना सौन्दर्य विकीर्ण किया है। प्राय: कलाकार को शोरगुल से दूर शान्तमय वातावरण में चित्रण करना भाता है - पहाड़ी शैली और उसकी विशेषताएं
परिचय 17 शताब्दी के अन्तिम चतुर्थांश में पहाड़ी राजकुमार मुगलों के आश्रित थे जो कि मुगलों के दरबार में … Read more - मिर्जापुर (उ०प्र०) एवं ‘मध्य-प्रदेश’ से प्राप्त शिलाचित्र | Inscriptions received from Mirzapur (U.P.) and ‘Madhya Pradesh’
उत्तर प्रदेश से प्राप्त शिलाचित्र मिर्जापुर इलाहाबाद-मुगलसराय रेल पच पर मिर्जापुर मुख्यालय से करीब 20 किमी० दूर विध्य की … Read more - अजंता की मुख्य गुफाओं के चित्र
अजंता की मुख्य गुफाओं के चित्र,अजन्ता में चैत्य और बिहार दोनों प्रकार की 30 गुफायें हैं। इनमें गुफा संख्या 1, 2, 6, 7, 9, 10, 11,15, 16, 17, 19, 20, 21 व 22 में चित्र बने थे। आज केवल गुफा संख्या 1, 2, 9, 10, 16 व 17 चित्रों से मुख्य रूप से सुसज्जित है तथा यहीं अधिकांश चित्र सुरक्षित है। - अपभ्रंश शैली के चित्र | अपभ्रंश-शैली की प्रमुख विशेषतायें | जैन शैली | गुजराती शैली या पश्चिम भारतीय शैली | ग्रामीण शैली
श्वेताम्बर जैन धर्म की अनेक सचित्र पोथियाँ 1100 ई० से 1500 ई० के मध्य विशेष रूप से लिखी गई। … Read more - अकबर-कालीन चित्रित ग्रन्थ
अकबर काल में कला अकबर- 1557 ई० में अकबर अपने पिता हुमायूँ की मृत्यु के पश्चात लगभग तेरह वर्ष … Read more - जहाँगीर कालीन चित्र शैली | जहाँगीर कालीन चित्र
चित्रकला के जिस संस्थान का बीजारोपण अकबर ने किया था वास्तव में वह जहाँगीर (१६०५-१६२७ ईसवी राज्यकाल) के समय … Read more - गुप्त कालीन कला
गुप्तकाल (300 ई0-600 ई०) मौर्य सम्राट ने मगध को राज्य का केन्द्र बनाकर भारतीय इतिहास में जो गौरव प्रदान … Read more - मेवाड़ चित्रशैली की विषय-वस्तु तथा विशेषतायें
मेवाड़ शैली राजस्थान के अन्य क्षेत्रों के समान मेवाड़ भी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रख्यात है। यहाँ के … Read more - ‘काँगड़ा’ चित्र-शैली की विषयवस्तु तथा विशेषतायें
‘काँगड़ा’ चित्र-शैली का परिचय बाह्य रूप से समस्त पहाड़ी कला ‘काँगड़ा’ के नाम से अभिहित की जाती है जिसका … Read more - गांधार शैली का विकास और इसकी विशेषताएँ
गांधार शैली कुषाण काल में गान्धार एक ऐसा प्रदेश था जहां एशिया और यूरोप की कई सभ्यताएं एक-दूसरे से … Read more - मुगल शैली | मुग़ल काल में चित्रकला और वास्तुकला का विकास | Development of painting and architecture during the Mughal period
मुगल चित्रकला को भारत की ही नहीं वरन् एशिया की कला में स्वतन्त्र और महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह शैली ईरान की कला परम्परा से उत्पन्न होकर भी ईरानी शैली नहीं रही। इस पर यूरोपीय तथा चीनी प्रभाव भी पड़े हैं। इस शैली पर भारतीय रंग योजनाओं तथा वातावरण का प्रभाव पड़ा है। - मौर्य काल में मूर्तिकला और वास्तुकला का विकास ( 325 ई.पू. से 185 ई.पू.) | Development of sculpture and architecture in Maurya period
मौर्यकालीन कला को उच्च स्तर पर ले जाने का श्रेय चन्द्रगुप्त के पौत्र सम्राट अशोक को जाता है। अशोक के समय से भारत में मूर्तिकला का स्वतन्त्र कला के रूप में विकास होता दिखाई देता है। - पाल शैली | पाल चित्रकला शैली क्या है?
