गांधार और मथुरा कला शैली के बीच अंतर, विशेषताएँ, मूर्तिकला, प्रभाव और तुलना को विस्तार से समझें। UGC NET/JRF के लिए उपयोगी नोट्स।
| गांधार बनाम मथुरा शैलीभारतीय कला के दो महान स्तंभों का तुलनात्मक अध्ययन— Indian Art History — Get All Art History At One Place |
गांधार और मथुरा शैली भारतीय मूर्तिकला की दो प्रमुख परंपराएँ हैं। यह लेख उनकी उत्पत्ति, विशेषताओं और प्रमुख अंतर को स्पष्ट करता है।
Table of Contents
प्रस्तावना
भारतीय कला का इतिहास अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। सदियों के कालखंड में जब भारतीय मूर्तिकला अपने चरम पर थी, तब दो महान कलात्मक परंपराओं ने जन्म लिया — गांधार शैली और मथुरा शैली। इन दोनों शैलियों ने न केवल भारत में, बल्कि संपूर्ण एशिया में कला की परिभाषा को एक नई दिशा दी।
गांधार शैली पश्चिमोत्तर भारत (वर्तमान पाकिस्तान और अफगानिस्तान) में विकसित हुई जहाँ यूनानी, रोमन और भारतीय संस्कृतियों का संगम हुआ। वहीं मथुरा शैली उत्तर प्रदेश के मथुरा नगर में शुद्ध भारतीय परंपरा से उपजी। दोनों शैलियाँ कुषाण काल (प्रथम-तृतीय शताब्दी ई.) में अपने चरम पर पहुँचीं।
इस लेख में हम गांधार और मथुरा शैली के उद्भव, विशेषताओं, अंतर और विरासत का गहन तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। यह लेख UPSC, राज्य PSC, कला इतिहास और भारतीय संस्कृति के छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
गांधार शैली — एक विस्तृत परिचय

उत्पत्ति एवं भौगोलिक परिचय
गांधार शैली का जन्म प्राचीन गांधार क्षेत्र में हुआ, जो आज के उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान और पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित है। प्राचीन भारतीय कला में यह क्षेत्र तक्षशिला (Taxila), पेशावर (Purushapura), स्वात घाटी (Swat Valley) और बामियान तक फैला था। यह क्षेत्र भारत, मध्य एशिया, ईरान और रोमन साम्राज्य के व्यापारिक मार्गों का संगम था।
सिकंदर के भारत आगमन (327 ई.पू.) के बाद यूनानी सांस्कृतिक प्रभाव इस क्षेत्र में गहरी जड़ें जमा चुका था। बाद में कुषाण शासकों — विशेषकर कनिष्क (लगभग 78-144 ई.) — के संरक्षण में गांधार कला का स्वर्णिम युग आया।
समयकाल
गांधार शैली का काल लगभग पहली शताब्दी ई.पू. से पाँचवीं शताब्दी ई. तक माना जाता है। इसे विद्वान ‘Graeco-Buddhist Art’ या ‘Indo-Greek Art’ भी कहते हैं। कनिष्क के शासनकाल में यह शैली सर्वाधिक फली-फूली।
विदेशी प्रभाव — हेलेनिस्टिक कला का समागम
गांधार शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस पर यूनानी-रोमन हेलेनिस्टिक कला का गहरा प्रभाव है। यूनानी देवताओं की मूर्तिकला से प्रेरित होकर कलाकारों ने बुद्ध को पहली बार मानवीय रूप दिया।
इससे पूर्व प्रतीकात्मक कला (aniconic art) प्रचलित थी जिसमें बुद्ध को पदचिह्न, बोधि वृक्ष या छत्र से दर्शाया जाता था। गांधार कलाकारों ने अपोलो देवता की प्रतिमाओं से प्रेरणा लेकर बुद्ध को मानवीय मूर्ति रूप में प्रस्तुत किया — यह भारतीय और विश्व कला के इतिहास में एक क्रांतिकारी परिवर्तन था।
सामग्री एवं तकनीक
- मुख्य पत्थर: ग्रे/नीला स्लेट (Grey/Blue Schist)
- गंधार क्षेत्र की स्थानीय पत्थर परंपरा का उपयोग
