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LT Grade Art Previous Year Questions | UP LT ग्रेड कला परीक्षा: पिछले वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

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LT Grade Art Previous Year Questions | UP LT ग्रेड कला परीक्षा: पिछले वर्षों के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर

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UP LT ग्रेड कला परीक्षा के पिछले वर्षों के प्रश्न एवं विस्तृत उत्तर — भारतीय कला इतिहास, चित्रकला शैलियाँ, मूर्तिकला, लोक कला, प्रमुख कलाकार और कला शिक्षण विधियाँ। UPSESSB परीक्षा की सम्पूर्ण तैयारी करें। LT Grade Art — Previous Year Questions-LT ग्रेड कला — पिछले वर्षों के प्रश्न प्रस्तावना उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन ...

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UP LT ग्रेड कला परीक्षा के पिछले वर्षों के प्रश्न एवं विस्तृत उत्तर — भारतीय कला इतिहास, चित्रकला शैलियाँ, मूर्तिकला, लोक कला, प्रमुख कलाकार और कला शिक्षण विधियाँ। UPSESSB परीक्षा की सम्पूर्ण तैयारी करें।

Table of Contents

LT Grade Art — Previous Year Questions-LT ग्रेड कला — पिछले वर्षों के प्रश्न

प्रस्तावना

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा आयोजित LT ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा उन सभी अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो सरकारी विद्यालयों में कला विषय के शिक्षक बनना चाहते हैं। यह परीक्षा न केवल अभ्यर्थी के विषय ज्ञान की जाँच करती है, बल्कि उनकी शिक्षण क्षमता, कला के प्रति समझ और सौंदर्यबोध को भी परखती है।

LT ग्रेड कला परीक्षा में सफलता पाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि अभ्यर्थी पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का गहन अध्ययन करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करने से परीक्षा के पैटर्न, महत्वपूर्ण टॉपिक और प्रश्नों की प्रकृति को समझने में बड़ी सहायता मिलती है। इससे अभ्यर्थी अपनी तैयारी को सही दिशा दे सकते हैं और अनावश्यक विषयों पर समय नष्ट करने से बच सकते हैं।

कला एक ऐसा विषय है जो मानव सभ्यता के उद्भव से ही उसके साथ चला आ रहा है। भारतीय कला की परंपरा अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। प्रागैतिहासिक काल की गुफा चित्रकारी से लेकर आधुनिक डिजिटल कला तक की यात्रा में भारतीय कला ने अनेक रूप धारण किए हैं। LT ग्रेड परीक्षा में इस विशाल कला विरासत से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इसकी संपूर्ण जानकारी होना आवश्यक है।

इस लेख में हम LT ग्रेड कला परीक्षा में पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों को विभिन्न खंडों में वर्गीकृत करके प्रस्तुत करेंगे। साथ ही प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत उत्तर भी दिया जाएगा ताकि अभ्यर्थी न केवल प्रश्न को समझें बल्कि उसके पीछे की अवधारणा को भी आत्मसात कर सकें।

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LT ग्रेड कला परीक्षा की संरचना

LT ग्रेड कला परीक्षा को समझने के लिए सबसे पहले इसके परीक्षा पैटर्न को जानना जरूरी है। परीक्षा में मुख्यतः दो भाग होते हैं — सामान्य ज्ञान एवं कला विषय का विशिष्ट ज्ञान।

परीक्षा का स्वरूप: परीक्षा में कुल 150 प्रश्न होते हैं जो सभी बहुविकल्पीय प्रकार के होते हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिए चार विकल्प दिए जाते हैं जिनमें से एक सही उत्तर चुनना होता है। परीक्षा की समय सीमा 2 घंटे होती है। कुल अंक 150 होते हैं और प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलता है। नकारात्मक अंकन का प्रावधान कुछ वर्षों में रहा है अतः इस पर ध्यान देना आवश्यक है।

विषय वितरण: कला परीक्षा में भारतीय कला का इतिहास, पाश्चात्य कला का इतिहास, चित्रकला की विभिन्न शैलियाँ, मूर्तिकला, स्थापत्य कला, लोक कला एवं हस्तशिल्प, कला के तत्व एवं सिद्धांत, रंग विज्ञान, कला शिक्षण विधियाँ तथा प्रमुख कलाकार एवं उनकी कृतियाँ जैसे विषयों से प्रश्न पूछे जाते हैं।

LT Grade Art — Previous Year Questions

भारतीय कला का इतिहास — प्रश्न एवं उत्तर

प्रागैतिहासिक कला

भारतीय कला का इतिहास एवं प्रागैतिहासिक कला
भारतीय कला का इतिहास एवं प्रागैतिहासिक कला

प्रश्न 1 — भीमबेटका की गुफा चित्रकारी किस राज्य में स्थित है? उत्तर: भीमबेटका की गुफा चित्रकारी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है। यह स्थान विंध्य पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसा हुआ है। यहाँ लगभग 500 से अधिक शैल आश्रयों में प्रागैतिहासिक चित्र पाए गए हैं जो लगभग 30,000 वर्ष पुराने माने जाते हैं। इन चित्रों में शिकार के दृश्य, नृत्य, युद्ध, पशु-पक्षी और मानव आकृतियाँ प्रमुख रूप से दिखाई देती हैं। वर्ष 2003 में UNESCO ने भीमबेटका को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।