नेपाल की चित्रकला में पहले तो पश्चिम भारत की शैली का प्रभाव बना रहा और बाद में उसका स्थान इस नव-निर्मित पूर्वीय शैली ने ले लिया नवम् शताब्दी में जिस नयी शैली का आविर्भाव हुआ था उसके प्रायः सभी चित्रों का सम्बन्ध पाल वंशीय राजाओं से था। अतः इसको पाल शैली के नाम से अभिहित करना अधिक उपयुक्त समझा गया।” - दक्षिणात्य शैली | दक्षिणी शैली | दक्खिनी चित्र शैली | दक्कन चित्रकला | Deccan Painting Style
दक्खिनी चित्र शैली: परिचय भारतीय चित्रकला के इतिहास की सुदीर्घ परम्परा एक लम्बे समय से दिखाई देती है। इसके … Read more - संस्कृति तथा कला
किसी भी देश की संस्कृति उसकी आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा कलात्मक उपलब्धियों की प्रतीक होती है। यह संस्कृति उस सम्पूर्ण … Read more - भारतीय कला संस्कृति एवं सभ्यता
कला संस्कृति का यह महत्त्वपूर्ण अंग है जो मानव मन को प्रांजल सुंदर तथा व्यवस्थित बनाती है। भारतीय कलाओं … Read more - भारतीय चित्रकला की विशेषताएँ
भारतीय चित्रकला तथा अन्य कलाएँ अन्य देशों की कलाओं से भिन्न हैं। भारतीय कलाओं की कुछ ऐसी महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ … Read more - कला अध्ययन के स्रोत
कला अध्ययन के स्रोत से अभिप्राय उन साधनों से है जो प्राचीन कला इतिहास के जानने में सहायता देते … Read more - Explicabo eum ex idRerum est eligendi inventore. Veritatis debitis porro repudiandae nobis. Autem ipsum nobis numquam dolores Possimus nihil quo architecto laboriosam. … Read more
- आनन्द केण्टिश कुमारस्वामी
पुनरुत्थान काल में भारतीय कला के प्रमुख प्रशंसक एवं लेखक डा० आनन्द कुमारस्वामी (1877-1947 ई०)- भारतीय कला के पुनरुद्धारक, … Read more - भारतीय चित्रकला में नई दिशाएँ
लगभग 1905 से 1920 तक बंगाल शैली बड़े जोरों से पनपी देश भर में इसका प्रचार हुआ और इस … Read more - सोमालाल शाह | Somalal Shahआप भी गुजरात के एक प्रसिद्ध चित्रकार हैं आरम्भ में घर पर कला का अभ्यास करके आपने श्री रावल … Read more
- बंगाल स्कूल | भारतीय पुनरुत्थान कालीन कला और उसके प्रमुख चित्रकार | Indian Renaissance Art and its Main Paintersबंगाल में पुनरुत्थान 19 वीं शती के अन्त में अंग्रजों ने भारतीय जनता को उसकी सास्कृतिक विरासत से विमुख … Read more
- तैयब मेहतातैयब मेहता का जन्म 1926 में गुजरात में कपाडवंज नामक गाँव में हुआ था। कला की उच्च शिक्षा उन्होंने … Read more
- कृष्ण रेड्डी ग्राफिक चित्रकार कृष्ण रेड्डी का जन्म (1925 ) दक्षिण भारत के आन्ध्र प्रदेश में हुआ था। बचपन में वे … Read more
- लक्ष्मण पै
लक्ष्मण पै का जन्म (1926 ) गोवा के एक सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। गोवा की हरित भूमि … Read more - आदिकाल की चित्रकला | Primitive Painting
(गुहाओं, कंदराओं, शिलाश्रयों की चित्रकला) (३०,००० ई० पू० से ५० ई० तक) चित्रकला का उद्गम चित्रकला का इतिहास उतना … Read more - राजस्थानी चित्र शैली की विशेषतायें | Rajasthani Painting Style
