नागर, द्रविड़ और वेसर शैली के नोट्स, MCQs, तुलना, ट्रिक्स और इन्फोग्राफिक्स — TGT, PGT, UGC NET/JRF 2026 के लिए complete exam guide। PDF DOWNLOAD
भारतीय मंदिर स्थापत्य कला: विशेष अध्ययन नोट्स
नागर vs द्रविड़ vs वेसर — सम्पूर्ण तुलनात्मक अध्ययन (Architecture Notes for UPSC / State PSC / Art & Culture)
Table of Contents
प्रस्तावना
भारत की मंदिर स्थापत्य कला विश्व की सबसे समृद्ध और विविध स्थापत्य परंपराओं में से एक है। हजारों वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा में भारतीय शिल्पियों ने पत्थरों को इस प्रकार गढ़ा कि वे मात्र भवन न रहकर ईश्वर का साक्षात् आवास बन गए। इस विशाल स्थापत्य परंपरा को मुख्यतः तीन शैलियों में विभाजित किया जाता है — नागर, द्रविड़ और वेसर।
ये तीनों शैलियाँ न केवल भौगोलिक दृष्टि से भिन्न हैं, बल्कि इनकी संरचना, शिखर की बनावट, सजावट और धार्मिक दर्शन भी एक-दूसरे से अलग हैं। UPSC, राज्य लोक सेवा आयोग, NDA, CDS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भारतीय कला एवं संस्कृति से प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, जिनमें मंदिर स्थापत्य का विशेष महत्व है।
इस विस्तृत लेख में हम इन तीनों मंदिर स्थापत्य शैलियों का गहराई से अध्ययन करेंगे — उनके इतिहास, विशेषताओं, उप-शैलियों, प्रमुख उदाहरणों और परस्पर अंतर को सरल एवं बोधगम्य भाषा में समझेंगे।
भारतीय मंदिर स्थापत्य की पृष्ठभूमि
मंदिर निर्माण का इतिहास
भारत में मंदिर निर्माण का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वैदिक काल में यज्ञशालाएँ धर्म का केंद्र होती थीं, किंतु गुप्त काल (320–550 ई.) से पाषाण मंदिरों का निर्माण प्रारंभ हुआ। इस युग को भारतीय मंदिर स्थापत्य का स्वर्ण युग माना जाता है। देवगढ़ का दशावतार मंदिर, तिगवा का विष्णु मंदिर इसी काल की देन हैं।
7वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य विभिन्न क्षेत्रीय राजवंशों — चालुक्य, राष्ट्रकूट, पल्लव, चोल, चंदेल, परमार आदि — ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय शैलियों को विकसित किया। इसी सांस्कृतिक विविधता ने नागर, द्रविड़ और वेसर जैसी विशिष्ट स्थापत्य परंपराओं को जन्म दिया।
मंदिर के प्रमुख अंग
किसी भी शैली का मंदिर समझने से पहले उसके प्रमुख अंगों को जानना आवश्यक है:
- गर्भगृह (Garbhagriha): मंदिर का सबसे पवित्र कक्ष जहाँ मुख्य देवता की प्रतिमा स्थापित होती है।
- शिखर (Shikhara): गर्भगृह के ऊपर की ऊर्ध्वाकार संरचना — यह प्रत्येक शैली में भिन्न होती है।
- मंडप (Mandapa): सभा-कक्ष या हॉल, जहाँ भक्तगण एकत्र होते हैं। यह अंतराल द्वारा गर्भगृह से जुड़ा होता है।
- अंतराल (Antarala): गर्भगृह और मंडप के बीच का संधि-कक्ष।
- प्रदक्षिणापथ (Pradakshinapatha): गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ।
- गोपुरम (Gopuram): मुख्यतः दक्षिण भारतीय मंदिरों में विशाल प्रवेश-द्वार।
- प्राकार (Prakara): मंदिर परिसर को घेरने वाली दीवारें।
- पुष्करिणी (Pushkarini): मंदिर का पवित्र तालाब/कुंड।
शास्त्रीय ग्रंथों में मंदिर शैलियाँ
प्राचीन भारतीय शिल्पशास्त्र के अनेक ग्रंथों में मंदिर स्थापत्य का विस्तृत वर्णन मिलता है:
- मानसार: प्रमुख वास्तुशास्त्र ग्रंथ जो नागर शैली का वर्णन करता है।
- मयमत: दक्षिण भारत का शिल्प ग्रंथ जो द्रविड़ शैली के नियम देता है।
- समरांगण सूत्रधार: राजा भोज परमार द्वारा रचित ग्रंथ — नागर व वेसर दोनों का उल्लेख।
- अपराजितपृच्छा: 12वीं शताब्दी का ग्रंथ जो वेसर शैली की व्याख्या करता है।
नागर शैली (Nagara Style)

परिचय और भौगोलिक विस्तार
नागर शैली भारत की उत्तरी मंदिर स्थापत्य शैली है। यह हिमालय से विंध्य पर्वत श्रृंखला तक तथा पूर्व में बंगाल से पश्चिम में राजस्थान-गुजरात तक फैली है। ‘नागर’ शब्द ‘नगर’ से उत्पन्न हुआ है, अर्थात् यह नगरों और उनके आस-पास विकसित स्थापत्य शैली है।