- बाद के काल में: स्टुको (Stucco — चूने और पत्थर का मिश्रण)
- सुक्ष्म और बारीक नक्काशी, ड्रेपरी की विस्तृत बुनावट
- मुख्यतः बौद्ध धर्म से सम्बद्ध विषय-वस्तु
गांधार शैली — 10 प्रमुख बिंदु
- गांधार शैली का विकास गांधार क्षेत्र में हुआ।
- यह शैली मुख्यतः कुषाण काल (1st–3rd century CE) में विकसित हुई।
- इस कला पर ग्रीक-रोमन कला का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है।
- मूर्तियाँ प्रायः ग्रे शिस्ट (Grey Schist) पत्थर से बनाई जाती थीं।
- बुद्ध की प्रतिमाएँ यथार्थवादी (Realistic) और मानव शरीर की सटीक संरचना के साथ बनाई जाती थीं।
- बालों को घुंघराले (Curly Hair) और रोमन शैली में दर्शाया जाता था।
- वस्त्रों में भारी चोगा (Drapery) दिखता है, जो ग्रीक शैली जैसा प्रतीत होता है।
- चेहरे पर गंभीरता और आध्यात्मिक गहराई का भाव प्रमुख होता है।
- यह शैली मुख्यतः बौद्ध धर्म से संबंधित मूर्तियों और स्तूप सजावट में प्रयुक्त हुई।
- प्रसिद्ध उदाहरणों में उपवासरत बुद्ध (Fasting Buddha) प्रमुख है।
मथुरा शैली — एक विस्तृत परिचय

उत्पत्ति एवं भौगोलिक परिचय
मथुरा शैली का जन्म उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर मथुरा में हुआ — वही मथुरा जो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है। मथुरा कला का विकास पहली शताब्दी ई. से लेकर बारहवीं शताब्दी ई. तक हुआ। मथुरा भारत का एक प्रमुख व्यापारिक और धार्मिक केंद्र था जहाँ बौद्ध, जैन और हिंदू — तीनों धर्मों की कला एक साथ फली-फूली।
मथुरा शैली पूर्णतः स्वदेशी भारतीय परंपरा की देन है। इस पर किसी विदेशी प्रभाव का लेश मात्र भी नहीं है। यहाँ के कलाकारों ने भारतीय मिट्टी, भारतीय अध्यात्म और भारतीय सौंदर्यशास्त्र को अपनी कला में पिरोया।
समयकाल
मथुरा शैली का चरम काल पहली से तीसरी शताब्दी ई. है, विशेषकर कुषाण काल में। गुप्त काल (चौथी-छठी शताब्दी) में मथुरा की कला ने और परिष्कृत रूप लिया जिसने सारनाथ शैली को जन्म दिया — जो भारतीय कला की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि मानी जाती है।
शुद्ध भारतीय परंपरा
मथुरा शैली में बुद्ध को भारतीय यक्ष परंपरा के अनुसार दर्शाया गया है — पुष्ट शरीर, गोल चेहरा, उभरे वक्ष, और ओजस्वी भाव। वस्त्र अत्यंत पतले, प्रायः पारदर्शी हैं जिनसे शरीर की आकृति स्पष्ट दिखती है। मथुरा के शिल्पकार स्थानीय लाल बलुआ पत्थर में काम करते थे।
सामग्री एवं तकनीक
- मुख्य पत्थर: लाल बलुआ पत्थर / सिकरी का लाल पत्थर (Red Sandstone)
- स्थानीय फतेहपुर सीकरी क्षेत्र का पत्थर — इसे ‘मथुरा स्टोन’ भी कहते हैं
- मूर्तियाँ: बौद्ध, जैन तीर्थंकर, हिंदू देवी-देवता
- नग्न या अर्धनग्न मूर्तियाँ — भारतीय शिल्पशास्त्र के अनुसार
- यक्ष और यक्षिणी की मूर्तियाँ — स्थानीय लोक कला की परंपरा
मथुरा शैली — 10 प्रमुख बिंदु
- मथुरा शैली का विकास मुख्यतः मथुरा क्षेत्र में हुआ।
- यह शैली विशेष रूप से कुषाण काल (1st–3rd century CE) में फली-फूली।
- इसमें मुख्यतः लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) का उपयोग किया जाता था।
- मथुरा कला पूर्णतः स्वदेशी (Indigenous) भारतीय शैली का प्रतिनिधित्व करती है।
- बुद्ध की मूर्तियों में पहली बार मानव रूप में प्रस्तुति यहीं विकसित हुई।
