श्री डी०जे० जोशी का जन्म 7 जुलाई 1911 ई० को महेश्वर में एक ब्राह्मण ज्योतिषी परिवार में हुआ था जो पण्ड्या कहे जाते थे। श्री जोशी का बचपन से ही अन्य विषयों की अपेक्षा कला में अधिक मन लगता था अतः अध्ययन बहुत कम किया और इन्दौर कला विद्यालय में देवलालीकर के पास कला की शिक्षा लेने पहुँच गये।
वहाँ से 1933 में श्री जोशी ने बम्बई की जी० डी० की उपाधि प्राप्त की । नारायण श्रीधर बेन्द्रे तथा एम० एस० जोशी इनके समकालीन विद्यार्थियों में थे और जोशी की कलात्मक प्रतिमा के विकास में बेटे ने भी बहुत सहायता की चित्रकला के अतिरिक्त मूर्तिकला में भी रुचि होने के कारण इन्होंने धार के मूर्तिकार दादा फडके से 1937 में सम्पर्क किया और उनसे कुछ समय तक शिक्षा प्राप्त कर मूर्तिकला के अध्ययन के लिये बम्बई के सर जे० जे० स्कूल आफ आर्ट में सीधे चतुर्थ वर्ष में प्रवेश लिया ।
चतुर्थ वर्ष की परीक्षा में प्रथम घोषित होने पर भी इन्होंने अध्ययन छोड़ दिया और धार के लक्ष्मी कला भवन में प्रथम प्राचार्य के रूप में नियुक्त हुए। सन् 1952 से 1968 तक वे चित्रकला मन्दिर (आर्ट स्कूल) इन्दौर में प्राचार्य के पद पर रहे और वहीं से सेवा-निवृत्ति हुए। 1947 से उन्होंने नियमित प्रदर्शनियां की.
श्री जोशी ने अपना समस्त कार्य मालवा क्षेत्र (धार- इन्दौर) में रहते हुए ही किया और लगभग तीन हजार चित्रों तथा मूर्तियों की रचना की। आरम्भ से ही कला में प्रवीणता के कारण छात्र जीवन से ही आपको पुरस्कार मिलले लगे थे।
मद्रास, नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बम्बई, शिमला, कलकत्ता, त्रिवेन्द्रम, बड़ौदा आदि में आपको ललित कला की संस्थाओं, राजकीय संस्थाओं, गवर्नर तथा राजामहाराओं आदि के द्वारा अनेक पदकों एवं नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया गया तथा आपके सम्मान में विशेष उत्सव आयोजित किये गये शासकीय तथा व्यक्तिगत अनेक संग्रहालयों में आपकी कला कृतियों संग्रहीत हैं।
आप अपने निवास स्थान पर कला वीथिका में भी प्रदर्शनियाँ आयोजित करते रहते थे। आधुनिक भारतीय कला के प्रमुख केन्द्रों दिल्ली तथा बम्बई आदि से दूर रहकर ये प्रभाववादी कला कृतियों की रचना में ही जुट गये इससे वे प्रथम श्रेणी के प्रभाववादी दृश्य-चित्रकार बन गये रंग बिरंगी भीड से भरे घाटों, हरित रंग का शान्त गम्भीर जल, मालवा की भूरी भूमि के मध्य सर्पाकार घुमाव युक्त सरिताओं में तैरती नौकाओं, श्याम वर्ण ग्रामवासी, क्षेत्रीय लोगों के दैनिक क्रिया कलापों तथा क्षितिज की नीची पहाड़ियों का अंकन ही इनके चित्रों के प्रमुख विषय रहे हैं।
उनका अधिकांश कार्य प्रभाववादी तूलिकाघातों की भाँति हैं किन्तु कहीं-कहीं प्रभावोत्तरवादी रेखात्मक अथवा बिन्दुवादी रीति से भी उन्होंने रंग लगाये है।