इस शैली का विकास मुख्यतः गुप्त काल में हुआ और 10वीं–11वीं शताब्दी तक यह अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची। खजुराहो के मंदिर इसकी पराकाष्ठा के श्रेष्ठ उदाहरण हैं।
नागर शैली की प्रमुख विशेषताएँ
- वक्र शिखर (Curvilinear Shikhara): नागर शैली की सबसे प्रमुख पहचान इसका ऊपर की ओर घुमावदार शिखर है जिसे ‘रेखा शिखर’ या ‘लैटिना’ भी कहते हैं। यह शिखर शहद की मक्खी के छत्ते जैसा दिखता है।
- चौकोर आधार (Square Plan): मंदिर का मूल आधार चौकोर होता है।
- आमलक: शिखर के शीर्ष पर चपटे पत्थर का गोल चक्र — यह नागर शैली की विशेष पहचान है।
- कलश: आमलक के ऊपर स्थापित कुम्भाकार आकृति।
- जल-कुंड का अभाव: नागर मंदिरों में सामान्यतः मंदिर तालाब नहीं होता।
- गर्भगृह का एकाकीपन: गर्भगृह सामान्यतः अंधकारमय और एकल होता है।
- रथिकाएँ: शिखर पर उभरी हुई ऊर्ध्वाकार पट्टियाँ जो मंदिर को गहराई देती हैं।
- अलंकरण: सुर-सुंदरी, अप्सरा, मिथुन मूर्तियाँ और देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ।
नागर शैली की उप-शैलियाँ
(क) ओडिशा शैली
ओडिशा की मंदिर स्थापत्य अत्यंत विशिष्ट और पहचानने योग्य है। इसमें शिखर को ‘देउल’ और मंडप को ‘जगमोहन’ कहते हैं।
- रेखा देउल: मुख्य गर्भगृह के ऊपर सीधा खड़ा शिखर।
- जगमोहन: सभामंडप — अर्धपिरामिडीय छत।
- भोग-मंडप और नट-मंडप: प्रसाद वितरण और नृत्य मंडप।
- प्रमुख उदाहरण: लिंगराज मंदिर (भुवनेश्वर), जगन्नाथ मंदिर (पुरी), कोणार्क का सूर्य मंदिर।
(ख) खजुराहो शैली (मध्य प्रदेश)
चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित इन मंदिरों में नागर शैली अपनी परिपक्वता पर दिखती है।
- पंचायतन योजना: मुख्य मंदिर के चारों कोनों पर चार छोटे मंदिर।
- उच्च अधिष्ठान: मंदिर ऊँचे चबूतरे पर बना होता है।
- कामुक मूर्तिकला: बाहरी दीवारों पर मिथुन और कामशास्त्र से प्रेरित मूर्तियाँ।
- प्रमुख मंदिर: कंदरिया महादेव, लक्ष्मण मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर।
(ग) सोलंकी / गुर्जर शैली (गुजरात-राजस्थान)
- मारू-गुर्जर शैली: अत्यंत जटिल नक्काशी और सूक्ष्म शिल्पकारी के लिए प्रसिद्ध।
- स्तंभित मंडप: बड़े खुले स्तंभयुक्त सभामंडप।
- प्रमुख उदाहरण: मोढेरा का सूर्य मंदिर (गुजरात), रानकपुर जैन मंदिर, दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू)।
नागर शैली के प्रमुख मंदिर
| मंदिर | स्थान / राज्य | राजवंश |
|---|---|---|
| कंदरिया महादेव मंदिर | खजुराहो, मध्य प्रदेश | चंदेल |
| लिंगराज मंदिर | भुवनेश्वर, ओडिशा | सोमवंशी |
| जगन्नाथ मंदिर | पुरी, ओडिशा | गंग राजवंश |
| कोणार्क सूर्य मंदिर | ओडिशा | नरसिंहदेव I |
| मोढेरा सूर्य मंदिर | मोढेरा, गुजरात | सोलंकी |
| दशावतार मंदिर | देवगढ़, उ.प्र. | गुप्त काल |
| दिलवाड़ा मंदिर | माउंट आबू, राज. | सोलंकी |
| विश्वनाथ मंदिर | खजुराहो, म.प्र. | चंदेल |
द्रविड़ शैली (Dravida Style)

परिचय और भौगोलिक विस्तार
द्रविड़ शैली दक्षिण भारत की प्रमुख मंदिर स्थापत्य परंपरा है। यह कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के दक्षिण से कन्याकुमारी तक और पूर्व में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल तथा कर्नाटक के कुछ भागों में फैली है। ‘द्रविड़’ शब्द दक्षिण भारत की प्राचीन जनजातियों और संस्कृति से संबंधित है।
इस शैली का विकास पल्लव राजवंश (7वीं शताब्दी) से आरंभ हुआ और चोल, पांड्य तथा विजयनगर काल में यह अपनी भव्यतम ऊँचाइयों तक पहुँची।
द्रविड़ शैली की प्रमुख विशेषताएँ
- विमान (Vimana): द्रविड़ शैली में शिखर को ‘विमान’ कहते हैं। यह पिरामिडनुमा (stepped pyramidal) होता है और ऊपर की ओर क्रमशः छोटा होता जाता है। यह नागर के वक्र शिखर से मूलतः भिन्न है।
- गोपुरम (Gopuram): द्रविड़ शैली की सबसे प्रतिष्ठित पहचान — मंदिर का विशाल प्रवेश द्वार। यह मुख्य गर्भगृह के विमान से अक्सर ऊँचा होता है। इस पर अनगिनत देवी-देवताओं की रंगीन मूर्तियाँ होती हैं।
- प्राकार (Prakara): मंदिर परिसर को घेरने वाली ऊँची परिधि-दीवारें।