- मूर्तियों में शरीर का गठन ठोस, मजबूत और भरा हुआ दिखाई देता है।
- चेहरे पर आध्यात्मिक शांति के साथ हल्की मुस्कान (Spiritual Smile) देखने को मिलती है।
- वस्त्रों को बहुत हल्के और शरीर से चिपके हुए रूप में दर्शाया जाता है।
- हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों की मूर्तियाँ इस शैली में निर्मित हुईं।
- प्रसिद्ध उदाहरणों में कत्रा केशवदेव बुद्ध प्रतिमा प्रमुख है।
अगर चाहो तो मैं इसी तरह गांधार शैली के भी 10 पॉइंट्स या दोनों का comparison table भी बना सकता हूँ।
गांधार और मथुरा शैली — मुख्य अंतर
गांधार और मथुरा शैली के बीच का अंतर केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि वैचारिक, सौंदर्यात्मक और तकनीकी भी है। भारतीय कला इतिहास में इन दोनों का तुलनात्मक अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
| पहलू / Aspect | गांधार शैली (Gandhara) | मथुरा शैली (Mathura) |
|---|---|---|
| उत्पत्ति स्थान | तक्षशिला, पेशावर, स्वात (वर्तमान पाकिस्तान/अफगानिस्तान) | मथुरा, उत्तर प्रदेश, भारत |
| समयकाल | 1ली शताब्दी ई.पू. — 5वीं शताब्दी ई. | 1ली शताब्दी ई. — 12वीं शताब्दी ई. |
| प्रेरणा/प्रभाव | यूनानी-रोमन हेलेनिस्टिक कला (Graeco-Roman) | शुद्ध भारतीय यक्ष परंपरा |
| पत्थर/सामग्री | ग्रे/नीला स्लेट (Grey Schist) और स्टुको | लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) |
| बुद्ध का चेहरा | यूनानी लक्षण — पतली नाक, लहराती दाढ़ी, वेवी बाल | भारतीय लक्षण — गोल चेहरा, घुंघराले बाल, ओजस्वी भाव |
| वस्त्र | भारी और मोटे वस्त्र, घुमावदार प्लीट्स (ग्रीक टोगा जैसे) | पतले और पारदर्शी वस्त्र, शरीर स्पष्ट |
| शारीरिक गठन | पतला, दुबला-पतला — ग्रीक एथलीट जैसा | पुष्ट और भरा हुआ शरीर — भारतीय यक्ष परंपरा |
| मुस्कान/भाव | शांत, गंभीर और चिंतनशील | जीवंत, ओजस्वी और आनंदमय |
| उष्णीष (Ushnisha) | छोटा और चपटा, बालों से ढका | स्पष्ट और उभरा हुआ |
| विषय-वस्तु | केवल बौद्ध धर्म — बुद्ध जीवन के दृश्य | बौद्ध + जैन + हिंदू — बहु-धार्मिक |
| रत्न/आभूषण | न्यूनतम आभूषण — सरल वेशभूषा | भारी आभूषण और अलंकरण |
| पृष्ठभूमि (Background) | प्रायः सादा पृष्ठभूमि | सजावटी और भरी हुई पृष्ठभूमि |
| संरक्षक | कुषाण राजा — विशेषतः कनिष्क | कुषाण + बाद में गुप्त शासक |
| विरासत/प्रभाव | मध्य एशिया, चीन, जापान, कोरिया | गुप्त कला, सारनाथ शैली, संपूर्ण भारत |
शैली-विशिष्ट अंतर — गहन विश्लेषण
बुद्ध की प्रतिमा में अंतर
| गांधार शैली में बुद्ध की प्रतिमा:बाल लहराते, घुँघराले और कंधों तक लंबे (यूनानी अपोलो जैसे)माथे पर ‘उर्णा’ (ऊन की लट) छोटी और अस्पष्टउष्णीष (सिर का उभार) बालों के जूड़े जैसाआँखें: अर्ध-खुली, पश्चिमी ढंग से उकेरीहोंठ: पतले और सुगठित — यूनानी प्रतिमाओं जैसेवस्त्र: मोटे और ड्रेपरी में लिपटे, जैसे रोमन टोगा मथुरा शैली में बुद्ध की प्रतिमा:बाल छोटे, घुंघराले और सिर से चिपके हुएउर्णा स्पष्ट और प्रमुखउष्णीष उभरा और सुस्पष्टआँखें: बड़ी, खुली, जीवंत — भारतीय सौंदर्य मानकहोंठ: भरे-भरे और मुस्कान युक्तवस्त्र: पतले, बाएं कंधे पर, शरीर लगभग स्पष्ट |
मूर्ति सामग्री में अंतर