जोशी जी के रंग फाय अथवा राजस्थानी शैली के चित्रकारों की भाँति मणियों के समान दमकते है। उनकी आकृतियाँ प्रतिरूपात्मक न होकर आभासात्मक हैं।
लाल पगड़ी, साप्ताहिक बाजार, भिखारी, जलमहल उदयपुर, धार की एक गली, टोकरियाँ, चूड़ियाँ खरीदती दुल्हन, चौपाटी, विजेता, नायें, गौरी त्यौहार, ओंकारेश्वर तथा कुएँ पर, आदि आपकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।
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प्रागैतिहासिक काल (लगभग 3000 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व) पृष्ठभूमि भारतीय मूर्तिकला और वास्तुकला … Read more - सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास,प्रमुख नगर,वास्तुकला,चित्र कला,मोहरें और प्रतिमाएं | History of Indus Valley Civilization, Major Cities, Architecture, Paintings, Seals and Statues
हड़प्पा व मोहनजोदड़ो की कला पाषाण युगीन सहस्त्रों वर्षों के पश्चात् की प्राचीनतम संस्कृतियाँ सिन्धु … Read more - कला क्या है | कला का अर्थ, कला के प्रकार
“जीवन के प्रत्येक अंगों को नियमित रूप से निर्मित करने को ही कला कहते हैं।” समय-समय पर कुछ विद्वानों ने अपने विचार कला की परिभाषा के प्रति व्यक्त किए हैं, कुछ जो निम्न है… - भारतीय चित्रकला के छः अंग | Six Limbs Of Painting
षडंग चित्रकार अपने निरंतर अभ्यास के द्वारा अपने भावों सम्वेदनाओं तथा अनुभवों के प्रकाशन हेतु … Read more - Cave painting | गुफ़ा चित्र
गुहा चित्रण (जोगीमारा, अजन्ता, बाघ, बादामी, एलोरा, सित्तनवासल इत्यादि) जोगीमारा गुफाएँ Join our WhatsApp channel … Read more - भारतीय लघु चित्रकला की विभिन्न शैलियां | Different Styles of Indian Miniature Paintings
भारतीय लघु चित्रकला जैन शैली Join our WhatsApp channel for the latest updates. पाल शैली … Read more - राजस्थानी चित्र शैली | राजस्थानी चित्र शैली के प्रमुख केंद्र | Rajasthani Schools of Painting | Major centers of Rajasthani painting style
राजस्थानी शैली परिचय राजस्थान का एक वृहद क्षेत्र है जो ‘अवोड ऑफ प्रिंसेज’ (Abode of … Read more - अजंता गुफाओं की संख्या, चित्रकला,निर्माण काल और अजन्ता चित्र शैली की विशेषताएँ | Number of Ajanta Caves, Painting, Construction Period and Characteristics of Ajanta Painting Style
अजन्ता की गुफाएँ महाराष्ट्र में औरंगाबाद में 68 किलोमीटर दूर पहाड़ियों में विराजमान हैं। जहाँ प्रकृति ने मुक्त हस्त से अपना सौन्दर्य विकीर्ण किया है। प्राय: कलाकार को शोरगुल से दूर शान्तमय वातावरण में चित्रण करना भाता है - पहाड़ी शैली और उसकी विशेषताएं
परिचय 17 शताब्दी के अन्तिम चतुर्थांश में पहाड़ी राजकुमार मुगलों के आश्रित थे जो कि … Read more - मिर्जापुर (उ०प्र०) एवं ‘मध्य-प्रदेश’ से प्राप्त शिलाचित्र | Inscriptions received from Mirzapur (U.P.) and ‘Madhya Pradesh’
