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रेखा क्या है | रेखा की परिभाषा

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रेखा क्या है | रेखा की परिभाषा

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रखा वो बिन्दुओं या दो सीमाओं के बीच की दूरी है, जो बहुत सूक्ष्म होती है और गति की दिशा निर्देश करती है लेकिन कलापक्ष के अन्तर्गत रेखा का प्रतीकात्मक महत्व है और यह रूप की अभिव्यक्ति व प्रवाह को अंकित करती है।

What Is a Line

अंकन (Drawing) का अर्थ

अंकन शब्द का अर्थ हैं कि कलम या किसी अन्य मन्त्र को सहायता से किसी धरातल पर चिन्ह (Mark) छोड़ते जाना। इस अंकन में यन्त्र तथा उसकी संचालन विधि दोनों ही मिलकर ऐसा चिन्ह छोड़ते हैं कि वह अर्थपूर्ण बन जाता है, इस प्रक्रिया के कुछ देर चलने से रेखांकन (Line drawing) का विकास हो जाता है अर्थात् बिन्दुओं के क्रमिक एवं अवाध योग से रेखा का अस्तित्व सामने आता है।

रेखा की परिभाषा

रखा वो बिन्दुओं या दो सीमाओं के बीच की दूरी है, जो बहुत सूक्ष्म होती है और गति की दिशा निर्देश करती है लेकिन कलापक्ष के अन्तर्गत रेखा का प्रतीकात्मक महत्व है और यह रूप की अभिव्यक्ति व प्रवाह को अंकित करती है। अतः साधारण सीमान्त व ज्यामितीय रेखायें चित्र संयोजन में प्रयुक्त रेखाओं से भिन्न होती है। अतः कलात्मक रेखा किसी भी आकार की गति एवं शक्ति का प्रतीकात्मक रेखांकन है जिसका रसास्वादन नेत्रजनित गतिज दिशा से होता है

A line, thus, can be said a symbolic mark denoting movement and force in a form-metered by our eye.

रेखा व दृष्टिम 

कभी-कभी ऐसा होता है कि दो या अधिक बिन्दुओं के बीच वास्तविक रेखा नहीं होती किन्तु बिन्दुओं के मध्य रेखीय प्रभाव आ जाता है। इस प्रकार की रेखायें अनुभूत रेखायें (Felt lines) कहलाती है ।

यदि दो रेखायें बराबर-बराबर खींची जायें और तीर के चिन्ह से विभिन्न दिशा-निर्देशन दिये जायें तो बाहर की ओर को तीर चिन्हित रेखा, अन्दर की ओर तीर चिन्हित रेखा से लम्बी प्रतीत होगी । रेखा में तीर चिन्ह लगाकर उसमें एक दिशा की ओर दौड़ने का भ्रम उत्पन्न किया जा सकता है 

समान्तर रेखाओं को एक बिन्दु पर केन्द्रित अनेक दिशाओं से आने वाली रेखायें प्रभावित करती है और वे समानान्तर नहीं दीखतीं ।

रेखा का प्रभाव

रेखाचित्र का विशेष गुण है। पूर्वीय कला में उसका खुलकर प्रयोग किया गया है और आधुनिक कला के विकास में तो इसका अभूतपूर्व सहयोग रहा है। सीधी व वक्र रेखाओं के भिन्न-भिन्न प्रभाव होते हैं। रेखा की प्रखरता व चमक में जहाँ अस्पष्टता, दृढ़ता एवं सामीप्य प्रकट होता है वहाँ कोमल एवं मध्यम रेखायें सुकुमारता, मृदुता एवं दूरी को प्रकट करती हैं तथा दूसरी ओर अस्पष्ट एवं टूटी-फटी रेखायें कमजोरी तथा अति दूरी का भाव लिए रहती है ।

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