पत्थर की सामग्री दोनों शैलियों का सबसे तत्काल और दृश्यमान अंतर है। गांधार शैली में उपयोग किया जाने वाला ग्रे/नीला स्लेट उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान की पहाड़ियों में मिलता है। यह पत्थर सुक्ष्म नक्काशी के लिए उत्तम था। इसका रंग धूसर-नीला है जो प्रतिमाओं को एक गंभीर और ठंडा स्वरूप देता है।
इसके विपरीत मथुरा शैली में लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) का प्रयोग होता था — विशेषतः फतेहपुर सीकरी और विंध्याचल क्षेत्र का। इसका गहरा लाल रंग प्रतिमाओं को ऊर्जावान और जीवंत स्वरूप देता है। यह पत्थर अपेक्षाकृत कठोर था किंतु मथुरा के कुशल शिल्पकार इसमें भी सूक्ष्म कार्य कर लेते थे।
वस्त्र और अलंकरण में अंतर
गांधार शैली में वस्त्र भारी और लहराते हुए हैं, जिनमें गहरी सिलवटें (pleats) हैं — ठीक जैसे रोमन टोगा या यूनानी हिमेशन वस्त्र। इस शैली की मूर्तियाँ देखने पर ऐसा लगता है जैसे वस्त्र का भार मूर्ति पर है।
मथुरा शैली में वस्त्र इतने पतले और पारदर्शी हैं कि शरीर की आकृति स्पष्ट दिखती है — इसे ‘wet drapery’ या ‘clinging drapery’ कहा जाता है। इसमें भारतीय वस्त्र परंपरा जैसे उत्तरीय (शॉल) का भाव है।
चेहरे की अभिव्यक्ति और भाव
यह दोनों शैलियों का सबसे महत्वपूर्ण दार्शनिक और सौंदर्यात्मक अंतर है। गांधार शैली में बुद्ध की मुखाकृति शांत, गंभीर और अंतर्मुखी है — जैसे एक दार्शनिक गहरे ध्यान में हो। यह यूनानी सौंदर्यशास्त्र का प्रभाव है जहाँ आदर्श रूप को ठंडी गरिमा से दर्शाया जाता था।
मथुरा शैली में बुद्ध की मुखाकृति जीवंत, ओजस्वी और मुस्कानयुक्त है। यहाँ के कलाकारों ने बुद्ध में करुणा और आनंद का भाव भरा। भारतीय दर्शन में आत्मा का जो आनंद है — वह मथुरा की मूर्तियों में साफ झलकता है।
प्रमुख कलाकृतियाँ — वर्षवार तालिका
निम्न तालिका में गांधार और मथुरा शैली की प्रमुख कलाकृतियों को वर्ष, माध्यम, शैली और संग्रहालय के अनुसार सूचीबद्ध किया गया है:
| वर्ष (लगभग) | कलाकृति का नाम | माध्यम/सामग्री | शैली | स्थान/संग्रहालय |
|---|---|---|---|---|
| 50 ई. | बुद्ध प्रतिमा (खड़ी मुद्रा) | ग्रे स्लेट | गांधार | पेशावर संग्रहालय |
| 100 ई. | बोधिसत्त्व मैत्रेय | ग्रे स्लेट | गांधार | लाहौर संग्रहालय |
| 100 ई. | बुद्ध का जन्म — रिलीफ | ग्रे स्टोन | गांधार | British Museum |
| 150 ई. | बुद्ध का महापरिनिर्वाण | स्टुको | गांधार | Kabul Museum |
| 100 ई. | खड़ी बुद्ध मूर्ति (Mathura) | लाल बलुआ पत्थर | मथुरा | Mathura Museum |
| 150 ई. | तीर्थंकर ऋषभनाथ | लाल बलुआ पत्थर | मथुरा | Lucknow Museum |
| 150 ई. | जैन मूर्ति — नग्न तीर्थंकर | Red Sandstone | मथुरा | National Museum, Delhi |
| 200 ई. | कनिष्क की बुद्ध प्रतिमा | लाल पत्थर | मथुरा | Mathura Museum |
| 200 ई. | स्तूप रेलिंग पैनल | ग्रे स्लेट | गांधार | Lahore Museum |
| 200 ई. | यक्षी (Yakshi) मूर्ति | Red Sandstone | मथुरा | National Museum |
| 250 ई. | बुद्ध — ध्यान मुद्रा | स्टुको + Schist | गांधार | Peshawar Museum |
| 300 ई. | विष्णु की प्रतिमा | Red Sandstone | मथुरा | Mathura Museum |
| 350 ई. | गुप्तकालीन बुद्ध | चुनार बलुआ पत्थर | गुप्त-मथुरा | Sarnath Museum |
| 400 ई. | बामियान बुद्ध (विशाल) | पत्थर + स्टुको | गांधार | अफगानिस्तान (नष्ट) |