उत्तर प्रदेश से प्राप्त शिलाचित्र मिर्जापुर इलाहाबाद-मुगलसराय रेल पच पर मिर्जापुर मुख्यालय से करीब 20 … Read more - अजंता की मुख्य गुफाओं के चित्र
अजंता की मुख्य गुफाओं के चित्र,अजन्ता में चैत्य और बिहार दोनों प्रकार की 30 गुफायें हैं। इनमें गुफा संख्या 1, 2, 6, 7, 9, 10, 11,15, 16, 17, 19, 20, 21 व 22 में चित्र बने थे। आज केवल गुफा संख्या 1, 2, 9, 10, 16 व 17 चित्रों से मुख्य रूप से सुसज्जित है तथा यहीं अधिकांश चित्र सुरक्षित है। - अपभ्रंश शैली के चित्र | अपभ्रंश-शैली की प्रमुख विशेषतायें | जैन शैली | गुजराती शैली या पश्चिम भारतीय शैली | ग्रामीण शैली
श्वेताम्बर जैन धर्म की अनेक सचित्र पोथियाँ 1100 ई० से 1500 ई० के मध्य विशेष … Read more - अकबर-कालीन चित्रित ग्रन्थ
अकबर काल में कला अकबर- 1557 ई० में अकबर अपने पिता हुमायूँ की मृत्यु के … Read more - जहाँगीर कालीन चित्र शैली | जहाँगीर कालीन चित्र
चित्रकला के जिस संस्थान का बीजारोपण अकबर ने किया था वास्तव में वह जहाँगीर (१६०५-१६२७ … Read more - गुप्त कालीन कला
गुप्तकाल (300 ई0-600 ई०) मौर्य सम्राट ने मगध को राज्य का केन्द्र बनाकर भारतीय इतिहास … Read more - मेवाड़ चित्रशैली की विषय-वस्तु तथा विशेषतायें
मेवाड़ शैली राजस्थान के अन्य क्षेत्रों के समान मेवाड़ भी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए … Read more - ‘काँगड़ा’ चित्र-शैली की विषयवस्तु तथा विशेषतायें
‘काँगड़ा’ चित्र-शैली का परिचय बाह्य रूप से समस्त पहाड़ी कला ‘काँगड़ा’ के नाम से अभिहित … Read more - गांधार शैली का विकास और इसकी विशेषताएँ
गांधार शैली कुषाण काल में गान्धार एक ऐसा प्रदेश था जहां एशिया और यूरोप की … Read more - मुगल शैली | मुग़ल काल में चित्रकला और वास्तुकला का विकास | Development of painting and architecture during the Mughal period
मुगल चित्रकला को भारत की ही नहीं वरन् एशिया की कला में स्वतन्त्र और महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह शैली ईरान की कला परम्परा से उत्पन्न होकर भी ईरानी शैली नहीं रही। इस पर यूरोपीय तथा चीनी प्रभाव भी पड़े हैं। इस शैली पर भारतीय रंग योजनाओं तथा वातावरण का प्रभाव पड़ा है। - मौर्य काल में मूर्तिकला और वास्तुकला का विकास ( 325 ई.पू. से 185 ई.पू.) | Development of sculpture and architecture in Maurya period
मौर्यकालीन कला को उच्च स्तर पर ले जाने का श्रेय चन्द्रगुप्त के पौत्र सम्राट अशोक को जाता है। अशोक के समय से भारत में मूर्तिकला का स्वतन्त्र कला के रूप में विकास होता दिखाई देता है। - पाल शैली | पाल चित्रकला शैली क्या है?