प्रश्न 2 — प्रागैतिहासिक काल में चित्र बनाने के लिए किन रंगों का प्रयोग किया जाता था? उत्तर: प्रागैतिहासिक मानव ने चित्र बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया। गेरू (लाल-भूरा रंग), मैंगनीज (काला रंग), चूना पत्थर (सफेद रंग) और हरित मृत्तिका (हरा रंग) प्रमुख रूप से प्रयुक्त होते थे। इन रंगों को पशुओं की चर्बी, पौधों के रस और जल के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता था। इन चित्रों की विशेषता यह है कि हजारों वर्ष बीत जाने के बावजूद ये आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

प्रश्न 3 — अजंता की गुफाएँ किस धर्म से संबंधित हैं और ये किस काल में निर्मित हुईं? उत्तर: अजंता की गुफाएँ बौद्ध धर्म से संबंधित हैं। ये महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित हैं। अजंता में कुल 30 गुफाएँ हैं जिनका निर्माण दो चरणों में हुआ। पहला चरण ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से पहली शताब्दी तक और दूसरा चरण पाँचवीं से सातवीं शताब्दी ईस्वी तक माना जाता है। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाओं, जातक कथाओं और बोधिसत्वों के सुंदर भित्तिचित्र बने हुए हैं। अजंता की चित्रकला में टेम्परा तकनीक का प्रयोग किया गया है।

सिंधु घाटी सभ्यता की कला

सिंधु घाटी सभ्यता की कला
सिंधु घाटी सभ्यता की कला

प्रश्न 4 — सिंधु घाटी सभ्यता की कला की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं? उत्तर: सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 3000-1500 ईसा पूर्व) की कला अत्यंत परिष्कृत और विकसित थी। इस सभ्यता की कला की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं — मुहरें (Seals) बनाना इस सभ्यता की सबसे उल्लेखनीय कला थी, जिनमें पशुओं विशेषकर एक सींग वाले बैल (यूनिकॉर्न), हाथी, बाघ आदि के चित्र उकेरे गए थे। मिट्टी की मूर्तियाँ, ताँबे और काँसे की मूर्तियाँ भी बनाई जाती थीं। मोहनजोदड़ो से प्राप्त नृत्य करती हुई कांस्य बालिका की मूर्ति इस सभ्यता की कला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रश्न 5 — नृत्य करती हुई बालिका की कांस्य मूर्ति कहाँ से प्राप्त हुई और इसकी विशेषता क्या है? उत्तर: नृत्य करती हुई बालिका की कांस्य मूर्ति मोहनजोदड़ो (वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में) से प्राप्त हुई। यह मूर्ति लगभग 4500 वर्ष पुरानी है। इसकी ऊँचाई लगभग 10.5 सेंटीमीटर है। इस मूर्ति में एक युवती को नृत्य मुद्रा में दर्शाया गया है जिसके बाएँ हाथ में चूड़ियाँ हैं और दाहिना हाथ कूल्हे पर टिका है। यह मूर्ति ‘लॉस्ट वैक्स’ (मधुमक्खी के मोम) तकनीक से बनाई गई थी। वर्तमान में यह मूर्ति नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित है।

मौर्य एवं गुप्त काल की कला

मौर्य कालीन कला
मौर्य कालीन कला

प्रश्न 6 — सारनाथ का अशोक स्तंभ किसलिए प्रसिद्ध है? उत्तर: सारनाथ का अशोक स्तंभ मौर्य काल की कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इस स्तंभ का निर्माण सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था। इस स्तंभ के शीर्ष पर चार सिंहों की आकृति है जो पीठ से पीठ सटाए बैठे हैं। इनके नीचे एक गोलाकार आधार पर चार पशु — हाथी, घोड़ा, बैल और शेर — और चार धर्मचक्र उत्कीर्ण हैं। यह शीर्ष भाग जिसे ‘सिंह शीर्ष’ कहते हैं, भारत का राजकीय चिह्न है। इस स्तंभ की पॉलिश इतनी उत्कृष्ट है कि आज भी यह दर्पण की तरह चमकती है।

प्रश्न 7 — गुप्त काल को भारतीय कला का स्वर्णयुग क्यों कहा जाता है? उत्तर: गुप्त काल (चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी) को भारतीय कला का स्वर्णयुग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस काल में कला के सभी क्षेत्रों — चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य कला — में अभूतपूर्व उन्नति हुई। अजंता की गुफाओं के सर्वश्रेष्ठ चित्र इसी काल में बने। मथुरा और सारनाथ की बुद्ध प्रतिमाएँ इसी युग की देन हैं। देवगढ़ का दशावतार मंदिर गुप्त स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना है। इस काल में कालिदास जैसे महान कवि हुए और साहित्य, विज्ञान एवं कला सभी क्षेत्रों में भारत विश्व में सर्वोच्च स्थान पर था।