दोनों शैलियों में समानताएँ
यद्यपि गांधार और मथुरा शैली अनेक दृष्टियों से भिन्न हैं, तथापि इनमें कुछ महत्वपूर्ण समानताएँ भी हैं:
- दोनों शैलियाँ कुषाण काल (1ली-3री शताब्दी ई.) में अपने चरम पर पहुँचीं
- दोनों में बुद्ध को पहली बार मानवीय रूप में दर्शाया गया — पूर्व में केवल प्रतीकात्मक कला थी
- दोनों का मुख्य संरक्षक कुषाण वंश था — विशेषतः राजा कनिष्क
- दोनों में बौद्ध धर्म की विषय-वस्तु प्रमुख है
- दोनों में 32 महापुरुष लक्षण (Mahapurush Lakshana) का चित्रण मिलता है — जैसे उष्णीष, उर्णा, दीर्घ कान
- दोनों ने भारत की कला परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई
दोनों शैलियों का प्रभाव एवं विरासत
गांधार शैली की विरासत
गांधार शैली ने संपूर्ण एशिया की कला को प्रभावित किया। रेशम मार्ग (Silk Road) के व्यापारी और बौद्ध भिक्षु इस कला को मध्य एशिया, चीन, जापान, कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया तक ले गए। गांधार कला के प्रभाव से चीन में ‘बुद्धिस्ट आर्ट’ का विशाल भंडार तैयार हुआ।
- चीन में: Yungang और Longmen की गुफाओं में गांधार शैली का प्रभाव स्पष्ट
- जापान में: नारा काल (Nara Period) की बुद्ध मूर्तियाँ गांधार से प्रेरित
- अफगानिस्तान में: बामियान के विशाल बुद्ध (2001 में तालिबान द्वारा नष्ट)
- पाकिस्तान में: तक्षशिला के स्तूप और संग्रहालय
मथुरा शैली की विरासत
मथुरा शैली भारतीय कला का आधार स्तंभ बनी। गुप्त काल में मथुरा से ही सारनाथ शैली का विकास हुआ जिसे भारतीय कला का स्वर्णयुग माना जाता है। मथुरा की परंपरा आगे चलकर:
- गुप्त कला (4-6वीं शताब्दी) का आधार बनी
- सारनाथ की बुद्ध प्रतिमाएँ — मथुरा की परिष्कृत शाखा
- दक्षिण भारतीय मूर्तिकला पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव
- हिंदू और जैन मूर्तिकला का मूल स्रोत
- राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली में मथुरा कला का विशाल संग्रह
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
| 🎯 UPSC/PSC परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:गांधार और मथुरा शैली में मूल अंतर क्या है?किस शैली को ‘Graeco-Buddhist Art’ कहा जाता है?मथुरा कला में किस पत्थर का उपयोग होता था?गांधार शैली में बुद्ध की पहली मानवीय प्रतिमा कब बनी?कनिष्क का किस कला शैली से संबंध था?गुप्त कला पर किस शैली का सर्वाधिक प्रभाव था?बामियान बुद्ध किस शैली का उदाहरण है?’Wet Drapery’ किस शैली की विशेषता है? |
निष्कर्ष
गांधार और मथुरा — ये दोनों शैलियाँ भारतीय कला इतिहास के दो स्वर्णिम अध्याय हैं। एक ओर गांधार शैली ने पूर्व और पश्चिम की कला का अभूतपूर्व संगम कराया और विश्व कला को ‘बुद्ध की मानवीय प्रतिमा’ जैसी अनमोल देन दी। दूसरी ओर मथुरा शैली ने शुद्ध भारतीय आत्मा से कला का सृजन किया और गुप्त कला जैसी महान परंपरा की नींव रखी।
इन दोनों शैलियों में मतभेद नहीं, पूरकता है। एक की जड़ें विदेश से आई संस्कृति में हैं तो दूसरे की जड़ें भारत की मिट्टी में। एक ने बुद्ध को दार्शनिक गंभीरता दी तो दूसरे ने करुणा की मुस्कान। भारतीय कला और संस्कृति की यह विविधता ही उसकी शक्ति है।
गांधार बनाम मथुरा शैली – MCQs (Hindi)
1. गांधार कला मुख्यतः किस क्षेत्र में विकसित हुई?
