मुगल काल में चित्रकला का उद्भव और विकास — बाबर से औरंगजेब तक, प्रमुख चित्रकार, विशेषताएं और 50 MCQ सहित TGT PGT 2026 के लिए संपूर्ण गाइड हिंदी में।
मुगलकालीन कला का उद्भव, विकास, विशेषताएं और प्रमुख चित्रकार | TGT PGT 2026
Table of Contents
प्रस्तावना — मुगल चित्रकला का परिचय
भारतीय कला के इतिहास में मुगल चित्रकला का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वह कला-परंपरा है जिसने फारसी, ईरानी, तुर्की और भारतीय कला के तत्वों को एक साथ मिलाकर एक अनूठी और विश्वस्तरीय शैली का निर्माण किया। मुगल सम्राटों का कला-प्रेम इतिहास में अतुलनीय है — उन्होंने न केवल कला को संरक्षण दिया, बल्कि स्वयं कला के पारखी और प्रोत्साहक बने।
मुगल काल (1526-1857) में चित्रकला का जो विकास हुआ, वह भारतीय कला के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। इस काल में बनाए गए चित्र आज भी दुनिया के प्रमुख संग्रहालयों — लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क और नई दिल्ली — में सुरक्षित हैं और करोड़ों रुपयों में नीलाम होते हैं।
TGT, PGT और UGC NET परीक्षाओं में मुगल चित्रकला से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस लेख में हम मुगल चित्रकला के उद्भव से लेकर उसके पतन तक की संपूर्ण यात्रा को विस्तार से समझेंगे।
| 📌 परीक्षा संकेत: ‘मुगल काल में चित्रकला के विकास को रेखांकित कीजिए’ — यह प्रश्न UP TGT PGT और UGC NET में बार-बार आता है। इस लेख को ध्यान से पढ़ें। |
मुगल चित्रकला का उद्भव — कहाँ से आई यह परंपरा?
मुगल चित्रकला का उद्भव एकाएक नहीं हुआ। इसके पीछे कई धाराओं का संगम है। मुगल सम्राट बाबर के साथ मध्य एशियाई कला की परंपरा भारत आई। उसके पुत्र हुमायूं ने ईरान में निर्वासन के दौरान फारसी कला के सर्वश्रेष्ठ चित्रकारों — मीर सैयद अली और ख्वाजा अब्दुस समद — को भारत लाया। यहीं से मुगल चित्रकला का वास्तविक आरंभ हुआ।
| विषय | विवरण |
| उद्भव काल | 16वीं शताब्दी (हुमायूं काल से) |
| प्रमुख प्रभाव | फारसी (ईरानी), तैमूरी, भारतीय (हिंदू परंपरा) |
| पहला चित्रशाला | हुमायूं ने काबुल में स्थापित की |
| प्रथम प्रमुख कृति | हम्जानामा (अकबर काल) |
| शैली का आधार | फारसी + भारतीय कला का संगम |
| भाषा | चित्र फारसी शैली में पर भारतीय विषयों पर |
मुगल चित्रकला की नींव तीन प्रमुख परंपराओं पर टिकी है — पहली, फारसी/ईरानी कला जो महीन रेखाओं और चमकीले रंगों के लिए प्रसिद्ध थी; दूसरी, भारतीय अपभ्रंश कला जो लोक जीवन और धार्मिक विषयों से भरपूर थी; और तीसरी, यूरोपीय/पाश्चात्य कला जिसका प्रभाव बाद में अकबर और जहाँगीर के काल में बढ़ा।
बाबर और हुमायूं काल — नींव रखना
बाबर काल (1526-1530)
मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर स्वयं एक कुशल लेखक और कला-प्रेमी थे। उनकी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में उन्होंने भारतीय प्रकृति, पशु-पक्षियों और फूलों का अत्यंत सजीव वर्णन किया। हालांकि बाबर का शासनकाल बहुत छोटा था, इसलिए चित्रकला का व्यवस्थित विकास उनके काल में नहीं हो सका। फिर भी उन्होंने मध्य एशियाई कला परंपरा को भारत में लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
