📲 FREE Art History PDF Notes पाएं!  👉💬 WhatsApp Join करें | ✈️ Telegram Join करें

ललित कला अकादमी

aadhunik-bharatiya-chitrakala-ka-dusra-daur

आधुनिक भारतीय चित्रकला का दूसरा दौर

admin

जानिए आधुनिक भारतीय चित्रकला का दूसरा दौर कब और कैसे शुरू हुआ। प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप, हुसैन, रज़ा और MCQs सहित ...

बीरेश्वर भट्टाचार्जी बिहार के आधुनिक कला-आंदोलन के पुरोधा

बीरेश्वर भट्टाचार्जी | बिहार के आधुनिक कला-आंदोलन के पुरोधा

admin

बीरेश्वर भट्टाचार्जी (जन्म: 25 जुलाई 1935, ढाका) बिहार के आधुनिक कला-आंदोलन के उन अग्रदूतों में हैं जिन्होंने अपनी तूलिका, अपनी लेखनी और अपने शिक्षण — तीनों से एक पूरी पीढ़ी को कला की नई भाषा दी। विभाजन की पीड़ा को सहते हुए वे ढाका से पटना आए, Government College of Arts & Crafts से Fine Arts में Diploma लिया और तुर्की सरकार की प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति पर Academy of Fine Arts, इस्तम्बूल पहुँचे। इटली और पेरिस की कला-यात्रा में Marcel Duchamp, Marino Marini और Arte Povera जैसे विश्व-प्रसिद्ध कला-आंदोलनों से प्रेरणा लेकर वे 1969 में पटना लौटे और Neo-Dynamism जैसे क्रांतिकारी प्रयोग किए। उन्होंने Triangle Artist Group की स्थापना की, ललित कला अकादमी, पटना के अध्यक्ष के रूप में बिहार की कला को राष्ट्रीय मंच दिलाया और बिहार को प्रथम कलाकार सम्मान पाने वाले कलाकार बने। उनकी कला में यथार्थवाद और अतियथार्थवाद का अनूठा समन्वय है। इस लेख में उनके जीवन, कला-शैली, प्रदर्शनियों, पुरस्कारों के साथ-साथ 20 MCQs, FAQs और एक विस्तृत चित्र-तालिका भी प्रस्तुत की गई है।

ललित कला अकादमी

aadhunik-bharatiya-chitrakala-ka-dusra-daur

आधुनिक भारतीय चित्रकला का दूसरा दौर

जानिए आधुनिक भारतीय चित्रकला का दूसरा दौर कब और कैसे शुरू हुआ। प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप, हुसैन, रज़ा और MCQs सहित सम्पूर्ण जानकारी। | indianarthistory.com ...

बीरेश्वर भट्टाचार्जी बिहार के आधुनिक कला-आंदोलन के पुरोधा

बीरेश्वर भट्टाचार्जी | बिहार के आधुनिक कला-आंदोलन के पुरोधा

बीरेश्वर भट्टाचार्जी (जन्म: 25 जुलाई 1935, ढाका) बिहार के आधुनिक कला-आंदोलन के उन अग्रदूतों में हैं जिन्होंने अपनी तूलिका, अपनी लेखनी और अपने शिक्षण — तीनों से एक पूरी पीढ़ी को कला की नई भाषा दी। विभाजन की पीड़ा को सहते हुए वे ढाका से पटना आए, Government College of Arts & Crafts से Fine Arts में Diploma लिया और तुर्की सरकार की प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति पर Academy of Fine Arts, इस्तम्बूल पहुँचे। इटली और पेरिस की कला-यात्रा में Marcel Duchamp, Marino Marini और Arte Povera जैसे विश्व-प्रसिद्ध कला-आंदोलनों से प्रेरणा लेकर वे 1969 में पटना लौटे और Neo-Dynamism जैसे क्रांतिकारी प्रयोग किए। उन्होंने Triangle Artist Group की स्थापना की, ललित कला अकादमी, पटना के अध्यक्ष के रूप में बिहार की कला को राष्ट्रीय मंच दिलाया और बिहार को प्रथम कलाकार सम्मान पाने वाले कलाकार बने। उनकी कला में यथार्थवाद और अतियथार्थवाद का अनूठा समन्वय है। इस लेख में उनके जीवन, कला-शैली, प्रदर्शनियों, पुरस्कारों के साथ-साथ 20 MCQs, FAQs और एक विस्तृत चित्र-तालिका भी प्रस्तुत की गई है।