A. दक्षिण भारत
B. उत्तर-पश्चिम भारत
C. पूर्व भारत
D. मध्य भारत
उत्तर: B
व्याख्या: गांधार कला उत्तर-पश्चिम क्षेत्र (आज का पाकिस्तान-अफगानिस्तान) में विकसित हुई।
2. मथुरा शैली किस राज्य में विकसित हुई?
A. गुजरात
B. उत्तर प्रदेश
C. बिहार
D. राजस्थान
उत्तर: B
व्याख्या: मथुरा उत्तर प्रदेश में स्थित है।
3. गांधार कला पर किसका प्रभाव था?
A. फारसी
B. यूनानी-रोमन
C. चीनी
D. मिस्री
उत्तर: B
व्याख्या: इसमें यूनानी-रोमन प्रभाव स्पष्ट दिखता है।
4. मथुरा कला किस पर आधारित है?
A. विदेशी शैली
B. भारतीय परंपरा
C. फारसी संस्कृति
D. चीनी कला
उत्तर: B
व्याख्या: यह पूरी तरह भारतीय परंपरा पर आधारित है।
5. बुद्ध की मूर्तियाँ पहली बार कब बनीं?
A. मौर्य काल
B. गुप्त काल
C. कुषाण काल
D. हड़प्पा काल
उत्तर: C
व्याख्या: बुद्ध प्रतिमाओं का निर्माण कुषाण काल में शुरू हुआ।
6. गांधार कला में किस पत्थर का प्रयोग हुआ?
A. लाल बलुआ पत्थर
B. संगमरमर
C. धूसर शिस्ट पत्थर
D. ग्रेनाइट
उत्तर: C
व्याख्या: इसमें ग्रे शिस्ट पत्थर का उपयोग होता था।
7. मथुरा कला में मुख्यतः किस पत्थर का प्रयोग हुआ?
A. सफेद संगमरमर
B. धूसर पत्थर
C. लाल बलुआ पत्थर
D. चूना पत्थर
उत्तर: C
व्याख्या: मथुरा कला लाल बलुआ पत्थर के लिए प्रसिद्ध है।
8. गांधार शैली में बुद्ध को कैसे दर्शाया गया है?
A. पारदर्शी वस्त्र
B. भारी रोमन चोगा
C. बिना वस्त्र
D. रेशमी वस्त्र
उत्तर: B
व्याख्या: बुद्ध को रोमन शैली के भारी वस्त्र में दिखाया गया है।
9. मथुरा शैली में बुद्ध का वस्त्र कैसा होता है?
A. भारी
B. पारदर्शी या हल्का
C. कवच
D. विदेशी पोशाक
उत्तर: B
व्याख्या: वस्त्र हल्के और शरीर से चिपके हुए होते हैं।
10. गांधार कला की विशेषता क्या है?
A. प्रतीकवाद
B. यथार्थवाद
C. अमूर्तता
D. ज्यामितीयता
उत्तर: B
व्याख्या: इसमें मानव आकृति का यथार्थ चित्रण होता है।
11. मथुरा कला किस पर जोर देती है?
A. यथार्थवाद
B. आध्यात्मिकता
C. विदेशी प्रभाव
D. युद्ध दृश्य
उत्तर: B
व्याख्या: यह आध्यात्मिक भाव को दर्शाती है।
12. गांधार बुद्ध किसके समान दिखते हैं?
A. भारतीय संत
B. यूनानी देवता अपोलो
C. मिस्री राजा
D. चीनी भिक्षु
उत्तर: B
व्याख्या: उनका चेहरा यूनानी देवता अपोलो जैसा लगता है।
13. गांधार मूर्तियों में बाल कैसे होते हैं?