राजस्थान एक वृहद क्षेत्र है जो “अवोड ऑफ प्रिंसेज” माना जाता है इसके पश्चिम में बीकानेर, दक्षिण में बूँदी, कोटा तथा … Read more - टीजीटी / पीजीटी कला से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न | Important questions related to TGT/PGT Arts
सांझी कला किस पर की जाती है ? उत्तर: (B) भूमि पर ‘चाँद को देखकर भौंकता हुआ कुत्ता’ किस … Read more - रेखा क्या है | रेखा की परिभाषारखा वो बिन्दुओं या दो सीमाओं के बीच की दूरी है, जो बहुत सूक्ष्म होती है और गति की दिशा निर्देश करती है लेकिन कलापक्ष के अन्तर्गत रेखा का प्रतीकात्मक महत्व है और यह रूप की अभिव्यक्ति व प्रवाह को अंकित करती है।
- बसोहली की चित्रकलाबसोहली की स्थिति बसोहली राज्य के अन्तर्गत ७४ ग्राम थे जो आज जसरौटा जिले की बसोहली तहसील के अन्तर्गत … Read more
- अभिव्यंजनावाद | भारतीय अभिव्यंजनावाद | Indian Expressionismयूरोप में बीसवीं शती का एक प्रमुख कला आन्दोलन “अभिव्यंजनावाद” के रूप में 1905-06 के लगभग उदय हुआ । … Read more
- तंजौर शैलीतंजोर के चित्रकारों की शाखा के विषय में ऐसा अनुमान किया जाता है कि यहाँ चित्रकार राजस्थानी राज्यों से … Read more
- मैसूर शैलीदक्षिण के एक दूसरे हिन्दू राज्य मैसूर में एक मित्र प्रकार की कला शैली का विकास हुआ। उन्नीसवीं शताब्दी … Read more
- पटना शैलीउथल-पुथल के इस अनिश्चित वातावरण में दिल्ली से कुछ मुगल शैली के चित्रकारों के परिवार आश्रय की खोज में … Read more
- कलकत्ता ग्रुप
1940 के लगभग से कलकत्ता में भी पश्चिम से प्रभावित नवीन प्रवृत्तियों का उद्भव हुआ । 1943 में प्रदोष … Read more - Gopal Ghosh Biography | गोपाल घोष (1913-1980)
आधुनिक भारतीय कलाकारों में रोमाण्टिक के रूप में प्रतिष्ठित कलाकार गोपाल घोष का जन्म 1913 में कलकत्ता में हुआ … Read more - आधुनिक भारतीय चित्रकला की पृष्ठभूमि | Aadhunik Bharatiya Chitrakala Ki Prshthabhoomi
आधुनिक भारतीय चित्रकला का इतिहास एक उलझनपूर्ण किन्तु विकासशील कला का इतिहास है। इसके आरम्भिक सूत्र इस देश के इतिहास तथा भौगोलिक … Read more - काँच पर चित्रण | Glass Paintingअठारहवीं शती उत्तरार्द्ध में पूर्वी देशों की कला में अनेक पश्चिमी प्रभाव आये। यूरोपवासी समुद्री मार्गों से खूब व्यापार … Read more
- पट चित्रकला | पटुआ कला क्या हैलोककला के दो रूप है, एक प्रतिदिन के प्रयोग से सम्बन्धित और दूसरा उत्सवों से सम्बन्धित पहले में सरलता है; दूसरे में आलंकारिकता दिखाया तथा शास्त्रीय नियमों के अनुकरण की प्रवृति है। पटुआ कला प्रथम प्रकार की है।
- कम्पनी शैली | पटना शैली | Compony School Paintingsअठारहवी शती के मुगल शैली के चित्रकारों पर उपरोक्त ब्रिटिश चित्रकारों की कला का बहुत प्रभाव पड़ा। उनकी कला … Read more
- बंगाल का आरम्भिक तैल चित्रण | Early Oil Painting in Bengal
अठारहवीं शती में बंगाल में जो तैल चित्रण हुआ उसे “डच बंगाल शैली” कहा जाता है। इससे स्पष्ट है … Read more - कला के क्षेत्र में किये जाने वाले सरकारी प्रयास | Government efforts made by the British in the field of art