चित्रकला की शैलियाँ — प्रश्न एवं उत्तर

राजपूत एवं मुगल चित्रकला

प्रश्न 8 — मुगल चित्रकला की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर: मुगल चित्रकला भारतीय और फारसी कला शैलियों के मिश्रण से विकसित हुई। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं — प्राकृतिक दृश्यों का सूक्ष्म और जीवंत चित्रण, पोट्रेट (व्यक्ति चित्र) बनाने की उत्कृष्ट परंपरा, बारीक रेखाओं और चटख रंगों का प्रयोग, लघु चित्रों की परंपरा और दरबारी दृश्यों का अंकन प्रमुख विशेषताएँ थीं। अकबर के काल में अबुल फजल, दशवंत और बसावन जैसे कलाकारों ने मुगल चित्रकला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। जहाँगीर स्वयं एक कुशल चित्र-समीक्षक थे और उनके काल में उस्ताद मंसूर ने पशु-पक्षी चित्रण में अद्वितीय कार्य किया।

प्रश्न 9 — राजपूत चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ कौन-कौन सी हैं? उत्तर: राजपूत चित्रकला मुख्यतः दो भागों में विभाजित है — राजस्थानी शैली और पहाड़ी शैली। राजस्थानी शैली में मेवाड़, बूँदी, कोटा, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और किशनगढ़ शैलियाँ प्रमुख हैं। इन शैलियों में भागवत पुराण, रामायण, महाभारत और राधा-कृष्ण की लीलाओं का चित्रण किया गया। पहाड़ी शैली में बसोहली, काँगड़ा, गुलेर, चम्बा और मंडी शैलियाँ शामिल हैं। काँगड़ा शैली अपनी कोमलता और भाव-प्रवणता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

प्रश्न 10 — किशनगढ़ शैली की ‘बनी-ठनी’ चित्रकारी की क्या विशेषता है? उत्तर: बनी-ठनी किशनगढ़ शैली की सबसे प्रसिद्ध चित्र है जिसे ‘भारत की मोनालिसा’ भी कहा जाता है। इसे कलाकार निहालचंद ने राजा सावंत सिंह के काल में (18वीं शताब्दी) बनाया था। बनी-ठनी एक दरबारी गायिका की चित्रकारी है जिसमें उसे राधा के रूप में दर्शाया गया है। इस चित्र में आँखें बड़ी और बादाम के आकार की, नाक पतली और नुकीली, पतले होंठ और लंबी गर्दन की विशेषताएँ किशनगढ़ शैली की पहचान बन गई हैं।

लोक चित्रकला शैलियाँ

प्रश्न 11 — मधुबनी चित्रकला किस राज्य की कला है और इसकी प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर: मधुबनी चित्रकला बिहार राज्य के मिथिला क्षेत्र की परंपरागत लोक कला है। इसे ‘मिथिला पेंटिंग’ भी कहा जाता है। इस कला की प्रमुख विशेषताएँ हैं — चटख और विविध रंगों का प्रयोग, ज्यामितीय आकारों और प्रकृति के तत्वों जैसे फूल, पत्तियाँ, मछली, सूर्य, चंद्रमा का चित्रण, देवी-देवताओं और धार्मिक प्रसंगों का अंकन, रेखाओं की बहुलता और हाशिये का सुंदर अलंकरण। पारंपरिक रूप से यह कला घर की दीवारों और आँगन में बनाई जाती थी। कार्बो सीता देवी और गंगा देवी इस कला की प्रसिद्ध कलाकार रही हैं।

प्रश्न 12 — वारली चित्रकला की विशेषता क्या है और यह किस राज्य में प्रचलित है? उत्तर: वारली चित्रकला महाराष्ट्र के आदिवासी वारली समुदाय की पारंपरिक लोक कला है। इस कला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल सफेद रंग का प्रयोग किया जाता है जो लाल-भूरे रंग की पृष्ठभूमि पर बनाई जाती है। सफेद रंग चावल के पेस्ट से बनाया जाता है। इस कला में मुख्यतः त्रिभुज, वृत्त और रेखाओं का प्रयोग होता है। मानव आकृतियाँ त्रिभुजाकार होती हैं। दैनिक जीवन, कृषि, उत्सव, नृत्य और प्रकृति के दृश्य इस कला के प्रमुख विषय हैं। जीवन्या मास्के वारली कला के सबसे प्रसिद्ध कलाकार हैं।

प्रश्न 13 — गोंड चित्रकला क्या है और इसकी क्या विशेषताएँ हैं? उत्तर: गोंड चित्रकला मध्य प्रदेश के गोंड आदिवासी समुदाय की पारंपरिक कला है। इस कला की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें जानवरों, पक्षियों और पेड़-पौधों को बिंदुओं और रेखाओं से भरकर बनाया जाता है। इस कला में प्रकृति और आदिवासी जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया जाता है। जंगलों और वन्य प्राणियों का इसमें विशेष स्थान है। जनगढ़ सिंह श्याम गोंड कला के सबसे प्रसिद्ध और आधुनिक कलाकार रहे हैं जिन्होंने इस परंपरागत कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

मूर्तिकला एवं स्थापत्य कला — प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 14 — गांधार शैली और मथुरा शैली में क्या अंतर है? उत्तर: गांधार शैली और मथुरा शैली दोनों बौद्ध मूर्तिकला की प्रमुख धाराएँ हैं, किंतु इनमें कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। गांधार शैली का विकास वर्तमान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के क्षेत्र में हुआ। इस पर यूनानी और रोमन कला का गहरा प्रभाव है। इसमें मूर्तियाँ पत्थर और शिस्ट से बनाई गई हैं। इस शैली की बुद्ध प्रतिमाओं में यूनानी देवता अपोलो से मिलती-जुलती विशेषताएँ हैं — लहराते बाल, वस्त्रों में सिलवटें और यथार्थवादी शरीर गठन। मथुरा शैली का विकास उत्तर प्रदेश के मथुरा क्षेत्र में हुआ। यह पूर्णतः भारतीय शैली है। इसमें लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया। मूर्तियाँ पारदर्शी वस्त्रों में दर्शाई गई हैं और भाव-भंगिमाएँ अधिक भारतीय हैं।