हुमायूं काल (1530-1556) — मुगल चित्रकला की वास्तविक नींव
मुगल चित्रकला का वास्तविक श्रेय हुमायूं को जाता है। जब हुमायूं को शेरशाह सूरी ने 1540 में भारत से खदेड़ा, तो वे ईरान चले गए। वहाँ उन्होंने फारसी दरबार में सफ़वी कला के सर्वश्रेष्ठ नमूने देखे और प्रभावित हुए। जब 1555 में वे भारत लौटे, तो अपने साथ दो महान ईरानी चित्रकार लाए:
- मीर सैयद अली — ईरान के शाह तहमास्प के दरबारी चित्रकार
- ख्वाजा अब्दुस समद — ‘शीरीं कलम’ (मीठी कलम) के नाम से प्रसिद्ध
इन दोनों चित्रकारों ने भारत में मुगल चित्रशाला (Atelier) की स्थापना की और भारतीय चित्रकारों को फारसी तकनीक सिखाई। यही वह बिंदु है जहाँ से मुगल चित्रकला का व्यवस्थित इतिहास शुरू होता है।
अकबर काल (1556-1605) — मुगल चित्रकला का स्वर्णिम काल
अकबर के काल में मुगल चित्रकला ने अपनी वास्तविक पहचान बनाई। अकबर स्वयं पढ़-लिख नहीं सकते थे, लेकिन कला के प्रति उनकी अभिरुचि असाधारण थी। उन्होंने एक विशाल शाही चित्रशाला (Kitabkhana) की स्थापना की जिसमें एक समय में 100 से अधिक चित्रकार काम करते थे।
हम्जानामा — मुगल चित्रकला की पहली महान कृति
अकबर के आदेश पर बनाया गया हम्जानामा मुगल चित्रकला की पहली महान कृति है। यह अमीर हम्जा की कहानियों पर आधारित एक विशाल चित्र-संग्रह था जिसमें 1400 चित्र थे। इसे बनाने में लगभग 15 वर्ष (1562-1577) लगे। इसका आकार असाधारण था — प्रत्येक चित्र लगभग 68×52 सेंटीमीटर का था।
| ⭐ हम्जानामा की विशेषता: इसमें पहली बार फारसी और भारतीय शैलियों का वास्तविक संगम हुआ। चित्रों में भारतीय रंग, भारतीय पशु-पक्षी और भारतीय वातावरण का समावेश हुआ। |
अकबर काल के प्रमुख चित्रकार

| चित्रकार | विशेषता | प्रमुख कृति |
| दसवंत | सर्वश्रेष्ठ भारतीय चित्रकार (अकबर का प्रिय) | रज्मनामा के चित्र |
| बसावन | मनोविज्ञान चित्रण में माहिर | अकबरनामा के चित्र |
| केसव | पशु चित्रण में विशेष | बाबरनामा के चित्र |
| मिस्किन | विनोदी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध | अकबरनामा |
| मुकुंद | चरित्र चित्रण में कुशल | अकबरनामा |
| ख्वाजा अब्दुस समद | ‘शीरीं कलम’ — गुरु स्थान | हम्जानामा |
अकबर काल की प्रमुख कृतियाँ
- हम्जानामा (1562-1577) — 1400 चित्र
- अकबरनामा — अकबर के जीवन की कहानी
- रज्मनामा — महाभारत का फारसी अनुवाद, सचित्र
- बाबरनामा — बाबर की आत्मकथा के चित्र
- तूतीनामा — तोते की कहानियाँ
- खानदाने तैमूरिया — तैमूर वंश के शासकों के चित्र
अकबर काल में पाश्चात्य प्रभाव
अकबर के काल में पुर्तगाली मिशनरी ईसाई धर्म के प्रचार के लिए आए और अपने साथ यूरोपीय चित्र और मानचित्र लाए। अकबर ने इन यूरोपीय चित्रों में रुचि ली। इसका प्रभाव यह हुआ कि मुगल चित्रों में परिप्रेक्ष्य (Perspective), छाया-प्रकाश (Shading) और आयामी (3D) प्रभाव आने लगे।