सन् 1857 की क्रान्ति के असफल हो जाने से अंग्रेजों की शक्ति बढ़ गयी और भारत के अधिकांश भागों … Read more - अवनीन्द्रनाथ ठाकुरआधुनिक भारतीय चित्रकला आन्दोलन के प्रथम वैतालिक श्री अवनीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म जोडासको नामक स्थान पर सन् 1871 में … Read more
- ठाकुर परिवार | ठाकुर शैली1857 की असफल क्रान्ति के पश्चात् अंग्रेजों ने भारत में हर प्रकार से अपने शासन को दृढ़ बनाने का … Read more
- असित कुमार हाल्दार | Asit Kumar Haldar
श्री असित कुमार हाल्दार में काव्य तथा चित्रकारी दोनों ललित कलाओं का सुन्दर संयोग मिलता है। श्री हाल्दार का … Read more - क्षितीन्द्रनाथ मजुमदार के चित्र | Paintings of Kshitindranath Majumdar
1. गंगा का जन्म (शिव)- (कागज, 12 x 18 इंच ) 2. मीराबाई की मृत्यु – ( कागज, 12 … Read more - क्षितीन्द्रनाथ मजुमदार | Kshitindranath Majumdar
क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार का जन्म 1891 ई० में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में निमतीता नामक स्थान पर हुआ था। … Read more - देवी प्रसाद राय चौधरी | Devi Prasad Raychaudhari
देवी प्रसाद रायचौधुरी का जन्म 1899 ई० में पू० बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) में रंगपुर जिले के ताजहाट नामक ग्राम … Read more - अब्दुर्रहमान चुगताई (1897-1975) वंश परम्परा से ईरानी और जन्म से भारतीय श्री मुहम्मद अब्दुर्रहमान चुगताई अवनीन्द्रनाथ ठाकुर के ही एक प्रतिभावान् शिष्य … Read more
- हेमन्त मिश्र (1917)
असम के चित्रकार हेमन्त मिश्र एक मौन साधक हैं। वे कम बोलते हैं। वेश-भूषा से क्रान्तिकारी लगते है अपने … Read more - विनोद बिहारी मुखर्जी | Vinod Bihari Mukherjee Biographyमुखर्जी महाशय (1904-1980) का जन्म बंगाल में बहेला नामक स्थान पर हुआ था। आपकी आरम्भिक शिक्षा स्थानीय पाठशाला में … Read more
- के० वेंकटप्पा | K. Venkatappaआप अवनीन्द्रनाथ ठाकुर के आरम्भिक शिष्यों में से थे। आपके पूर्वज विजयनगर के दरबारी चित्रकार थे विजय नगर के … Read more
- शारदाचरण उकील | Sharadacharan Ukilश्री उकील का जन्म बिक्रमपुर (अब बांगला देश) में हुआ था। आप अवनीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रमुख शिष्यों में से … Read more
- मिश्रित यूरोपीय पद्धति के राजस्थानी चित्रकार | Rajasthani Painters of Mixed European Styleइस समय यूरोपीय कला से राजस्थान भी प्रभावित हुआ। 1851 में विलियम कारपेण्टर तथा 1855 में एफ०सी० लेविस ने राजस्थान को … Read more
- रामकिंकर वैज | Ramkinkar Vaijशान्तिनिकेतन में “किकर दा” के नाम से प्रसिद्ध रामकिंकर का जन्म बांकुड़ा के निकट जुग्गीपाड़ा में हुआ था। बाँकुडा … Read more
- कनु देसाई | Kanu Desai(1907) गुजरात के विख्यात कलाकार कनु देसाई का जन्म – 1907 ई० में हुआ था। आपकी कला शिक्षा शान्ति … Read more
- नीरद मजूमदार | Nirad Majumdaar
नीरद (अथवा बंगला उच्चारण में नीरोद) को नीरद (1916-1982) चौधरी के नाम से भी लोग जानते हैं। उनकी कला … Read more - मनीषी दे | Manishi Deदे जन्मजात चित्रकार थे। एक कलात्मक परिवार में उनका जन्म हुआ था। मनीषी दे का पालन-पोषण रवीन्द्रनाथ ठाकुर की. … Read more