प्रश्न 15 — खजुराहो के मंदिर किस शैली में बने हैं और इनकी क्या विशेषता है? उत्तर: खजुराहो के मंदिर नागर शैली की स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ये मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित हैं। इनका निर्माण चंदेल राजाओं ने 10वीं से 11वीं शताब्दी के बीच करवाया। खजुराहो में मूलतः 85 मंदिर थे, जिनमें से आज लगभग 22 मंदिर ही शेष हैं। इन मंदिरों की बाहरी दीवारों पर कामुक और मिथुन मूर्तियाँ बनी हैं जो आध्यात्मिक अर्थ रखती हैं। कंदरिया महादेव मंदिर खजुराहो का सबसे विशाल और भव्य मंदिर है। वर्ष 1986 में UNESCO ने खजुराहो को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।

प्रश्न 16 — दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य की द्रविड़ शैली की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर: द्रविड़ शैली दक्षिण भारत की मंदिर स्थापत्य की प्रमुख शैली है। इसकी विशेषताएँ उत्तर भारत की नागर शैली से भिन्न हैं। द्रविड़ शैली में शिखर (जिसे विमान कहा जाता है) पिरामिड के आकार का और सीढ़ीनुमा होता है। मंदिर के प्रवेश द्वार को ‘गोपुरम’ कहा जाता है जो बहुत ऊँचे और विशाल होते हैं तथा उन पर रंग-बिरंगी मूर्तियाँ उकेरी जाती हैं। मंदिर परिसर बड़ा और सुव्यवस्थित होता है जिसे ‘प्राकार’ कहते हैं। बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर), मदुरई का मीनाक्षी मंदिर और तिरुपति बालाजी मंदिर द्रविड़ शैली के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हैं।

कला के तत्व एवं सिद्धांत — प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 17 — कला के मूलभूत तत्व कौन-कौन से हैं? उत्तर: कला के मूलभूत तत्व वे आधारभूत घटक हैं जिनसे कोई भी कलाकृति निर्मित होती है। ये तत्व निम्नलिखित हैं — रेखा (Line) सबसे मूलभूत तत्व है जो आकृति और रूप की परिभाषा देती है। रूप (Shape) एक द्विआयामी क्षेत्र होता है जिसकी सीमाएँ निर्धारित होती हैं। आकार (Form) त्रिआयामी होता है जैसे गोला, घन आदि। रंग (Color) कला का सर्वाधिक भावनात्मक तत्व है। बनावट (Texture) किसी सतह की स्पर्शीय या दृश्यात्मक गुणवत्ता है। मूल्य (Value) प्रकाश और छाया का वह संबंध है जो किसी चित्र में गहराई और आयाम उत्पन्न करता है। स्थान (Space) वह क्षेत्र है जो किसी कलाकृति में आकृतियों के बीच, आगे और पीछे होता है।

प्रश्न 18 — रंग चक्र (Color Wheel) क्या है और इसमें रंगों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है? उत्तर: रंग चक्र रंगों का एक वृत्ताकार आरेख है जो रंगों के आपसी संबंध को दर्शाता है। इसे सर्वप्रथम सर आइज़क न्यूटन ने 1666 में विकसित किया था। रंगों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है। प्राथमिक रंग — लाल, पीला और नीला — वे रंग हैं जो किन्हीं अन्य रंगों को मिलाने से नहीं बनते। द्वितीयक रंग — नारंगी (लाल + पीला), हरा (पीला + नीला) और बैंगनी (लाल + नीला) — दो प्राथमिक रंगों को मिलाने से बनते हैं। तृतीयक रंग एक प्राथमिक और एक द्वितीयक रंग को मिलाने से बनते हैं जैसे लाल-नारंगी, पीला-हरा आदि। रंगों में ऊष्ण रंग (लाल, नारंगी, पीला) और शीतल रंग (नीला, हरा, बैंगनी) भी होते हैं।

प्रश्न 19 — कला के डिज़ाइन सिद्धांत कौन-कौन से हैं? उत्तर: कला के डिज़ाइन सिद्धांत वे नियम हैं जिनके आधार पर कला के तत्वों को कलाकृति में व्यवस्थित किया जाता है। संतुलन (Balance) — दृश्य भार का समान वितरण जो सममित और असममित दोनों प्रकार का हो सकता है। लय (Rhythm) — तत्वों की नियमित पुनरावृत्ति जो गति और प्रवाह उत्पन्न करती है। अनुपात (Proportion) — अवयवों के आकार का आपसी संबंध। एकता (Unity) — समस्त तत्वों का समन्वय जो कलाकृति को सम्पूर्ण बनाता है। वैविध्य (Variety) — एकरसता से बचाने के लिए भिन्नता का प्रयोग। जोर (Emphasis) — किसी विशेष भाग को प्रमुखता देना।