जहाँगीर काल (1605-1627) — चित्रकला का चरमोत्कर्ष

यदि मुगल चित्रकला की बात करें तो जहाँगीर का काल उसका सर्वोच्च शिखर था। जहाँगीर स्वयं एक असाधारण कला-पारखी था। वह चित्रों को देखकर बता सकता था कि यह किस चित्रकार की कृति है। उसने अपनी आत्मकथा ‘तुज़ुक-ए-जहाँगीरी’ में कला के बारे में अत्यंत विद्वत्तापूर्ण टिप्पणियाँ की हैं।
| जहाँगीर का प्रसिद्ध कथन: ‘मेरी आँखें इतनी प्रशिक्षित हैं कि यदि किसी चित्र को कई चित्रकारों ने मिलकर बनाया हो, तो मैं बता सकता हूँ कि कौन सा हिस्सा किसने बनाया है।’ |
जहाँगीर काल की विशेषताएं
- व्यक्ति-चित्रण (Portrait) — जहाँगीर के काल में सर्वोच्च विकास
- प्रकृति चित्रण — पशु-पक्षी और फूलों का अद्भुत चित्रण
- बारीक रेखाएं — अत्यंत सूक्ष्म और नाजुक रेखाकारी
- यथार्थवाद — चित्रों में जीवन जैसी सच्चाई
- मनोभावों का चित्रण — चेहरे के भाव अत्यंत सजीव
- पाश्चात्य प्रभाव — परिप्रेक्ष्य और शेडिंग का व्यापक प्रयोग
जहाँगीर काल के प्रमुख चित्रकार
| चित्रकार | विशेषता | प्रमुख कृति |
| उस्ताद मंसूर | ‘नादिर-उल-असर’ — पशु-पक्षी चित्रण के महान उस्ताद | साइबेरियाई सारस, बंगाल का टर्की |
| अबुल हसन | ‘नादिर-उज़-ज़मान’ — व्यक्ति-चित्रण के माहिर | जहाँगीर का दरबार |
| बिशनदास | व्यक्ति-चित्रण — ईरानी दरबार के चित्र | ईरान के शाह के चित्र |
| दौलत | सीमा-चित्रण (Border decoration) | विभिन्न पांडुलिपियाँ |
| मनोहर | दरबारी दृश्य | जहाँगीरनामा |
उस्ताद मंसूर — प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार
उस्ताद मंसूर को जहाँगीर ने ‘नादिर-उल-असर’ (युग का अद्वितीय) की उपाधि दी। उन्होंने साइबेरियाई सारस, बंगाल के टर्की, और विभिन्न दुर्लभ पशु-पक्षियों के ऐसे चित्र बनाए जो आज भी वनस्पति विज्ञान और प्राणिशास्त्र के संदर्भ ग्रंथों में उद्धृत किए जाते हैं। उनके चित्रों में इतनी सटीकता थी कि वे वैज्ञानिक दृष्टि से भी मूल्यवान हैं।
जहाँगीर काल में पाश्चात्य प्रभाव
जहाँगीर के काल में ब्रिटिश राजदूत सर थॉमस रो (1615-1618) मुगल दरबार में आए। उनके साथ आए यूरोपीय चित्रों का गहरा प्रभाव मुगल चित्रकारों पर पड़ा। इस काल में चित्रों में ‘Halo’ (दिव्य प्रभामंडल), Angel (देवदूत), और Globe जैसे यूरोपीय तत्व आने लगे।
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शाहजहाँ काल (1628-1658) — वास्तुकला की ओर झुकाव
शाहजहाँ का काल मुगल स्थापत्य कला का सर्वोच्च काल था — ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद जैसी इमारतें इसी काल की देन हैं। इसलिए शाहजहाँ का ध्यान चित्रकला की अपेक्षा वास्तुकला में अधिक लगा। फिर भी चित्रकला का विकास रुका नहीं।
शाहजहाँ काल की विशेषताएं
- चित्रों में अलंकारिकता (Decoration) बढ़ी
- सोने और चाँदी के रंगों का अधिक उपयोग
- चित्रों की सीमाएं (Borders) अत्यंत सुंदर और विस्तृत
