श्री परमानन्द चोयल का जन्म 5 जनवरी 1924 को कोटा (राजस्थान) में हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के उपरान्त कला में अभिरूचि होने के कारण 1946 में आपने कला तथा शिल्प महाविद्यालय जयपुर में टीचर्स ट्रेंनिग में डिप्लोमा तथा 1948 में ललित कला में डिप्लोमा प्राप्त किया।
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इसके पश्चात् 1953 में सर जे० जे० स्कूल आफ आर्ट बम्बई से चित्रकला में शासकीय उपाधि (Govt. Diploma) प्राप्त की।
सन् 1962-63 में स्लेड स्कूल आफ फाइन आर्ट्स यूनीवर्सिटी कालेज लन्दन से पोस्ट डिप्लोमा उपाधि उपलब्ध की ।
आपने कोटा तथा उदयपुर में कला शिक्षण किया। उदयपुर विश्वविद्यालय में आप ललित कला विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे ।
श्री चोयल एक प्रगतिशील कलाकार हैं। आपने आरम्भ में राजस्थानी जनजीवन तथा विभिन्न स्थलों का चित्रांकन किया था। बाद में आपके चित्रों का प्रमुख विषय नारी की व्यथा हो गया।
आप आकृति-मूलक चित्रकार हैं जिनकी तूलिका में सशक्त अभिव्यंजना है। आपके चित्रों की कोटा, उदयपुर, जयपुर, अलवर, दिल्ली, बम्बई, मद्रास, बंगलौर तथा कलकत्ता के अतिरिक्त जापान, मास्को, ब्राजील तथा अल्जीरिया आदि में भी प्रदर्शनियाँ आयोजित की जा चुकी हैं।
आपने आल इण्डिया फाइन आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स सोसाइटी नई दिल्ली: एकेडेमी आफ फाइन आर्ट्स तथा बिरला एकेडेमी आफ आर्ट कलकत्ता; ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश, चण्डीगढ़ राजस्थान तथा नई दिल्ली, बम्बई आर्ट सोसाइटी आदि के कार्य-कलापों तथा 1986 के छठे भारतीय त्रिनाले एवं 1987 की साओ पाओलो ब्राजील की प्रदर्शनियों और बम्बई, वनस्थली, मध्य प्रदेश तथा सार्क के कलाकार-शिविरों में भाग लिया है।
आपको राजस्थानी ललित कला अकादमी के द्वारा 1960-61, 1963-65 तथा 1968 में अकादमी आफ फाइन आर्ट्स अमृतसर द्वारा 1978-79 में तथा आल इण्डिया फाइन आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स सोसाइटी नई दिल्ली द्वारा 1983 में पुरस्कृत किया गया है। आपके चित्र देश-विदेशों के अनेक संग्रहों में हैं।