A. मुंडित
B. घुंघराले
C. सीधे लंबे
D. मुकुटधारी
उत्तर: B
व्याख्या: बाल घुंघराले और लहरदार होते हैं।
14. मथुरा मूर्तियों में बाल कैसे होते हैं?
A. घुंघराले
B. उष्णीष (जुड़ा)
C. गंजे
D. मुकुट
उत्तर: B
व्याख्या: सिर पर उष्णीष (जुड़ा) दिखाया जाता है।
15. गांधार कला मुख्यतः किस विषय पर आधारित है?
A. हिंदू देवता
B. बौद्ध धर्म
C. जैन धर्म
D. लोक कला
उत्तर: B
व्याख्या: इसमें बौद्ध विषय प्रमुख हैं।
16. मथुरा कला किनको दर्शाती है?
A. केवल बुद्ध
B. केवल जैन
C. बुद्ध, जैन, हिंदू
D. केवल राजा
उत्तर: C
व्याख्या: इसमें विभिन्न धर्मों की मूर्तियाँ मिलती हैं।
17. गांधार कला की तकनीक क्या है?
A. प्रतीकात्मक
B. यथार्थवादी
C. अमूर्त
D. लकड़ी पर
उत्तर: B
व्याख्या: इसमें शरीर और वस्त्र का यथार्थ चित्रण होता है।
18. मथुरा कला की विशेषता क्या है?
A. भारी वस्त्र
B. सुदृढ़ शरीर
C. विदेशी रूप
D. कवच
उत्तर: B
व्याख्या: शरीर मजबूत और जीवंत दिखता है।
19. किस शासक ने दोनों शैलियों को संरक्षण दिया?
A. अशोक
B. चंद्रगुप्त
C. कनिष्क
D. हर्ष
उत्तर: C
व्याख्या: कुषाण शासक कनिष्क ने दोनों को बढ़ावा दिया।
20. गांधार कला का विकास किस कारण हुआ?
A. व्यापार मार्ग
B. अलगाव
C. वन संस्कृति
D. मरुस्थल
उत्तर: A
व्याख्या: यह सिल्क रूट के कारण विकसित हुई।
21. मथुरा कला किसे दर्शाती है?
A. पश्चिमी यथार्थ
B. भारतीय आदर्श
C. चीनी शैली
D. फारसी प्रभाव
उत्तर: B
व्याख्या: यह भारतीय आदर्श सौंदर्य को दर्शाती है।
22. गांधार मूर्तियों में क्या प्रमुख है?
A. आभूषण
B. वस्त्र की गहरी सिलवटें
C. नग्नता
D. लकड़ी
उत्तर: B
व्याख्या: वस्त्रों में गहरी सिलवटें दिखाई देती हैं।
23. मथुरा मूर्तियाँ कैसी होती हैं?
A. पतली
B. मजबूत और भरी हुई
C. कमजोर
D. अमूर्त
उत्तर: B
व्याख्या: शरीर सुदृढ़ और संतुलित होता है।
24. गांधार कला को क्या कहा जाता है?
A. इंडो-चीनी
B. इंडो-ग्रीक
C. इंडो-फारसी
D. इंडो-अरबी
उत्तर: B
व्याख्या: इसमें भारतीय और यूनानी मिश्रण है।
25. मथुरा कला का उत्कर्ष कब हुआ?
A. मौर्य काल
B. कुषाण काल
C. गुप्त काल
D. मुगल काल
उत्तर: B
व्याख्या: यह कुषाण काल में विकसित हुई।
❓ FAQs (Hindi)
1. गांधार और मथुरा शैली में मुख्य अंतर क्या है?
गांधार शैली पर यूनानी-रोमन प्रभाव है, जबकि मथुरा शैली पूरी तरह भारतीय है।
2. गांधार कला में कौन सा पत्थर प्रयोग होता है?
धूसर शिस्ट पत्थर।
3. मथुरा कला किस पत्थर के लिए प्रसिद्ध है?
लाल बलुआ पत्थर।
4. गांधार बुद्ध की विशेषता क्या है?
यथार्थवादी चेहरा और भारी वस्त्र।
5. मथुरा बुद्ध की विशेषता क्या है?
आध्यात्मिक भाव और हल्के वस्त्र।
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