- व्यक्ति-चित्रण जारी रहा
- दरबारी दृश्यों का विस्तार
- चित्रों में कठोरता और औपचारिकता आई
शाहजहाँ काल के प्रमुख चित्रकार

| चित्रकार | विशेषता | कृति |
| मुहम्मद फकीर उल्लाह | दरबारी चित्रण | बादशाहनामा के चित्र |
| चित्रमन | व्यक्ति-चित्रण | शाहजहाँनामा |
| अनूप छित्र | फूल-पत्ती चित्रण | विभिन्न पांडुलिपियाँ |
शाहजहाँ के काल की महत्वपूर्ण कृति ‘बादशाहनामा’ है जिसमें शाहजहाँ के शासनकाल के दृश्य चित्रित हैं। यह Windsor Royal Collection, इंग्लैंड में सुरक्षित है।
दाराशिकोह और औरंगजेब काल — पतन की ओर
दाराशिकोह — कला के संरक्षक
शाहजहाँ के बड़े पुत्र दाराशिकोह कला और संस्कृति के महान संरक्षक थे। उन्होंने संस्कृत ग्रंथों के फारसी अनुवाद करवाए और उनके सचित्र संस्करण तैयार करवाए। ‘मजमा-उल-बहरैन’ (दो समुद्रों का संगम) उनकी प्रसिद्ध कृति है जिसमें हिंदू और इस्लामी दर्शन के मिलन की बात है।
औरंगजेब काल (1658-1707) — चित्रकला का पतन
औरंगजेब कट्टर धार्मिक विचारों वाला शासक था। उसने चित्रकला को इस्लाम के विरुद्ध मानकर बंद करवा दिया। शाही चित्रशाला बंद हो गई। चित्रकार बेरोजगार हो गए और उन्हें दूसरे राज्यों — राजपूत दरबारों, पहाड़ी दरबारों और दक्कन के सुल्तानों — के पास शरण लेनी पड़ी।
यही कारण है कि औरंगजेब के काल के बाद राजपूत चित्रकला, पहाड़ी चित्रकला और दक्कनी चित्रकला का अभूतपूर्व विकास हुआ — क्योंकि इन्हें मुगल चित्रकारों की प्रतिभा मिल गई।
परवर्ती मुगल काल — अंतिम प्रयास
औरंगजेब की मृत्यु (1707) के बाद कुछ बाद के मुगल शासकों — मुहम्मद शाह ‘रंगीला’ (1719-1748) — ने चित्रकला को फिर से प्रोत्साहन दिया। इस काल में मुहम्मद शाह और श्रीनगर जैसी प्रेम-प्रसंग की पेंटिंग्स बनाई गईं। लेकिन साम्राज्य के कमजोर होने के साथ ही मुगल चित्रकला भी धीरे-धीरे समाप्त हो गई।
मुगल चित्रकला की प्रमुख विशेषताएं
तकनीकी विशेषताएं
- कागज पर बनाए गए चित्र — मुख्य रूप से पांडुलिपि चित्रण
- गोंद, अंडे की सफेदी और वनस्पति रंगों का उपयोग
- अत्यंत बारीक तूलिका का उपयोग — कभी-कभी एक बाल की तूलिका
- सोने और चाँदी की स्याही का सजावट में उपयोग
- चित्रों पर पत्थर से घिसाई (Burnishing) — चमक लाने के लिए
शैलीगत विशेषताएं
- व्यक्ति-चित्रण (Portrait) — मुगल चित्रकला की मुख्य पहचान
- प्रकृति-प्रेम — फूल, पक्षी, पशु का यथार्थ चित्रण
- दरबारी वैभव — शाही दरबार, शिकार, युद्ध के भव्य दृश्य
- आलंकारिक बॉर्डर — सुनहरी और रंगीन सीमाएं
- परिप्रेक्ष्य (Perspective) — यूरोपीय प्रभाव से
- छाया-प्रकाश (Chiaroscuro) — त्रि-आयामी प्रभाव
विषयगत विशेषताएं
- पांडुलिपि चित्रण — अकबरनामा, बाबरनामा, जहाँगीरनामा
- व्यक्ति-चित्र — सम्राटों, दरबारियों, विदेशी राजदूतों के चित्र
- शिकार दृश्य — शाही शिकार के भव्य दृश्य
- प्रकृति — पशु-पक्षी और वनस्पति
- प्रेम और रोमांस — कभी-कभी
- धार्मिक विषय — ईसाई, हिंदू और इस्लामी
मुगल और राजपूत चित्रकला — तुलनात्मक विश्लेषण