- पुष्करिणी (Pushkarini): मंदिर के भीतर पवित्र जल-कुंड या तालाब।
- मंडप की विविधता: अर्धमंडप, मुखमंडप, महामंडप — विभिन्न उद्देश्यों के लिए अनेक मंडप।
- अलंकृत स्तंभ: हजार स्तंभों वाले मंडप (Thousand Pillar Hall) इस शैली की विशेषता।
- वर्गाकार आधार: मंदिर का मूल आधार वर्ग या आयत।
द्रविड़ शैली की उप-शैलियाँ
(क) पल्लव शैली (7वीं–9वीं शताब्दी)
पल्लव राजाओं ने द्रविड़ शैली को जन्म दिया। उनके मंदिर दो प्रकार के हैं:
- रथ मंदिर: महाबलीपुरम के पंचपांडव रथ — एकाश्मक (एक ही पत्थर को काटकर बना)।
- गुहा मंदिर: पहाड़ियों को काटकर बनाए गए मंदिर — महाबलीपुरम।
- संरचनात्मक मंदिर: कांचीपुरम का कैलाशनाथ मंदिर।
(ख) चोल शैली (9वीं–13वीं शताब्दी)
चोल काल द्रविड़ शैली का स्वर्णयुग है। इस काल के मंदिर अपनी भव्यता और कलात्मकता के लिए विश्व-प्रसिद्ध हैं।
- बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर): UNESCO विश्व धरोहर स्थल — 216 फीट ऊँचा विमान।
- गंगईकोंडचोलपुरम मंदिर: राजेंद्र चोल I द्वारा निर्मित।
- ऐरावतेश्वर मंदिर (दारासुरम): UNESCO धरोहर।
(ग) विजयनगर शैली (14वीं–17वीं शताब्दी)
- विशाल मंदिर परिसर और भव्य गोपुरम।
- हंपी का विरुपाक्ष मंदिर और विट्ठल मंदिर।
- ‘कल्याण मंडप’ — विवाह हेतु विशेष मंडप।
द्रविड़ शैली के प्रमुख मंदिर
| मंदिर | स्थान | राजवंश / काल |
|---|---|---|
| बृहदेश्वर मंदिर | तंजावुर, तमिलनाडु | चोल (राजराज I) |
| मीनाक्षी अम्मन मंदिर | मदुरई, तमिलनाडु | पांड्य/नायक |
| रंगनाथस्वामी मंदिर | श्रीरंगम, तमिलनाडु | चोल/विजयनगर |
| कैलाशनाथ मंदिर | कांचीपुरम | पल्लव |
| शोर मंदिर | महाबलीपुरम | पल्लव |
| विरुपाक्ष मंदिर | हंपी, कर्नाटक | विजयनगर |
| सुंदरेश्वर मंदिर | मदुरई | नायक काल |
वेसर शैली (Vesara Style)

परिचय और भौगोलिक विस्तार
वेसर शैली नागर और द्रविड़ का सुंदर समन्वय है — एक मिश्रित स्थापत्य शैली जो विंध्य पर्वत से कृष्णा नदी के बीच के दक्कन क्षेत्र में विकसित हुई। यह मुख्यतः कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ भागों में पाई जाती है।
‘वेसर’ शब्द संस्कृत के ‘विषर’ या ‘विसर’ से आया है जिसका अर्थ है — मध्यवर्ती या संकर। चालुक्य राजवंश के समय में इस शैली का आरंभ हुआ और होयसल काल में यह अपनी परिपक्वता को प्राप्त हुई।
वेसर शैली की प्रमुख विशेषताएँ
- मिश्रित शिखर: न पूरी तरह वक्र और न पूरी तरह पिरामिडनुमा — दोनों का अद्भुत सम्मिश्रण।
- तारकीय आधार (Star-shaped Plan): होयसल मंदिरों में मंदिर का आधार तारे की आकृति में होता है जो अत्यंत जटिल और दुर्लभ है।
- सुपानस्थ शिखर: शिखर में सीढ़ीदार संरचना नागर और द्रविड़ दोनों का समन्वय करती है।
- अत्यधिक नक्काशी: होयसल मंदिरों की दीवारें बेल्ट के रूप में अनेक पट्टियों में सजाई गई हैं — हाथी, घोड़े, बेल-बूटे, देवी-देवता, महाभारत-रामायण के दृश्य।
- क्लोराइट शिस्ट (Soapstone): होयसल शिल्पकारों ने नरम साबुन-पत्थर का उपयोग किया जो जटिल नक्काशी के लिए आदर्श था।
- बहुभुज स्तंभ: स्तंभों की आकृति बहुभुजीय और अलंकृत।
वेसर शैली की उप-शैलियाँ
(क) बादामी चालुक्य शैली (6वीं–8वीं शताब्दी)
चालुक्यों ने पहली बार नागर और द्रविड़ को मिलाने का प्रयोग किया।
- ऐहोल के मंदिर: दुर्गा मंदिर (ऐहोल) — अप्सिडल (अर्ध-गोलाकार) योजना।
- पट्टदकल के मंदिर: UNESCO विश्व धरोहर — नागर और द्रविड़ दोनों शैली के मंदिर एक ही स्थान पर।
- बादामी गुहा मंदिर: वैष्णव, शैव और जैन — तीन धर्मों के मंदिर।
(ख) राष्ट्रकूट शैली (8वीं–10वीं शताब्दी)
- एलोरा का कैलाश मंदिर (गुफा 16): राष्ट्रकूट राजा कृष्ण I द्वारा निर्मित — एकाश्मक शिला को काटकर बना विश्व का सबसे बड़ा एकाश्मक स्मारक।
(ग) होयसल शैली (11वीं–14वीं शताब्दी)
वेसर शैली का चरमोत्कर्ष। होयसल मंदिरों को ‘पत्थर में लिखी कविता’ कहा जाता है।
- होयसलेश्वर मंदिर (हलेबिड): दो गर्भगृह, अद्भुत नक्काशी।
- चेन्नकेशव मंदिर (बेलूर): शिल्पकारी का अद्वितीय नमूना।