- सुधीर रंजन खास्तगीर | Sudhir Ranjan Khastgirसुधीर रंजन खास्तगीर का जन्म 24 सितम्बर 1907 को कलकत्ता में हुआ था। उनके पिता श्री सत्यरंजन खास्तगीर छत्ताग्राम … Read more
- ललित मोहन सेन | Lalit Mohan Senललित मोहन सेन का जन्म 1898 में पश्चिमी बंगाल के नादिया जिले के शान्तिपुर नगर में हुआ था ग्यारह … Read more
- नन्दलाल बसु | Nandlal Basu
श्री अवनीन्द्रनाथ ठाकुर की शिष्य मण्डली के प्रमुख साधक नन्दलाल बसु थे ये कलाकार और विचारक दोनों थे। उनके … Read more - रणबीर सिंह बिष्ट | Ranbir Singh Bishtरणबीर सिंह बिष्ट का जन्म लैंसडाउन (गढ़बाल, उ० प्र०) में 1928 ई० में हुआ था। आरम्भिक शिक्षा गढ़वाल में … Read more
- रामगोपाल विजयवर्गीय | Ramgopal Vijayvargiyaपदमश्री रामगोपाल विजयवर्गीय जी का जन्म बालेर ( जिला सवाई माधोपुर) में सन् 1905 में हुआ था। आप महाराजा … Read more
- रथीन मित्रा (1926)
रथीन मित्रा का जन्म हावड़ा में 26 जुलाई को 1926 में हुआ था। उनकी कला-शिक्षा कलकत्ता कला-विद्यालय में हुई … Read more - मध्यकालीन भारत में चित्रकला | Painting in Medieval India
दिल्ली में सल्तनत काल की अवधि के दौरान शाही महलों, शयनकक्षों और मसजिदों से भित्ति चित्रों के साक्ष्य मिले … Read more - रमेश बाबू कन्नेकांति की पेंटिंग | Eternal Love By Ramesh Babu Kannekanti
शिव के चार हाथ शिव की कई शक्तियों को दर्शाते हैं। पिछले दाहिने हाथ में ढोल है, जो ब्रह्मांड … Read more - प्रगतिशील कलाकार दल | Progressive Artist Group
कलकत्ता की तुलना में बम्बई नया शहर है किन्तु उसका विकास बहुत अधिक और शीघ्रता से हुआ है। 1911 … Read more - आधुनिक काल में चित्रकला
18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी की शुरुआत में, चित्रों में अर्द्ध-पश्चिमी स्थानीय शैली शामिल हुई, जिसे ब्रिटिश … Read more - रमेश बाबू कनेकांति | Painting – A stroke of luck By Ramesh Babu Kannekanti
गणेश के हाथी के सिर ने उन्हें पहचानने में आसान बना दिया है। भले ही वह कई विशेषताओं से … Read more - सतीश गुजराल | Satish Gujral Biography
सतीश गुजराल का जन्म पंजाब में झेलम नामक स्थान पर 1925 ई० में हुआ था। केवल दस वर्ष की … Read more - पटना चित्रकला | पटना या कम्पनी शैली | Patna School of Painting
औरंगजेब द्वारा राजदरबार से कला के विस्थापन तथा मुगलों के पतन के बाद विभिन्न कलाकारों ने क्षेत्रीय नवाबों के यहाँ … Read more - रमेश बाबू कन्नेकांति | Painting – Tranquility & harmony By Ramesh Babu Kannekantiयह कला पहाड़ी कलाकृतियों की 18वीं शताब्दी की शैली से प्रेरित है। इस आनंदमय दृश्य में, पार्वती पति भगवान … Read more
- आगोश्तों शोफ्त | Agoston Schofftशोफ्त (1809-1880) हंगेरियन चित्रकार थे। उनके विषय में भारत में बहुत कम जानकारी है। शोफ्त के पितामह जर्मनी में पैदा … Read more
- कालीघाट चित्रकारी | Kalighat Painting
कालीघाट चित्रकला का नाम इसके मूल स्थान कोलकाता में कालीघाट के नाम पर पड़ा है। कालीघाट कोलकाता में काली मंदिर … Read more - प्राचीन काल में चित्रकला में प्रयुक्त सामग्री | Material Used in Ancient Art