| विशेषता | मुगल चित्रकला | राजपूत चित्रकला |
| संरक्षक | मुगल सम्राट | राजपूत राजा |
| विषय | दरबार, शिकार, व्यक्ति-चित्र | धर्म, प्रेम, रागमाला, कृष्णलीला |
| रंग | मृदु, यथार्थवादी | चटख, भड़कीले |
| पाश्चात्य प्रभाव | अधिक | बहुत कम |
| आध्यात्मिकता | कम | अधिक |
| प्रकृति चित्रण | यथार्थवादी | प्रतीकात्मक |
| उत्पत्ति | फारसी + भारतीय | अपभ्रंश से |
| लघुचित्र का आकार | छोटा से बड़ा | मुख्यतः छोटा |
प्रमुख मुगल चित्र — काल, चित्रकार और माध्यम
| चित्र का नाम | काल | चित्रकार | माध्यम | विशेषता |
| हम्जानामा | 1562-77 | मीर सैयद अली | कागज, गुआश | मुगल कला की प्रथम महान कृति |
| अकबरनामा | 1590-95 | बसावन, दसवंत | कागज, रंग | अकबर के जीवन के दृश्य |
| बाबरनामा | 1589 | केसव | कागज, गुआश | बाबर की आत्मकथा के चित्र |
| रज्मनामा | 1582-86 | दसवंत व अन्य | कागज, रंग | महाभारत का फारसी अनुवाद |
| तूतीनामा | 1560-65 | अज्ञात | कागज, गुआश | तोते की कहानियाँ |
| साइबेरियाई सारस | जहाँगीर काल | मंसूर | कागज, जल रंग | प्रकृति चित्रण की उत्कृष्टता |
| बंगाल का टर्की | जहाँगीर काल | मंसूर | कागज, रंग | वैज्ञानिक सटीकता |
| बादशाहनामा | 1656-57 | भुवनदास | कागज, सोना-रंग | Windsor में सुरक्षित |
| जहाँगीर का दरबार | जहाँगीर काल | अबुल हसन | कागज, गुआश | व्यक्ति-चित्रण |
| तुज़ुक-ए-जहाँगीरी | 1620 | विभिन्न | कागज, रंग | जहाँगीर की आत्मकथा |
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य — TGT PGT UGC NET
| नीचे दिए गए तथ्य TGT Art, PGT Art, LT Grade और UGC NET Visual Arts परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। |
■ मुगल चित्रकला का आरंभ: हुमायूं काल (1555 के बाद)
■ भारत में लाए गए पहले ईरानी चित्रकार: मीर सैयद अली और ख्वाजा अब्दुस समद
■ ‘शीरीं कलम’ किसे कहा गया: ख्वाजा अब्दुस समद को
■ हम्जानामा कब बना: 1562-1577 (15 वर्ष, 1400 चित्र)
■ अकबर काल का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार: दसवंत
■ ‘नादिर-उल-असर’ उपाधि: उस्ताद मंसूर को (जहाँगीर ने दी)
■ ‘नादिर-उज़-ज़मान’ उपाधि: अबुल हसन को (जहाँगीर ने दी)
■ जहाँगीर काल: मुगल चित्रकला का चरमोत्कर्ष
■ चित्रकला बंद किसने की: औरंगजेब ने (धार्मिक कारणों से)
■ बादशाहनामा कहाँ है: Windsor Royal Collection, England
■ मुगल चित्रकला का मुख्य माध्यम: कागज पर गुआश (Gouache)
■ पाश्चात्य प्रभाव का आरंभ: अकबर काल (पुर्तगाली मिशनरियों के माध्यम से)
■ रज्मनामा क्या है: महाभारत का फारसी अनुवाद, अकबर के आदेश पर
■ Sir Thomas Roe: ब्रिटिश राजदूत, जहाँगीर के दरबार में (1615-18)
| परीक्षा टिप: जहाँगीर को ‘Portrait का सम्राट’ और उस्ताद मंसूर को ‘प्रकृति का चित्रकार’ याद करें — यह परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। |
50 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) — TGT PGT 2026
Q1. मुगल चित्रकला के संस्थापक कौन माने जाते हैं?