पाश्चात्य कला एवं कलाकार — प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 20 — पुनर्जागरण कला क्या है और इसके प्रमुख कलाकार कौन थे? उत्तर: पुनर्जागरण (Renaissance) 14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच यूरोप में हुआ एक सांस्कृतिक और बौद्धिक आंदोलन था जिसने कला, साहित्य और विज्ञान में नई क्रांति लाई। इस काल में कला में मानवतावाद, यथार्थवाद और प्रकृति के प्रति नया दृष्टिकोण उभरा। इटली पुनर्जागरण कला का केंद्र था। इस काल के प्रमुख कलाकार थे — लियोनार्दो दा विंची (मोनालिसा और द लास्ट सपर के चित्रकार), माइकेलेंजेलो (सिस्टीन चैपल की छत पर भित्तिचित्र और डेविड की मूर्ति), राफेल (मैडोना चित्रों के लिए प्रसिद्ध) और सैंड्रो बोटिचेली (द बर्थ ऑफ वीनस के रचयिता)।

प्रश्न 21 — प्रभाववाद (Impressionism) क्या है और इसके प्रमुख कलाकार कौन थे? उत्तर: प्रभाववाद 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में फ्रांस में उभरा एक कला आंदोलन था। इसमें कलाकारों ने प्रकाश के क्षणिक प्रभाव को कैनवास पर उतारने का प्रयास किया। प्रभाववादी कलाकार खुले वातावरण (Open Air) में चित्र बनाते थे। वे छोटे और तीव्र ब्रश स्ट्रोक का प्रयोग करते थे। क्लॉड मोनेट इस आंदोलन के सबसे प्रमुख कलाकार थे। उनके ‘Impression: Sunrise’ चित्र से ही इस आंदोलन का नाम पड़ा। अन्य प्रमुख प्रभाववादी कलाकारों में पियरे-ऑगस्त रेनॉयर, एडगर डेगा और केमिल पिसारो शामिल थे।

प्रश्न 22 — विन्सेंट वान गॉग की कला की विशेषताएँ क्या थीं? उत्तर: विन्सेंट वान गॉग (1853-1890) नीदरलैंड के महान उत्तर-प्रभाववादी चित्रकार थे। उनकी कला की प्रमुख विशेषताएँ थीं — मोटे और भावपूर्ण ब्रश स्ट्रोक का प्रयोग, चटख और जीवंत रंगों का उपयोग, भावनात्मक तीव्रता और आंतरिक पीड़ा की अभिव्यक्ति। ‘द स्टैरी नाइट’, ‘सनफ्लावर्स’ और ‘सेल्फ पोट्रेट’ उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में 900 से अधिक चित्र बनाए। दुर्भाग्यवश उनके जीवनकाल में केवल एक चित्र बिका, किंतु आज उनकी कृतियाँ करोड़ों में बिकती हैं।

भारतीय लोक कला एवं हस्तशिल्प — प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 23 — पट्टचित्र कला क्या है और यह किस राज्य में प्रचलित है? उत्तर: पट्टचित्र ओडिशा और पश्चिम बंगाल की एक प्राचीन पारंपरिक चित्रकला शैली है। ‘पट्ट’ का अर्थ है कपड़ा या कैनवास और ‘चित्र’ का अर्थ है चित्रकारी। इस कला में विशेष रूप से तैयार किए गए कपड़े या ताड़ के पत्तों पर चित्र बनाए जाते हैं। इसमें मुख्यतः भगवान जगन्नाथ, विष्णु के अवतारों और पुराणों की कथाओं को चित्रित किया जाता है। रंग प्राकृतिक स्रोतों जैसे पत्थरों, शंखों, फूलों और पत्तियों से बनाए जाते हैं। यह कला ओडिशा के पुरी जिले के रघुराजपुर गाँव की प्रमुख आजीविका है।

प्रश्न 24 — तंजावुर चित्रकला की विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर: तंजावुर चित्रकला तमिलनाडु के तंजावुर क्षेत्र की पारंपरिक चित्रकला शैली है। इसकी प्रमुख विशेषता है सोने की पत्तियों (Gold Foil) का प्रयोग जो चित्रों को एक विशेष चमक और भव्यता प्रदान करता है। इसमें रंगीन काँच, कीमती और अर्धकीमती पत्थरों का भी प्रयोग होता है। विषय-वस्तु में भगवान कृष्ण, राम, शिव और अन्य देवी-देवताओं का चित्रण होता है। चित्रों में आकृतियाँ गोल और भरी हुई होती हैं।

प्रश्न 25 — कलमकारी कला क्या है? उत्तर: कलमकारी आंध्र प्रदेश की एक प्रसिद्ध हस्तकला है जिसमें कपड़े पर हाथ से चित्र बनाए जाते हैं। ‘कलम’ का अर्थ है कलम और ‘कारी’ का अर्थ है कारीगरी अर्थात कलम से की गई कारीगरी। श्रीकालहस्ती और मछलीपट्टनम कलमकारी के दो प्रमुख केंद्र हैं। श्रीकालहस्ती शैली में हाथ से चित्र बनाए जाते हैं जबकि मछलीपट्टनम शैली में ब्लॉक प्रिंटिंग का प्रयोग होता है। इसमें मुख्यतः प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है।