- केशव मंदिर (सोमनाथपुर): तीन गर्भगृह, UNESCO धरोहर (2023)।
वेसर शैली के प्रमुख मंदिर
| मंदिर | स्थान | राजवंश |
|---|---|---|
| दुर्गा मंदिर | ऐहोल, कर्नाटक | चालुक्य |
| विरुपाक्ष मंदिर | पट्टदकल, कर्नाटक | चालुक्य |
| कैलाश मंदिर (गुफा 16) | एलोरा, महाराष्ट्र | राष्ट्रकूट |
| होयसलेश्वर मंदिर | हलेबिड, कर्नाटक | होयसल |
| चेन्नकेशव मंदिर | बेलूर, कर्नाटक | होयसल |
| केशव मंदिर | सोमनाथपुर, कर्नाटक | होयसल |
| लाड खान मंदिर | ऐहोल | चालुक्य |
तुलनात्मक तालिका — नागर vs द्रविड़ vs वेसर

निम्नलिखित तालिका तीनों शैलियों के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह UPSC, State PSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है:
| पहलू / Aspect | नागर शैली | द्रविड़ शैली | वेसर शैली |
|---|---|---|---|
| भौगोलिक क्षेत्र | उत्तर भारत (हिमालय से विंध्य तक) | दक्षिण भारत (कृष्णा नदी से कन्याकुमारी) | दक्कन / मध्य भारत (विंध्य से कृष्णा) |
| शिखर का रूप | वक्र/घुमावदार (Curvilinear) | पिरामिडनुमा (Pyramidal – विमान) | वक्र + पिरामिड (मिश्रित) |
| आधार / Plan | चौकोर (Square) | वर्गाकार या आयताकार | तारकीय/बहुभुज (Star-shaped) |
| प्रवेशद्वार | सामान्य द्वार | विशाल गोपुरम | अलंकृत प्रवेशद्वार |
| जल तत्व | जल-कुंड का अभाव | पुष्करिणी (मंदिर तालाब) | कभी-कभी तालाब |
| परिसर दीवार | सामान्य/कोई नहीं | प्राकार (ऊँची दीवारें) | मध्यम |
| गर्भगृह रूप | एकल गर्भगृह | विमान के नीचे गर्भगृह | तारकीय गर्भगृह |
| मुख्य राजवंश | गुप्त, प्रतिहार, चंदेल, सोलंकी | पल्लव, चोल, विजयनगर | चालुक्य, राष्ट्रकूट, होयसल |
| काल-खंड | 5वीं–12वीं शताब्दी | 7वीं–17वीं शताब्दी | 6वीं–13वीं शताब्दी |
| प्रमुख उदाहरण | कंदरिया महादेव, सूर्य मंदिर (मोढेरा) | बृहदेश्वर, मीनाक्षी मंदिर | दुर्गा मंदिर (ऐहोल), होयसलेश्वर |
| शास्त्रीय ग्रंथ | मानसार, समरांगण सूत्रधार | मयमत, तंत्रसमुच्चय | मानसोल्लास, अपराजितपृच्छा |
| अलंकरण | रतिकाम मूर्तियाँ, देव-मूर्तियाँ | भव्य शिल्प, गोपुरम सजावट | अत्यंत जटिल नक्काशी |
स्मरण-सूत्र / Mnemonics
परीक्षाओं में इन शैलियों को याद रखने के लिए निम्नलिखित स्मरण-सूत्र अत्यंत उपयोगी हैं:
| 🧠 स्मरण-सूत्र 1: NUD Formula (N-U-D)N = Nagara (North) → Curvilinear (Curved) ShikharaU = Vesara — bUt mixed, between North and SouthD = Dravida (Down South) → Pyramidal Vimana + Gopuram सरल हिंदी: उत्तर = वक्र, दक्षिण = पिरामिड, बीच = मिश्रित |
| 🧠 स्मरण-सूत्र 2: ‘नागर-उत्तर-वक्र, द्रविड़-दक्षिण-सीधा’नागर = उत्तर भारत = घुमावदार (वक्र) शिखरद्रविड़ = दक्षिण भारत = सीधा (पिरामिड) विमान + भव्य गोपुरमवेसर = बीच (दक्कन) = दोनों का मेल |
| 🧠 स्मरण-सूत्र 3: राजवंश याद करेंनागर → ‘गुप्त-चंदेल-सोलंकी-परमार’ → G-C-S-P → ‘Good Students Study Properly’द्रविड़ → ‘पल्लव-चोल-पांड्य-विजयनगर’ → P-C-P-V → ‘Please Call Papa Vijayanagar’वेसर → ‘चालुक्य-राष्ट्रकूट-होयसल’ → C-R-H → ‘Chalukya Rules Hoysala’ |
| ⚡ Quick Revision Points✦ आमलक → नागर शैली की पहचान✦ गोपुरम → द्रविड़ शैली की पहचान✦ तारकीय आधार → होयसल / वेसर✦ पुष्करिणी → द्रविड़ शैली में✦ एकाश्मक → पल्लव (रथ मंदिर, महाबलीपुरम)✦ विमान = द्रविड़ शिखर; शिखर = नागर शिखर✦ रेखा शिखर = नागर; सेखरी = नागर उप-प्रकार✦ ‘Great Living Chola Temples’ → UNESCO विश्व धरोहर |
UPSC / परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
प्रतियोगी परीक्षाओं में मंदिर स्थापत्य से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। निम्नलिखित तथ्य विशेष रूप से परीक्षोपयोगी हैं:
महत्वपूर्ण तथ्य एवं आँकड़े
- बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर): 216 फीट ऊँचा विमान — निर्माण काल 1010 ई.। यह राजराज चोल I द्वारा बनवाया गया।
- कोणार्क सूर्य मंदिर: 13वीं शताब्दी — नरसिंहदेव I (गंग वंश) द्वारा। इसे ‘ब्लैक पैगोडा’ भी कहते हैं।