A) बाबर B) हुमायूं ✅ C) अकबर D) जहाँगीर
Q2. हुमायूं अपने साथ किन ईरानी चित्रकारों को भारत लाया?
A) मंसूर और अबुल हसन B) मीर सैयद अली और ख्वाजा अब्दुस समद ✅ C) दसवंत और बसावन D) बिशनदास और मुकुंद
Q3. ‘शीरीं कलम’ की उपाधि किसे दी गई?
A) मीर सैयद अली B) दसवंत C) ख्वाजा अब्दुस समद ✅ D) अबुल हसन
Q4. हम्जानामा में कुल कितने चित्र थे?
A) 400 B) 800 C) 1400 ✅ D) 2000
Q5. हम्जानामा कितने वर्षों में बना?
A) 5 वर्ष B) 10 वर्ष C) 15 वर्ष ✅ D) 20 वर्ष
Q6. अकबर काल का सर्वश्रेष्ठ चित्रकार कौन था?
A) बसावन B) दसवंत ✅ C) मंसूर D) अबुल हसन
Q7. ‘नादिर-उल-असर’ की उपाधि किसे मिली?
A) अबुल हसन B) दसवंत C) उस्ताद मंसूर ✅ D) बिशनदास
Q8. ‘नादिर-उज़-ज़मान’ की उपाधि किसे मिली?
A) मंसूर B) अबुल हसन ✅ C) दसवंत D) बसावन
Q9. रज्मनामा किसका फारसी अनुवाद है?
A) रामायण B) महाभारत ✅ C) भागवत D) वेद
Q10. जहाँगीर की आत्मकथा का नाम क्या है?
A) अकबरनामा B) बाबरनामा C) तुज़ुक-ए-जहाँगीरी ✅ D) बादशाहनामा
Q11. बादशाहनामा वर्तमान में कहाँ है?
A) नई दिल्ली B) लंदन C) Windsor Royal Collection ✅ D) पेरिस
Q12. मुगल चित्रकला का चरमोत्कर्ष किस काल में हुआ?
A) अकबर B) जहाँगीर ✅ C) शाहजहाँ D) बाबर
Q13. औरंगजेब ने चित्रकला क्यों बंद करवाई?
A) आर्थिक कारण B) धार्मिक कारण ✅ C) राजनीतिक कारण D) युद्ध के कारण
Q14. मुगल चित्रकला पर किस यूरोपीय देश का सबसे पहले प्रभाव पड़ा?
A) इंग्लैंड B) फ्रांस C) पुर्तगाल ✅ D) स्पेन
Q15. Sir Thomas Roe किस मुगल सम्राट के दरबार में आया?
A) अकबर B) जहाँगीर ✅ C) शाहजहाँ D) औरंगजेब
Q16. मुगल चित्रकला में मुख्यतः किस माध्यम का प्रयोग हुआ?
A) रेशम पर B) दीवार पर C) कागज पर गुआश ✅ D) ताड़पत्र पर
Q17. उस्ताद मंसूर ने किसका प्रसिद्ध चित्र बनाया?
A) शेर B) हाथी C) साइबेरियाई सारस ✅ D) मोर
Q18. अकबर की चित्रशाला को क्या कहते थे?
A) दीवानखाना B) किताबखाना ✅ C) खास महल D) जनानखाना
Q19. तूतीनामा में क्या है?
A) युद्ध के दृश्य B) तोते की कहानियाँ ✅ C) शिकार दृश्य D) प्रेम कथाएँ
Q20. मुगल-राजपूत चित्रकला में मुख्य अंतर क्या है?
A) रंग का B) माध्यम का C) विषय और शैली का ✅ D) आकार का
Q21. जहाँगीर के काल में पशु-पक्षी चित्रण के सर्वश्रेष्ठ चित्रकार कौन थे?
A) दसवंत B) बसावन C) उस्ताद मंसूर ✅ D) अबुल हसन
Q22. हुमायूं ने किस देश में निर्वासन बिताया?
A) अफगानिस्तान B) तुर्की C) ईरान ✅ D) अरब
Q23. मुगल चित्रकला में ‘Halo’ (प्रभामंडल) का प्रभाव किससे आया?