कला शिक्षण विधियाँ — प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 26 — विद्यालय में कला शिक्षण का क्या उद्देश्य है? उत्तर: विद्यालय में कला शिक्षण के अनेक महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं। सृजनात्मकता का विकास — कला शिक्षण से बच्चों में नई सोच और मौलिक अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है। सौंदर्यबोध का विकास — कला शिक्षा छात्रों में सुंदर और असुंदर की पहचान करने की शक्ति जागृत करती है। भावनात्मक विकास — कला एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं। सांस्कृतिक जागरूकता — कला शिक्षण से छात्र अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होते हैं। मानसिक एकाग्रता — कला के अभ्यास से मानसिक एकाग्रता और धैर्य का विकास होता है। व्यावसायिक कुशलता — कला शिक्षा छात्रों को चित्रकार, शिल्पकार, डिज़ाइनर आदि व्यवसायों के लिए तैयार करती है।

प्रश्न 27 — कला शिक्षण की प्रमुख विधियाँ कौन-कौन सी हैं? उत्तर: कला शिक्षण की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं। प्रदर्शन विधि (Demonstration Method) में शिक्षक स्वयं कला का प्रदर्शन करके छात्रों को सिखाता है। यह विधि व्यावहारिक कौशल सिखाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रोजेक्ट विधि में छात्र किसी विशेष विषय पर पूरी परियोजना तैयार करते हैं। अन्वेषण विधि में छात्रों को स्वयं खोज करने और नई तकनीकें आजमाने के अवसर दिए जाते हैं। सह-शिक्षण विधि में छात्र एक-दूसरे से सीखते हैं। कहानी विधि में कला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। भ्रमण विधि में छात्रों को संग्रहालय, कला दीर्घाओं और ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा कराई जाती है।

प्रश्न 28 — बाल मनोविज्ञान और कला का क्या संबंध है? उत्तर: बाल मनोविज्ञान और कला का अत्यंत गहरा संबंध है। बच्चों का कला में रुचि लेना उनके मानसिक और भावनात्मक विकास का महत्वपूर्ण सूचक है। विक्टर लोवेनफेल्ड के अनुसार बच्चों के कला विकास की छह अवस्थाएँ होती हैं — आरंभिक अवस्था (2-4 वर्ष) जिसमें बच्चे बेतरतीब रेखाएँ खींचते हैं, पूर्व-योजना अवस्था (4-7 वर्ष) जिसमें बच्चे सरल आकृतियाँ बनाते हैं, योजना अवस्था (7-9 वर्ष) जिसमें मानव आकृतियाँ और वातावरण बनने लगता है, समूह अवस्था (9-12 वर्ष) जिसमें अधिक विस्तृत और यथार्थवादी चित्र बनते हैं, यथार्थवाद की अवस्था और किशोरावस्था। कला शिक्षक को इन अवस्थाओं की जानकारी होना आवश्यक है ताकि वह उसी के अनुरूप शिक्षण दे सके।

महत्वपूर्ण भारतीय कलाकार एवं उनकी कृतियाँ — प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 29 — राजा रवि वर्मा को भारतीय कला में क्यों याद किया जाता है? उत्तर: राजा रवि वर्मा (1848-1906) केरल के त्रावणकोर राज्य के महान चित्रकार थे जिन्हें आधुनिक भारतीय चित्रकला का जनक कहा जाता है। उन्होंने भारतीय पौराणिक विषयों को यूरोपीय तेल चित्रकला (Oil Painting) की तकनीक से चित्रित किया। उनके चित्रों में भारतीय देवी-देवताओं को वास्तविक मानवीय रूप दिया गया जो अत्यंत आकर्षक और जीवंत था। ‘शकुंतला’, ‘दमयन्ती’, ‘गंगावतरण’, ‘लक्ष्मी’ उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्होंने मुंबई में अपनी प्रेस स्थापित की और अपने चित्रों की प्रिंट तैयार करवाईं, जिससे आम जनता तक कला पहुँची।

प्रश्न 30 — अमृता शेर-गिल को भारतीय चित्रकला में क्या योगदान है? उत्तर: अमृता शेर-गिल (1913-1941) भारत की सर्वाधिक प्रतिभाशाली महिला चित्रकार थीं। उन्हें ‘भारत की फ्रिदा काहलो’ भी कहा जाता है। उन्होंने पेरिस में कला की शिक्षा प्राप्त की और पश्चिमी आधुनिकतावाद को भारतीय विषयों से जोड़ा। उनके चित्रों में ग्रामीण भारत की महिलाओं और सामाजिक विषमता को दर्शाया गया। ‘थ्री गर्ल्स’, ‘ब्राइड्स टॉयलेट’, ‘हंगेरियन जिप्सी गर्ल’ उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनका केवल 28 वर्ष की आयु में निधन हो गया। भारत सरकार ने उनकी कृतियों को राष्ट्रीय कला निधि घोषित किया है।

प्रश्न 31 — नंदलाल बोस का भारतीय कला में क्या योगदान है? उत्तर: नंदलाल बोस (1882-1966) बंगाल स्कूल के महान चित्रकार थे। वे रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन में कला विभाग के प्रमुख रहे। उनकी कला में भारतीय लोककला और अजंता की चित्रकला का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। उन्होंने भारतीय संविधान की मूल पांडुलिपि को सुंदर चित्रों से सजाया जो भारतीय कला के इतिहास की अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। 1955 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘सती’, ‘उमा’, ‘भिक्षुणी’ और प्रकृति चित्र शामिल हैं।