नेपाल की चित्रकला में पहले तो पश्चिम भारत की शैली का प्रभाव बना रहा और बाद में उसका स्थान इस नव-निर्मित पूर्वीय शैली ने ले लिया नवम् शताब्दी में जिस नयी शैली का आविर्भाव हुआ था उसके प्रायः सभी चित्रों का सम्बन्ध पाल वंशीय राजाओं से था। अतः इसको पाल शैली के नाम से अभिहित करना अधिक उपयुक्त समझा गया।” - दक्षिणात्य शैली | दक्षिणी शैली | दक्खिनी चित्र शैली | दक्कन चित्रकला | Deccan Painting Style
दक्खिनी चित्र शैली: परिचय भारतीय चित्रकला के इतिहास की सुदीर्घ परम्परा एक लम्बे समय से … Read more - संस्कृति तथा कला
किसी भी देश की संस्कृति उसकी आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा कलात्मक उपलब्धियों की प्रतीक होती है। … Read more - भारतीय कला संस्कृति एवं सभ्यता
कला संस्कृति का यह महत्त्वपूर्ण अंग है जो मानव मन को प्रांजल सुंदर तथा व्यवस्थित … Read more - भारतीय चित्रकला की विशेषताएँ
भारतीय चित्रकला तथा अन्य कलाएँ अन्य देशों की कलाओं से भिन्न हैं। भारतीय कलाओं की … Read more - कला अध्ययन के स्रोत
कला अध्ययन के स्रोत से अभिप्राय उन साधनों से है जो प्राचीन कला इतिहास के … Read more - Explicabo eum ex idRerum est eligendi inventore. Veritatis debitis porro repudiandae nobis. Autem ipsum nobis numquam dolores Possimus … Read more
- आनन्द केण्टिश कुमारस्वामी
पुनरुत्थान काल में भारतीय कला के प्रमुख प्रशंसक एवं लेखक डा० आनन्द कुमारस्वामी (1877-1947 ई०)- … Read more - भारतीय चित्रकला में नई दिशाएँ
लगभग 1905 से 1920 तक बंगाल शैली बड़े जोरों से पनपी देश भर में इसका … Read more - सोमालाल शाह | Somalal Shahआप भी गुजरात के एक प्रसिद्ध चित्रकार हैं आरम्भ में घर पर कला का अभ्यास … Read more
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लक्ष्मण पै का जन्म (1926 ) गोवा के एक सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। … Read more - आदिकाल की चित्रकला | Primitive Painting
(गुहाओं, कंदराओं, शिलाश्रयों की चित्रकला) (३०,००० ई० पू० से ५० ई० तक) चित्रकला का उद्गम … Read more - राजस्थानी चित्र शैली की विशेषतायें | Rajasthani Painting Style
राजस्थान एक वृहद क्षेत्र है जो “अवोड ऑफ प्रिंसेज” माना जाता है इसके पश्चिम में बीकानेर, दक्षिण … Read more - टीजीटी / पीजीटी कला से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न | Important questions related to TGT/PGT Arts
सांझी कला किस पर की जाती है ? उत्तर: (B) भूमि पर ‘चाँद को देखकर … Read more - रेखा क्या है | रेखा की परिभाषारखा वो बिन्दुओं या दो सीमाओं के बीच की दूरी है, जो बहुत सूक्ष्म होती है और गति की दिशा निर्देश करती है लेकिन कलापक्ष के अन्तर्गत रेखा का प्रतीकात्मक महत्व है और यह रूप की अभिव्यक्ति व प्रवाह को अंकित करती है।
- बसोहली की चित्रकलाबसोहली की स्थिति बसोहली राज्य के अन्तर्गत ७४ ग्राम थे जो आज जसरौटा जिले की … Read more
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- तंजौर शैलीतंजोर के चित्रकारों की शाखा के विषय में ऐसा अनुमान किया जाता है कि यहाँ … Read more
- मैसूर शैलीदक्षिण के एक दूसरे हिन्दू राज्य मैसूर में एक मित्र प्रकार की कला शैली का … Read more
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- कलकत्ता ग्रुप
1940 के लगभग से कलकत्ता में भी पश्चिम से प्रभावित नवीन प्रवृत्तियों का उद्भव हुआ … Read more - Gopal Ghosh Biography | गोपाल घोष (1913-1980)
आधुनिक भारतीय कलाकारों में रोमाण्टिक के रूप में प्रतिष्ठित कलाकार गोपाल घोष का जन्म 1913 … Read more - आधुनिक भारतीय चित्रकला की पृष्ठभूमि | Aadhunik Bharatiya Chitrakala Ki Prshthabhoomi
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- कम्पनी शैली | पटना शैली | Compony School Paintingsअठारहवी शती के मुगल शैली के चित्रकारों पर उपरोक्त ब्रिटिश चित्रकारों की कला का बहुत … Read more
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