A) फारस B) भारत C) यूरोप ✅ D) चीन
Q24. दाराशिकोह की प्रसिद्ध कृति का नाम क्या है?
A) अकबरनामा B) मजमा-उल-बहरैन ✅ C) तुज़ुक-ए-जहाँगीरी D) रज्मनामा
Q25. मुगल काल में ‘Burnishing’ तकनीक का उपयोग किसलिए होता था?
A) रंग मिलाने के लिए B) चित्र में चमक लाने के लिए ✅ C) रेखा खींचने के लिए D) पृष्ठभूमि बनाने के लिए
Q26. मुहम्मद शाह ‘रंगीला’ किसके काल में चित्रकला का पुनरुद्धार हुआ?
A) औरंगजेब के बाद ✅ B) अकबर के बाद C) जहाँगीर के बाद D) बाबर के बाद
Q27. अकबरनामा में किसके चित्र हैं?
A) बाबर के जीवन के B) अकबर के जीवन के ✅ C) जहाँगीर के जीवन के D) शाहजहाँ के जीवन के
Q28. बिशनदास किस काल के चित्रकार थे?
A) अकबर B) जहाँगीर ✅ C) शाहजहाँ D) औरंगजेब
Q29. मुगल चित्रकला में ‘Portrait’ का सर्वाधिक विकास किस काल में हुआ?
A) बाबर B) अकबर C) जहाँगीर ✅ D) शाहजहाँ
Q30. Chiaroscuro तकनीक क्या है?
A) रंग मिलाना B) छाया-प्रकाश का प्रभाव ✅ C) रेखा खींचना D) Border बनाना
Q31. औरंगजेब के बाद कहाँ चित्रकारों को शरण मिली?
A) केवल विदेश में B) राजपूत और पहाड़ी दरबारों में ✅ C) मुगल दरबार में ही D) दक्षिण भारत में
Q32. मुगल चित्रकला में किसका प्रभाव सबसे पहले पड़ा?
A) भारतीय B) चीनी C) फारसी ✅ D) यूरोपीय
Q33. ‘खानदाने तैमूरिया’ में किसके चित्र हैं?
A) मुगल सम्राटों के B) तैमूर वंश के शासकों के ✅ C) ईरानी राजाओं के D) राजपूत राजाओं के
Q34. शाहजहाँ काल में चित्रकला में क्या बढ़ा?
A) यथार्थवाद B) आध्यात्मिकता C) अलंकारिकता ✅ D) आदिम शैली
Q35. मुगल चित्रकला और किस कला का संगम है?
A) केवल फारसी B) फारसी + भारतीय + यूरोपीय ✅ C) केवल भारतीय D) केवल यूरोपीय
Q36. तुज़ुक-ए-जहाँगीरी किसने लिखी?
A) अकबर B) जहाँगीर ✅ C) शाहजहाँ D) बाबर
Q37. बाबरनामा में किसके चित्र हैं?
A) हुमायूं के B) अकबर के C) बाबर की आत्मकथा के ✅ D) जहाँगीर के
Q38. मीर सैयद अली कहाँ से आए थे?
A) तुर्की B) ईरान ✅ C) अफगानिस्तान D) अरब
Q39. मुगल चित्रों में परिप्रेक्ष्य (Perspective) किससे प्रभावित था?
A) फारसी कला B) भारतीय कला C) यूरोपीय कला ✅ D) चीनी कला
Q40. मुगल चित्रकला का पतन किस सम्राट से शुरू हुआ?
A) शाहजहाँ B) औरंगजेब ✅ C) अकबर D) जहाँगीर
Q41. दसवंत के बारे में कौन सी बात सही है?
A) वह ईरानी था B) वह अकबर का सर्वप्रिय चित्रकार था ✅ C) वह जहाँगीर के काल का था D) वह पाश्चात्य था
Q42. मुगल चित्रकला में तूलिका किसकी बनती थी?
A) लकड़ी की B) धातु की C) पशु के बाल की — अत्यंत बारीक ✅ D) पौधे की
Q43. बसावन किस चीज में माहिर थे?