- एलोरा कैलाश मंदिर: 8वीं शताब्दी — 200,000 टन से अधिक पत्थर काटकर बनाया गया एकाश्मक मंदिर।
- महाबलीपुरम: UNESCO विश्व धरोहर — पल्लव काल का एकाश्मक मंदिर समूह।
- होयसल मंदिर: 2023 में UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त — बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुर।
प्रमुख UPSC प्रश्न (विगत वर्ष आधारित)
| क्र. | परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख बिंदु |
|---|---|
| 1. | नागर, द्रविड़ और वेसर शैलियों के बीच मुख्य अंतर क्या हैं? (UPSC Mains आधारित) |
| 2. | गोपुरम किस शैली की विशेषता है और इसका महत्व क्या है? |
| 3. | होयसल मंदिरों की स्थापत्य विशेषताएँ बताइए। (UPSC 2019 आधारित) |
| 4. | पल्लव काल की स्थापत्य कला का वर्णन कीजिए। |
| 5. | ‘Great Living Chola Temples’ UNESCO धरोहर सूची में शामिल मंदिरों के नाम। |
| 6. | वेसर शैली किस प्रकार नागर और द्रविड़ का मिश्रण है? |
| 7. | आमलक, विमान, गोपुरम और शिखर में अंतर स्पष्ट करें। |
| 8. | महाबलीपुरम के मंदिरों का वर्णन करें एवं इनके UNESCO महत्व को बताएं। |
महत्वपूर्ण UNESCO विश्व धरोहर मंदिर
- महाबलीपुरम स्मारक समूह — पल्लव काल (1984 से सूचीबद्ध)
- सूर्य मंदिर, कोणार्क — ओडिशा (1984)
- Great Living Chola Temples — बृहदेश्वर, गंगईकोंडचोलपुरम, ऐरावतेश्वर (1987)
- हंपी स्मारक समूह — विजयनगर (1986)
- पट्टदकल स्मारक समूह — चालुक्य (1987)
- होयसल मंदिर समूह — बेलूर, हलेबिड, सोमनाथपुर (2023)
विशेष अवधारणाएँ एवं तथ्य
शिखर के प्रकार — नागर शैली में
- लैटिना (Latina): एकल वक्र शिखर — सबसे प्राचीन और सामान्य।
- सेखरी (Sekhara): मुख्य शिखर के चारों ओर छोटे उपशिखर — खजुराहो शैली।
- वल्लभी (Valabhi): आयताकार छत वाला शिखर — बैरल वॉल्ट जैसी संरचना।
मंदिर योजनाएँ
- पंचायतन: केंद्रीय मुख्य मंदिर + चारों कोनों पर 4 छोटे मंदिर (खजुराहो में सामान्य)।
- एकायतन: केवल एक मुख्य मंदिर, बिना उप-मंदिरों के।
- सप्तायतन: सात मंदिरों का समूह।
पल्लव शैली — विशेष अवधारणा
पल्लव राजाओं ने स्थापत्य की दो पद्धतियाँ अपनाईं:
- महेंद्र शैली: गुहा मंदिर — पत्थर काटकर निर्मित।
- ममल्ल शैली: एकाश्मक रथ मंदिर — एक ही विशाल पत्थर को काटकर बने।
- राजसिंह शैली: संरचनात्मक मंदिर — नींव से बने पत्थर के मंदिर।
- नंदिवर्मन शैली: उत्तर-पल्लव काल का संरचनात्मक विकास।
चालुक्य का योगदान — वेसर की नींव
बादामी के चालुक्यों ने पहली बार दोनों शैलियों को एक ही स्थान पर — पट्टदकल में — साथ खड़ा किया। पट्टदकल में एक तरफ नागर शैली के मंदिर (पापनाथ मंदिर) हैं तो दूसरी तरफ द्रविड़ शैली के (विरुपाक्ष मंदिर)। यही वेसर का बीज है।
10. निष्कर्ष
भारतीय मंदिर स्थापत्य कला केवल पत्थरों की संरचना नहीं है — यह भारत की आत्मा, उसके दर्शन, उसकी भक्ति और उसकी रचनात्मकता का मूर्त रूप है। नागर, द्रविड़ और वेसर — ये तीनों शैलियाँ भारत की विविधता में एकता की जीती-जागती मिसाल हैं।
उत्तर का वक्र नागर शिखर आकाश को छूने की भक्ति का प्रतीक है। दक्षिण का भव्य गोपुरम ईश्वर की महिमा का ऐलान करता है। दक्कन का तारकीय होयसल मंदिर पत्थर में कविता लिखता है। तीनों मिलकर भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का वह खजाना बनाते हैं जिस पर प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए।
इस अध्ययन के माध्यम से हमने देखा कि कैसे एक ही धार्मिक आस्था विभिन्न भूगोल, जलवायु, राजवंश और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रभाव में विभिन्न रूप लेती है। यही भारतीय कला का सौंदर्य है — अनेकता में एकता।
यहाँ नागर शैली, द्रविड़ शैली और वेसर शैली पर आधारित 50 UGC NET/JRF स्तर के MCQs दिए जा रहे हैं — प्रत्येक प्रश्न में A/B/C/D विकल्प + 1 लाइन व्याख्या शामिल है:
MCQs (1–50) — भारतीय मंदिर वास्तुकला
भाग 1: नागर शैली (North Indian Style)
1. नागर शैली का प्रमुख क्षेत्र कौन सा है?