प्रश्न 32 — एम. एफ. हुसैन की कला की क्या विशेषताएँ थीं? उत्तर: मकबूल फिदा हुसैन (1915-2011) भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध और विवादास्पद आधुनिक चित्रकार थे। उन्हें ‘भारत का पिकासो’ कहा जाता था। उनकी कला की प्रमुख विशेषताएँ थीं — बोल्ड और स्वतंत्र ब्रश स्ट्रोक, घोड़ों के चित्र जो उनकी पहचान बन गए, भारतीय पौराणिक और सामाजिक विषयों का आधुनिक शैली में चित्रण, रंगों का प्रतीकात्मक प्रयोग। ‘मदर टेरेसा सीरीज’, ‘महाभारत सीरीज’ और ‘भारत माता’ उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सभी से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 33 — बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना किसने की और इसका क्या महत्व है? उत्तर: बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना अबनींद्रनाथ टैगोर ने 20वीं शताब्दी के आरंभ में की। यह स्कूल स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित था और इसने पाश्चात्य कला के प्रभाव के विरुद्ध भारतीय कला की पुनर्स्थापना का कार्य किया। इस स्कूल के कलाकारों ने अजंता, राजपूत और मुगल चित्रकला की परंपराओं से प्रेरणा ली। जलरंग (Watercolor) और वाश तकनीक का व्यापक प्रयोग किया। अबनींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कृति ‘भारत माता’ इसी स्कूल की देन है। ई. बी. हैवेल ने इस आंदोलन को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

UNESCO मान्यता प्राप्त भारतीय कलाएँ एवं प्रश्न

प्रश्न 34 — भारत की कौन-कौन सी कलाएँ और शिल्प UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल हैं? उत्तर: UNESCO ने भारत की अनेक कलाओं और परंपराओं को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया है। कुटियाट्टम (संस्कृत रंगमंच) को 2008 में, रामलीला को 2008 में, वैदिक जप की परंपरा को 2008 में, राजस्थान के लोक संगीत ‘लंगा-मंगनियार’ की परंपरा को, कालबेलिया लोकगीत और नृत्य को 2010 में, छऊ नृत्य को 2010 में, मुडियेट्टु (केरल का अनुष्ठान नृत्य नाटक) को 2010 में, राजस्थान के संकाला गाँव की थाली बनाने की परंपरा ‘कुंभारी’ को, योग को 2016 में, नवरोज त्योहार को 2016 में, कुंभ मेले को 2017 में और कोलकाता की दुर्गा पूजा को 2021 में UNESCO की इस सूची में शामिल किया गया।

प्रश्न 35 — जामदानी बुनाई क्या है और यह कहाँ की परंपरागत शिल्पकला है? उत्तर: जामदानी बुनाई बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल क्षेत्र की पारंपरिक मलमल बुनाई की कला है। यह कला अत्यंत बारीक और नाजुक धागों से हाथ करघे पर की जाती है। जामदानी साड़ियाँ अपनी पारदर्शिता, हल्कापन और सुंदर बुनाई के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इसमें ज्यामितीय, पुष्प और अन्य अलंकृत डिज़ाइन बुने जाते हैं। UNESCO ने 2013 में जामदानी बुनाई को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया।

परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 36 — एलोरा की गुफाओं की क्या विशेषता है? उत्तर: एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित हैं। यहाँ 34 गुफाएँ हैं जिनमें हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म की गुफाएँ एक साथ स्थित हैं। गुफाएँ 1 से 12 तक बौद्ध धर्म की, 13 से 29 तक हिंदू धर्म की और 30 से 34 तक जैन धर्म की हैं। एलोरा की कैलाश मंदिर गुफा (गुफा संख्या 16) विश्व की सबसे बड़ी एकाश्म (Monolithic) शिलाकृति है जो एक ही चट्टान को काटकर बनाई गई है। इसका निर्माण राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग ने 8वीं शताब्दी में शुरू करवाया था। 1983 में UNESCO ने एलोरा को विश्व धरोहर घोषित किया।

प्रश्न 37 — कोणार्क का सूर्य मंदिर किस शैली में बना है और इसकी विशेषता क्या है? उत्तर: कोणार्क का सूर्य मंदिर ओडिशा में स्थित है और यह कलिंग स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने करवाया था। यह मंदिर एक विशाल रथ के आकार में बनाया गया है जिसमें 12 जोड़े पहिये (24 पहिये) और 7 घोड़े हैं। ये 12 पहिये वर्ष के 12 महीनों के प्रतीक हैं। प्रत्येक पहिये में 8 तीलियाँ (Spokes) हैं जो दिन के 8 पहरों की प्रतीक हैं। मंदिर में अत्यंत सुंदर और विस्तृत शिल्पकारी की गई है। 1984 में UNESCO ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया।

प्रश्न 38 — भारत में प्रमुख कला संग्रहालय कहाँ-कहाँ हैं? उत्तर: भारत में अनेक महत्वपूर्ण कला संग्रहालय हैं। राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली — यह भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय है जहाँ सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक काल तक की कलाकृतियाँ संग्रहीत हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (पूर्व में प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूज़ियम), मुंबई — यहाँ भारतीय और विदेशी कलाओं का विशाल संग्रह है। भारतीय संग्रहालय, कोलकाता — यह एशिया का सबसे पुराना संग्रहालय है जो 1814 में स्थापित हुआ। सालारजंग संग्रहालय, हैदराबाद — यह एक व्यक्ति के संग्रह पर आधारित विश्व के सबसे बड़े संग्रहालयों में एक है। राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा (NGMA) दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर में स्थित है।