विभिन्न प्रकार के चित्रों में विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया जाता था। साहित्यिक स्रोतों में चित्रशालाओं (आर्ट गैलरी) और … Read more - डेनियल चित्रकार | टामस डेनियल तथा विलियम डेनियल | Thomas Daniels and William Danielsटामस तथा विलियम डेनियल भारत में 1785 से 1794 के मध्य रहे थे। उन्होंने कलकत्ता के शहरी दृश्य, ग्रामीण … Read more
- मिथिला चित्रकला | मधुबनी कला | Mithila Painting
मिथिला चित्रकला, जिसे मधुबनी लोक कला के रूप में भी जाना जाता है. बिहार के मिथिला क्षेत्र की पारंपरिक कला है। यह … Read more - भारतीय चित्रकला | Indian Art
परिचय टेराकोटा पर या इमारतों, घरों, बाजारों और संग्रहालयों की दीवारों पर आपको कई पेंटिंग, बॉल हैंगिंग या चित्रकारी … Read more - भारत में विदेशी चित्रकार | Foreign Painters in Indiaआधुनिक भारतीय चित्रकला के विकास के आरम्भ में उन विदेशी चित्रकारों का महत्वपूर्ण योग रहा है जिन्होंने यूरोपीय प्रधानतः … Read more
- सजावटी चित्रकला | Decorative Arts
भारतीयों की कलात्मक अभिव्यक्ति केवल कैनवास या कागज पर चित्रकारी करने तक ही सीमित नहीं है। घरों की दीवारों … Read more - बी. प्रभा
नागपुर में जन्मी बी० प्रभा (1933 ) को बचपन से ही चित्र- रचना का शौक था। सोलह वर्ष की आयु … Read more - दत्तात्रेय दामोदर देवलालीकर | Dattatreya Damodar Devlalikar Biographyअपने आरम्भिक जीवन में “दत्तू भैया” के नाम से लोकप्रिय श्री देवलालीकर का जन्म 1894 ई० में हुआ था। … Read more
- शैलोज मुखर्जी
शैलोज मुखर्जी का जन्म 2 नवम्बर 1907 दन को कलकत्ता में हुआ था। उनकी कला चेतना बचपन से ही … Read more - नारायण श्रीधर बेन्द्रे | Narayan Shridhar Bendre
बेन्द्रे का जन्म 21 अगस्त 1910 को एक महाराष्ट्रीय मध्यवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पूर्वज पूना में … Read more - रवि वर्मा | Ravi Verma Biography
रवि वर्मा का जन्म केरल के किलिमन्नूर ग्राम में अप्रैल सन् 1848 ई० में हुआ था। यह कोट्टायम से … Read more - के०सी० एस० पणिक्कर | K.C.S.Panikkar
तमिलनाडु प्रदेश की कला काफी पिछड़ी हुई है। मन्दिरों से उसका अभिन्न सम्बन्ध होते हुए भी आधुनिक जीवन पर … Read more - भूपेन खक्खर | Bhupen Khakhar
भूपेन खक्खर का जन्म 10 मार्च 1934 को बम्बई में हुआ था। उनकी माँ के परिवार में कपडे रंगने … Read more - बम्बई आर्ट सोसाइटी | Bombay Art Societyभारत में पश्चिमी कला के प्रोत्साहन के लिए अंग्रेजों ने बम्बई में सन् 1888 ई० में एक आर्ट सोसाइटी … Read more
- परमजीत सिंह | Paramjit Singh
परमजीत सिंह का जन्म 23 फरवरी 1935 अमृतसर में हुआ था। आरम्भिक शिक्षा के उपरान्त वे दिल्ली पॉलीटेक्नीक के … Read more - अनुपम सूद | Anupam Sood
अनुपम सूद का जन्म होशियारपुर में 1944 में हुआ था। उन्होंने कालेज आफ आर्ट दिल्ली से 1967 में नेशनल … Read more - देवकी नन्दन शर्मा | Devki Nandan Sharma
प्राचीन जयपुर रियासत के राज-कवि के पुत्र श्री देवकी नन्दन शर्मा का जन्म 17 अप्रैल 1917 को अलवर में … Read more






















































































