A. दक्षिण भारत
B. उत्तर भारत
C. पूर्वोत्तर भारत
D. पश्चिम एशिया
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: नागर शैली उत्तर भारत में विकसित हुई।
2. नागर शैली में शिखर का स्वरूप कैसा होता है?
A. पिरामिडीय
B. गोलाकार
C. वक्र (Curvilinear)
D. समतल
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: नागर शैली का शिखर वक्राकार (लाटिना) होता है।
3. ‘अमलक’ किस शैली की विशेषता है?
A. द्रविड़
B. वेसर
C. नागर
D. इंडो-इस्लामिक
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: शिखर के ऊपर स्थित अमलक नागर शैली की पहचान है।
4. खजुराहो के मंदिर किस शैली के उदाहरण हैं?
A. द्रविड़
B. नागर
C. वेसर
D. मिश्रित
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: खजुराहो मंदिर नागर शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
5. नागर शैली में ‘गर्भगृह’ के ऊपर क्या होता है?
A. गोपुरम
B. शिखर
C. मंडप
D. स्तूप
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: गर्भगृह के ऊपर शिखर निर्मित होता है।
6. ‘लाटिना’ शब्द किससे संबंधित है?
A. स्तंभ
B. शिखर का प्रकार
C. द्वार
D. मंडप
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: लाटिना नागर शैली के शिखर का प्रकार है।
7. ओडिशा के मंदिर किस उप-शैली के हैं?
A. पञ्चायतन
B. कलिंग शैली
C. होयसला
D. चालुक्य
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: ओडिशा में नागर की ‘कलिंग’ उप-शैली मिलती है।
8. नागर शैली में मंडप का उपयोग किसलिए होता है?
A. पूजा
B. सभा/प्रार्थना
C. जल संचयन
D. रक्षा
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: मंडप सभा एवं पूजा हेतु प्रयोग होता है।
9. नागर शैली का शिखर किस दिशा में ऊँचा होता है?
A. क्षैतिज
B. ऊर्ध्वाधर
C. तिरछा
D. गोलाकार
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: शिखर ऊर्ध्वाधर दिशा में उठता है।
10. कोणार्क सूर्य मंदिर किस शैली का उदाहरण है?
A. द्रविड़
B. वेसर
C. नागर
D. बौद्ध
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: यह कलिंग (नागर) शैली का उदाहरण है।
भाग 2: द्रविड़ शैली (South Indian Style)
11. द्रविड़ शैली का विकास कहाँ हुआ?
A. उत्तर भारत
B. दक्षिण भारत
C. नेपाल
D. अफगानिस्तान
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: यह शैली दक्षिण भारत में विकसित हुई।
12. द्रविड़ शैली का शिखर किस प्रकार का होता है?
A. वक्र
B. पिरामिडीय
C. गोल
D. सपाट
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: द्रविड़ शिखर पिरामिडीय होता है।
13. ‘गोपुरम’ क्या है?
A. गर्भगृह
B. प्रवेश द्वार
C. स्तंभ
D. शिखर
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: गोपुरम मंदिर का विशाल प्रवेश द्वार होता है।
14. बृहदेश्वर मंदिर किस शैली का उदाहरण है?
A. नागर
B. वेसर
C. द्रविड़
D. जैन
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: यह द्रविड़ शैली का प्रसिद्ध मंदिर है।
15. ‘विमान’ किसे कहते हैं?
A. द्वार
B. शिखर
C. जलाशय
D. स्तंभ
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: द्रविड़ शैली में शिखर को विमान कहते हैं।
16. द्रविड़ शैली में परिसर कैसा होता है?
A. खुला
B. बहु-प्राकार (दीवारों से घिरा)
C. छोटा
D. अस्थायी
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: मंदिर परिसर कई परकोटों से घिरा होता है।
17. मदुरै का मीनाक्षी मंदिर किस शैली का उदाहरण है?
A. नागर
B. वेसर
C. द्रविड़
D. इंडो-इस्लामिक
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: यह द्रविड़ शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
18. द्रविड़ शैली में जलाशय को क्या कहते हैं?
A. कुंड
B. सरोवर
C. पुष्करिणी
D. तालाब
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: मंदिर परिसर में जलाशय को पुष्करिणी कहते हैं।
19. द्रविड़ मंदिरों में सबसे ऊँचा भाग क्या होता है?
A. गर्भगृह
B. गोपुरम
C. मंडप
D. स्तंभ
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: गोपुरम अक्सर सबसे ऊँचा होता है।
20. द्रविड़ शैली का विकास किन राजवंशों ने किया?
A. मौर्य
B. गुप्त
C. चोल, पल्लव
D. मुगल
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: चोल और पल्लव शासकों ने इसे विकसित किया।
भाग 3: वेसर शैली (Hybrid Style)
21. वेसर शैली किसका मिश्रण है?
A. बौद्ध + जैन
B. नागर + द्रविड़
C. इस्लामिक + हिंदू
D. फारसी + भारतीय
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: यह नागर और द्रविड़ का मिश्रण है।
22. वेसर शैली का विकास कहाँ हुआ?