प्रश्न 39 — भारत में कला से संबंधित प्रमुख पुरस्कार कौन-कौन से हैं? उत्तर: भारत में कला के क्षेत्र में अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार दिए जाते हैं। ललित कला अकादमी पुरस्कार — यह भारत के दृश्य कला के क्षेत्र का सर्वोच्च सरकारी पुरस्कार है जो ललित कला अकादमी द्वारा प्रदान किया जाता है। पद्म पुरस्कार (पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण) — भारत सरकार के ये सर्वोच्च नागरिक सम्मान कला क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को भी प्रदान किए जाते हैं। राष्ट्रीय कला पुरस्कार — संस्कृति मंत्रालय द्वारा दिया जाता है। कालिदास सम्मान — मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दृश्य कला के क्षेत्र में दिया जाने वाला सम्मान।

प्रश्न 40 — ओरिगामी और किरीगामी में क्या अंतर है? उत्तर: ओरिगामी और किरीगामी दोनों जापानी कागज कला की परंपराएँ हैं। ओरिगामी में कागज को केवल मोड़कर विभिन्न आकृतियाँ बनाई जाती हैं, कागज को काटा नहीं जाता। ‘ओरि’ का अर्थ है मोड़ना और ‘कामी’ का अर्थ है कागज। इसमें पक्षी, जानवर, फूल और ज्यामितीय आकृतियाँ बनाई जाती हैं। किरीगामी में कागज को मोड़ने के साथ-साथ काटा भी जाता है। ‘किरु’ का अर्थ है काटना। यह अधिक जटिल और विस्तृत डिज़ाइन बनाने में सहायक है। भारत के विद्यालयों में भी ये दोनों कलाएँ बच्चों को सिखाई जाती हैं।

उपसंहार — परीक्षा की तैयारी के टिप्स

LT ग्रेड कला परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए एक सुनियोजित और व्यवस्थित तैयारी की आवश्यकता है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि परीक्षा में किन-किन विषयों पर अधिक जोर दिया जाता है।

तैयारी के प्रमुख सुझाव:

पहली बात — भारतीय कला के इतिहास का कालक्रमिक अध्ययन करें। प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक काल तक की कला का एक स्पष्ट चित्र आपके मन में होना चाहिए। प्रत्येक कालखंड की प्रमुख विशेषताएँ, प्रमुख कलाकार और प्रमुख कृतियाँ अवश्य याद करें।

दूसरी बात — लोक कलाओं और हस्तशिल्पों पर विशेष ध्यान दें क्योंकि इस विषय से प्रतिवर्ष अनेक प्रश्न पूछे जाते हैं। विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं को उनके राज्य, विशेषताएँ और प्रमुख कलाकारों के साथ याद करें।

तीसरी बात — कला के तत्वों और सिद्धांतों को अच्छी तरह समझें। रंग विज्ञान, रंग चक्र और रंगों की विशेषताएँ परीक्षा में अक्सर पूछी जाती हैं।

चौथी बात — प्रमुख भारतीय और पाश्चात्य कलाकारों एवं उनकी कृतियों की सूची बनाएँ और उन्हें नियमित रूप से दोहराते रहें।

पाँचवीं बात — UNESCO मान्यता प्राप्त भारतीय कलाओं और विश्व धरोहर स्थलों की जानकारी अवश्य रखें। इस विषय से भी प्रश्न पूछे जाते हैं।

छठी बात — कला शिक्षण विधियों और बाल मनोविज्ञान का अध्ययन करें क्योंकि यह परीक्षा शिक्षक भर्ती के लिए है अतः शिक्षण से संबंधित प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं।

सातवीं बात — मॉक टेस्ट का नियमित अभ्यास करें। इससे समय प्रबंधन और प्रश्नों को हल करने की गति बढ़ती है।

आठवीं बात — पिछले 5-10 वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें। इससे परीक्षा के पैटर्न और बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों का पता चलता है।

सारांश:

इस लेख में हमने LT ग्रेड कला परीक्षा के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को पिछले वर्षों के प्रश्नों के आधार पर प्रस्तुत किया। भारतीय कला का इतिहास, चित्रकला की शैलियाँ, मूर्तिकला, स्थापत्य कला, लोक कलाएँ, पाश्चात्य कला, कला के तत्व और सिद्धांत तथा प्रमुख कलाकारों और उनकी कृतियों का समग्र अध्ययन इस परीक्षा में सफलता की कुंजी है।

कला केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है, यह एक जीवन दर्शन है। जो अभ्यर्थी सच्चे मन से कला से प्रेम करते हैं और उसे समझते हैं, वे न केवल परीक्षा में सफल होते हैं बल्कि एक अच्छे कला शिक्षक भी बनते हैं जो आने वाली पीढ़ी में कला की अलख जगाए रखते हैं। भारत की समृद्ध कला परंपरा को आगे बढ़ाने में कला शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।


— यह लेख LT ग्रेड कला परीक्षा की तैयारी कर रहे समस्त अभ्यर्थियों को समर्पित है।

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