A) पशु चित्रण B) मनोविज्ञान चित्रण ✅ C) प्रकृति चित्रण D) वास्तुकला चित्रण
Q44. जहाँगीर ने कला के बारे में अपने विचार कहाँ लिखे?
A) अकबरनामा B) बादशाहनामा C) तुज़ुक-ए-जहाँगीरी ✅ D) रज्मनामा
Q45. मुगल चित्रकला में ‘Kitabkhana’ क्या था?
A) पुस्तकालय B) शाही चित्रशाला ✅ C) खजाना D) दरबार
Q46. हम्जानामा किस आकार के कागज पर बना?
A) छोटे B) मध्यम C) बड़े (68×52 सेमी) ✅ D) वर्गाकार
Q47. राजपूत चित्रकला में रंग कैसे होते हैं?
A) मृदु B) यथार्थवादी C) चटख और भड़कीले ✅ D) धुंधले
Q48. मुगल चित्रकला में सोने का उपयोग किसलिए होता था?
A) पृष्ठभूमि के लिए B) सजावट और बॉर्डर के लिए ✅ C) रेखाओं के लिए D) केवल Portrait में
Q49. बिशनदास को जहाँगीर ने किसके दरबार का चित्र बनाने भेजा था?
A) तुर्की सुल्तान का B) ईरान के शाह का ✅ C) यूरोपीय राजा का D) राजपूत राजा का
Q50. मुगल काल में किस ग्रंथ का सचित्र संस्करण सबसे पहले बना?
A) रामायण B) महाभारत C) हम्जानामा ✅ D) पंचतंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: मुगल चित्रकला का आरंभ किसने किया?
| उत्तर: मुगल चित्रकला का आरंभ हुमायूं ने किया। उन्होंने ईरान से मीर सैयद अली और ख्वाजा अब्दुस समद को भारत बुलाया और मुगल चित्रशाला की स्थापना की। |
प्रश्न 2: मुगल चित्रकला का स्वर्णिम काल कौन सा था?
| उत्तर: जहाँगीर काल (1605-1627) को मुगल चित्रकला का चरमोत्कर्ष माना जाता है। इस काल में व्यक्ति-चित्रण और प्रकृति-चित्रण उच्चतम स्तर पर पहुँचे। |
प्रश्न 3: मुगल चित्रकला में पाश्चात्य प्रभाव कैसे आया?
अकबर के काल में पुर्तगाली मिशनरी ईसाई धर्म के प्रचार के लिए आए और यूरोपीय चित्र लाए। जहाँगीर के काल में ब्रिटिश राजदूत सर थॉमस रो आए। इससे Perspective, Shading और Halo जैसे तत्व मुगल चित्रकला में आए।
प्रश्न 4: औरंगजेब के बाद मुगल चित्रकारों का क्या हुआ?
औरंगजेब ने चित्रशाला बंद कर दी। चित्रकार राजपूत दरबारों, पहाड़ी दरबारों और दक्कन के सुल्तानों के पास चले गए। इससे इन स्थानों की चित्रकला का अभूतपूर्व विकास हुआ।
प्रश्न 5: मुगल और राजपूत चित्रकला में मुख्य अंतर क्या है?
मुगल चित्रकला दरबारी, यथार्थवादी और पाश्चात्य प्रभावित है जबकि राजपूत चित्रकला धार्मिक, भावनात्मक और चटख रंगों वाली है। मुगल में व्यक्ति-चित्रण प्रमुख है, राजपूत में कृष्णलीला और रागमाला।
निष्कर्ष — मुगल चित्रकला की अमर विरासत
मुगल चित्रकला भारतीय कला के इतिहास का वह अध्याय है जो फारसी, भारतीय और यूरोपीय कला का संगम है। बाबर से लेकर मुहम्मद शाह ‘रंगीला’ तक, इस परंपरा ने भारतीय कला को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई। हम्जानामा से लेकर साइबेरियाई सारस के चित्र तक — प्रत्येक कृति एक अमर धरोहर है।
आज मुगल चित्रकला के नमूने दुनिया के प्रमुख संग्रहालयों में सुरक्षित हैं और करोड़ों रुपयों में नीलाम होते हैं। यह भारत की कला-शक्ति का प्रमाण है।
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