A. उत्तर भारत
B. दक्षिण भारत
C. दक्कन क्षेत्र
D. कश्मीर
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: यह दक्कन क्षेत्र में विकसित हुई।
23. वेसर शैली के प्रमुख संरक्षक कौन थे?
A. मौर्य
B. चालुक्य
C. मुगल
D. गुप्त
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: चालुक्य शासकों ने इसे विकसित किया।
24. वेसर शैली में शिखर कैसा होता है?
A. केवल वक्र
B. केवल पिरामिडीय
C. मिश्रित
D. सपाट
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: इसमें दोनों शैलियों का मिश्रण होता है।
25. ऐहोल और बादामी के मंदिर किस शैली के हैं?
A. नागर
B. द्रविड़
C. वेसर
D. बौद्ध
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: ये वेसर शैली के उदाहरण हैं।
भाग 4: मिश्रित/तुलनात्मक प्रश्न
26. नागर शैली में गोपुरम होता है?
A. हाँ
B. नहीं
C. कभी-कभी
D. केवल दक्षिण में
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: गोपुरम द्रविड़ शैली की विशेषता है।
27. द्रविड़ शैली में अमलक पाया जाता है?
A. हाँ
B. नहीं
C. कभी-कभी
D. केवल ओडिशा में
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: अमलक नागर शैली में होता है।
28. वेसर शैली का अन्य नाम क्या है?
A. मिश्र शैली
B. शुद्ध शैली
C. गुप्त शैली
D. बौद्ध शैली
✅ उत्तर: A
📝 व्याख्या: इसे मिश्र शैली भी कहते हैं।
29. ‘पञ्चायतन योजना’ किस शैली से संबंधित है?
A. नागर
B. द्रविड़
C. वेसर
D. जैन
✅ उत्तर: A
📝 व्याख्या: यह नागर शैली की योजना है।
30. दक्षिण भारत में कौन सी शैली प्रमुख है?
A. नागर
B. वेसर
C. द्रविड़
D. इंडो-इस्लामिक
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: दक्षिण भारत में द्रविड़ शैली प्रमुख है।
(31–50) High-Level Conceptual MCQs
31. नागर शैली में शिखर का शीर्ष भाग क्या कहलाता है?
A. कलश
B. अमलक
C. मंडप
D. गोपुरम
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: अमलक शिखर का शीर्ष भाग है।
32. द्रविड़ शैली में ‘विमान’ कहाँ स्थित होता है?
A. प्रवेश द्वार
B. गर्भगृह के ऊपर
C. मंडप में
D. परिसर में
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: विमान गर्भगृह के ऊपर होता है।
33. होयसला मंदिर किस शैली से जुड़े हैं?
A. नागर
B. द्रविड़
C. वेसर
D. बौद्ध
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: होयसला शैली वेसर से संबंधित है।
34. नागर शैली में मुख्य प्रवेश द्वार छोटा क्यों होता है?
A. सुरक्षा
B. परंपरा
C. गोपुरम का अभाव
D. लागत
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: गोपुरम न होने के कारण द्वार छोटा होता है।
35. द्रविड़ मंदिरों में बहु-गोपुरम क्यों होते हैं?
A. सजावट
B. धार्मिक महत्व
C. विशाल परिसर
D. सुरक्षा
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: बड़े परिसर के कारण कई गोपुरम होते हैं।
36. वेसर शैली का विकास किस काल में हुआ?
A. मौर्य
B. गुप्त
C. मध्यकालीन
D. आधुनिक
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: यह मध्यकाल में विकसित हुई।
37. नागर शैली में शिखर का आधार क्या होता है?
A. वर्गाकार
B. वृत्ताकार
C. त्रिकोणीय
D. अंडाकार
✅ उत्तर: A
📝 व्याख्या: इसका आधार वर्गाकार होता है।
38. द्रविड़ शैली में मंदिर का शीर्ष भाग क्या कहलाता है?
A. शिखर
B. विमान
C. स्तूप
D. मंडप
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: इसे विमान कहते हैं।
39. वेसर शैली में सजावट कैसी होती है?
A. न्यूनतम
B. अत्यधिक
C. मिश्रित
D. साधारण
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: इसमें दोनों शैलियों की सजावट मिलती है।
40. नागर शैली का सबसे प्रमुख तत्व क्या है?
A. गोपुरम
B. शिखर
C. स्तंभ
D. जलाशय
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: शिखर इसकी मुख्य पहचान है।
41. द्रविड़ शैली में सबसे महत्वपूर्ण संरचना क्या है?
A. मंडप
B. गोपुरम
C. विमान
D. स्तंभ
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: गोपुरम सबसे प्रमुख होता है।
42. वेसर शैली के मंदिर किस पत्थर से बने होते हैं?
A. ग्रेनाइट
B. बलुआ पत्थर
C. क्लोराइट
D. मिश्रित
✅ उत्तर: D
📝 व्याख्या: विभिन्न प्रकार के पत्थरों का प्रयोग होता है।
43. नागर शैली में ‘रथ’ क्या है?
A. वाहन
B. दीवार की उभरी रेखा
C. स्तंभ
D. मंडप
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: रथ दीवार की प्रक्षेपण रेखाएँ हैं।
44. द्रविड़ शैली में स्तंभ कैसे होते हैं?
A. साधारण
B. अत्यधिक अलंकृत
C. बिना नक्काशी
D. लकड़ी के
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: स्तंभ अत्यधिक सजावटी होते हैं।
45. वेसर शैली का प्रमुख उदाहरण कौन सा है?
