प्राचीन जयपुर रियासत के राज-कवि के पुत्र श्री देवकी नन्दन शर्मा का जन्म 17 अप्रैल 1917 को अलवर में हुआ था । 1936 में आपने महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट जयपुर से कला का डिप्लोमा प्राप्त किया।
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आप वनस्थली विद्यापीठ में चित्रकला विभाग के अध्यक्ष रहे हैं। आपने लन्दन, टोक्यो, विक्टोरिया, जयपुर, इलाहाबाद, मंसूरी, दिल्ली तथा बम्बई आदि में प्रदर्शनियां की है। 1946-47 में आपने भित्ति चित्रण का प्रशिक्षण शान्ति निकेतन में नन्दलाल वसु तथा बिनोद बिहारी मुखर्जी से प्राप्त किया था।
1953 से ही आप बनस्थली विद्यापीठ में म्यूरल-निर्माण (फ्रेस्को तथा टेम्परा ) की तकनीकी शिक्षा के लिये ग्रीष्मावकाश में प्रतिवर्ष ट्रेनिंग कैम्प का आयोजन करते रहे हैं। अखिल भारतीय कालिदास समारोह में भी आपने भाग लिया है।
आप बंगाल शैली की परम्परा के श्री शैलेन्द्रनाथ दे के शिष्य चित्रकार हैं। वनस्थली विद्यापीठ के भवनों में आपने प्राचीन विषयों पर जो भित्ति चित्र अंकित किये हैं ये कला की अमूल्य निधि है पक्षी अंकन आपका प्रिय विषय है और मयूर की आकृति को लेकर जितनी विधिवता से आपने चित्रण किया है उसकी सम्पूर्ण विश्व में तुलना नहीं है।
संसार भर के प्रमुख पक्षी चित्रकारों में आपकी गणना है और आपके द्वारा अंकित मयूरों के अनेक सुन्दर चित्र प्रकाशित भी हो चुके हैं सम्प्रति आप अवकाश – प्राप्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं। देश-विदेश में आपको अपनी कला के लिए सम्मानित किया गया है।
आप राजस्थान विश्वविद्यालय की विद्वत् परिपद के सदस्य तथा राजस्थान ललित कला अकादमी के उप-सभापति एवं फेलो भी मनोनीत किये गये हैं ।
रूपकृष्ण, चारू राय, सुनयना देवी, मुकुल चन्द्र दे, सुरेन्द्र नाथ कर, प्रशान्त कुमार राय, ब्रतीन्द्रनाथ ठाकुर तथा कृपाल सिंह शेखावत आदि ठाकुर शैली के अन्य प्रमुख कलाकार है ।