A. खजुराहो
B. मीनाक्षी
C. पट्टडकल
D. कोणार्क
✅ उत्तर: C
📝 व्याख्या: पट्टडकल वेसर शैली का प्रमुख उदाहरण है।
46. नागर शैली में ‘जगमोहन’ क्या है?
A. गर्भगृह
B. मंडप
C. द्वार
D. स्तंभ
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: यह सभा मंडप है (विशेषकर ओडिशा में)।
47. द्रविड़ शैली में नक्काशी किस पर अधिक होती है?
A. दीवार
B. स्तंभ
C. गोपुरम
D. सभी
✅ उत्तर: D
📝 व्याख्या: हर भाग पर विस्तृत नक्काशी होती है।
48. वेसर शैली का अर्थ क्या है?
A. शुद्ध
B. मिश्रित
C. प्राचीन
D. आधुनिक
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: यह मिश्रित शैली है।
49. नागर शैली में शिखर के ऊपर क्या रखा जाता है?
A. ध्वज
B. कलश
C. दीप
D. मूर्ति
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: शिखर के ऊपर कलश होता है।
50. द्रविड़ शैली में मंदिर किस दिशा में विस्तृत होते हैं?
A. ऊँचाई में
B. चौड़ाई में
C. गहराई में
D. तिरछे
✅ उत्तर: B
📝 व्याख्या: द्रविड़ मंदिर क्षैतिज विस्तार में बड़े होते हैं।
यहाँ नागर शैली, द्रविड़ शैली और वेसर शैली पर आधारित UGC NET/JRF Exam-Oriented FAQs दिए जा रहे हैं — जो आपके concepts को जल्दी clear करेंगे:
❓ FAQs (Frequently Asked Questions)
1. नागर शैली क्या है?
👉 नागर शैली उत्तर भारत की मंदिर वास्तुकला शैली है, जिसमें वक्राकार (curvilinear) शिखर और ऊपर अमलक इसकी प्रमुख पहचान होती है।
2. द्रविड़ शैली क्या है?
👉 द्रविड़ शैली दक्षिण भारत की वास्तुकला है, जिसमें पिरामिडीय ‘विमान’ और विशाल गोपुरम (प्रवेश द्वार) इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं।
3. वेसर शैली क्या है?
👉 वेसर शैली एक मिश्रित (Hybrid) शैली है, जिसमें नागर और द्रविड़ दोनों के तत्व शामिल होते हैं, और यह मुख्यतः दक्कन क्षेत्र में विकसित हुई।
4. नागर और द्रविड़ शैली में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
- नागर = वक्राकार शिखर (ऊँचाई में विकास)
- द्रविड़ = पिरामिडीय विमान + गोपुरम (क्षैतिज विस्तार)
5. अमलक क्या होता है?
👉 अमलक एक फलाकार (ribbed circular stone) संरचना है जो नागर शैली के शिखर के शीर्ष पर स्थित होती है।
6. गोपुरम क्या है?
👉 गोपुरम मंदिर का विशाल और अलंकृत प्रवेश द्वार होता है, जो द्रविड़ शैली की पहचान है।
7. ‘विमान’ किसे कहते हैं?
👉 द्रविड़ शैली में गर्भगृह के ऊपर स्थित शिखर को ‘विमान’ कहा जाता है।
8. वेसर शैली का विकास किस क्षेत्र में हुआ?
👉 वेसर शैली का विकास दक्कन (Deccan Plateau) क्षेत्र में हुआ।
9. नागर शैली के प्रमुख उदाहरण कौन से हैं?
- Khajuraho Temples
- Sun Temple Konark
- Lingaraja Temple
10. द्रविड़ शैली के प्रमुख उदाहरण कौन से हैं?
👉
- Meenakshi Temple
- Brihadeeswara Temple
11. वेसर शैली के प्रमुख उदाहरण कौन से हैं?
👉
- Pattadakal Group of Monuments
- Badami Cave Temples
12. नागर शैली में गोपुरम क्यों नहीं होता?
👉 क्योंकि नागर शैली में प्रवेश द्वार पर अधिक जोर नहीं, बल्कि शिखर पर मुख्य ध्यान दिया जाता है।
13. द्रविड़ शैली में मंदिर इतने विशाल क्यों होते हैं?
👉 क्योंकि इसमें परकोटों (enclosures) और कई गोपुरम के साथ मंदिर परिसर का क्षैतिज विस्तार अधिक होता है।
14. वेसर शैली को ‘Hybrid’ क्यों कहा जाता है?
👉 क्योंकि इसमें नागर (उत्तर) और द्रविड़ (दक्षिण) दोनों शैलियों के तत्वों का मिश्रण होता है।
15. UGC NET में इस टॉपिक से कितने प्रश्न आते हैं?
👉 आमतौर पर 2–4 प्रश्न हर पेपर में आते हैं।
16. सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले टॉपिक्स कौन से हैं?
- Style पहचान (Temple → Style)
- Features (Shikhara, Gopuram, Amalaka)
- Dynasties (Chola, Chalukya)
- Comparison Questions
17. कौन-सी शैली में शिखर पिरामिडीय होता है?
👉 द्रविड़ शैली
18. कौन-सी शैली में शिखर वक्राकार होता है?
👉 नागर शैली
19. कौन-सी शैली में मिश्रित शिखर मिलता है?
👉 वेसर शैली
20. इस टॉपिक को जल्दी कैसे revise करें?
👉 बस यह लाइन याद रखें:
“Nagar = Curve | Dravid = Pyramid | Vesara = Mix”
Final Exam Tip
👉 अगर आपको confusion हो जाए:
- Gate बड़ा दिखे → Dravid
- Top पर अमलक → Nagar
- Mix features → Vesara
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