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The meaning of art: Detailed study material for B.Ed.
प्रस्तावना
कला मानव सभ्यता का अभिन्न अंग है। यह मानवीय भावनाओं, विचारों और अनुभवों की अभिव्यक्ति का सबसे प्राचीन और सशक्त माध्यम है। शिक्षा के क्षेत्र में कला का विशेष स्थान है क्योंकि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। B.Ed. पाठ्यक्रम में कला का अध्ययन इसलिए आवश्यक है ताकि भावी शिक्षक विद्यार्थियों में कलात्मक अभिव्यक्ति और सृजनात्मकता का विकास कर सकें।
कला का शाब्दिक अर्थ
शाब्दिक परिभाषा: संस्कृत भाषा में ‘कला’ शब्द ‘कल्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है ‘गिनना’ या ‘निश्चित करना’। हिंदी में कला का अर्थ है कौशल, निपुणता या दक्षता। अंग्रेजी में इसे ‘Art’ कहते हैं, जो लैटिन शब्द ‘Ars’ से आया है, जिसका अर्थ है कौशल या शिल्प।
व्यापक अर्थ: व्यापक संदर्भ में कला का अर्थ है मानवीय भावनाओं, विचारों और अनुभूतियों की सृजनात्मक और सौंदर्यपूर्ण अभिव्यक्ति। यह केवल चित्रकारी या संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के हर पहलू में व्याप्त है। जहाँ सौंदर्य, कल्पना, सृजनशीलता और कौशल का समावेश हो, वहाँ कला है।
कला वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपने आंतरिक संसार को बाहरी रूप देता है। यह मन की भावनाओं को दृश्य, श्रव्य या स्पर्शनीय रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया है।
विभिन्न विद्वानों द्वारा कला की परिभाषाएँ
प्लेटो (Plato)
महान यूनानी दार्शनिक प्लेटो ने कला को अनुकरण (Imitation) माना है। उनके अनुसार, कला वास्तविकता की प्रतिच्छाया है। प्लेटो का मानना था कि कलाकार प्रकृति और जीवन की नकल करता है, जो स्वयं परम सत्य की छाया है। इस प्रकार कला एक प्रकार का द्वितीयक अनुकरण है। हालांकि प्लेटो ने कला की आलोचना भी की, लेकिन उन्होंने इसके शैक्षिक महत्व को स्वीकार किया।
अरस्तू (Aristotle)
अरस्तू ने प्लेटो से भिन्न दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा कि कला केवल अनुकरण नहीं है, बल्कि यह जीवन का परिष्कृत और आदर्श रूप प्रस्तुत करती है। अरस्तू के अनुसार, कला में रेचन (Catharsis) की शक्ति होती है, जो दर्शकों या श्रोताओं की भावनाओं को शुद्ध और परिष्कृत करती है। उन्होंने कला को मानवीय अनुभूतियों की सुंदर अभिव्यक्ति माना।
लियो टॉल्सटॉय (Leo Tolstoy)
महान रूसी लेखक टॉल्सटॉय ने अपनी पुस्तक ‘What is Art?’ में कला को संप्रेषण का माध्यम बताया। उनके अनुसार, कला वह क्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपनी अनुभूत भावनाओं को दूसरों तक पहुँचाता है। सच्ची कला वह है जो सार्वभौमिक मानवीय भावनाओं को व्यक्त करती है और लोगों को एकजुट करती है।
रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore)
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कला को आत्मा की अभिव्यक्ति माना। उनका कहना था कि कला मनुष्य की आंतरिक चेतना और सौंदर्य बोध का बाह्य रूप है। टैगोर के अनुसार, कला शिक्षा का अनिवार्य अंग है और यह बच्चों में संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता और सौंदर्य बोध का विकास करती है। उन्होंने शांतिनिकेतन में कला आधारित शिक्षा को विशेष महत्व दिया।
महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)
महात्मा गांधी ने कला को जीवन और श्रम से जोड़ा। उनके अनुसार, सच्ची कला वह है जो सामाजिक उपयोगिता और नैतिक मूल्यों से युक्त हो। गांधीजी ने ‘बुनियादी शिक्षा’ में हस्तकला को विशेष स्थान दिया और कहा कि शिक्षा में कला और शिल्प का समावेश होना चाहिए। उनका मानना था कि कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल विकास का माध्यम है।
कला के प्रमुख तत्व
1. सौंदर्य (Beauty)
सौंदर्य कला का मूलभूत तत्व है। कला में सौंदर्य बोध का होना आवश्यक है। यह दृश्य, श्रव्य या भावनात्मक हो सकता है। सौंदर्य केवल बाहरी आकर्षण नहीं है, बल्कि यह आंतरिक सामंजस्य और संतुलन का भी परिचायक है। कला में रंग, रेखा, आकार, ध्वनि और शब्दों का सुंदर संयोजन सौंदर्य उत्पन्न करता है।
2. अभिव्यक्ति (Expression)
कला मानवीय भावनाओं, विचारों और अनुभूतियों की अभिव्यक्ति का माध्यम है। बिना अभिव्यक्ति के कला अधूरी है। कलाकार अपने आंतरिक जगत को कला के माध्यम से बाहरी दुनिया के साथ साझा करता है। यह अभिव्यक्ति खुशी, दुःख, क्रोध, प्रेम, करुणा या किसी भी मानवीय भावना की हो सकती है।
3. सृजनात्मकता (Creativity)
सृजनात्मकता कला की आत्मा है। कला में कुछ नया, मौलिक और अद्वितीय रचने की क्षमता होती है। यह केवल नकल नहीं है, बल्कि मौलिक चिंतन और नवीन प्रस्तुति है। सृजनात्मकता में कलाकार की व्यक्तिगत दृष्टि, कल्पनाशीलता और नवीनता का समावेश होता है।
4. कल्पना (Imagination)
कल्पना कला का प्राण है। बिना कल्पना के कला की रचना संभव नहीं है। कलाकार अपनी कल्पना शक्ति से नए विचारों, रूपों और संयोजनों को जन्म देता है। कल्पना वास्तविकता से परे जाकर नए आयाम खोजती है और कला को असीमित संभावनाओं से भर देती है।
5. भावना और संवेदनशीलता
कला में भावनात्मक गहराई और संवेदनशीलता का होना आवश्यक है। यह दर्शक या श्रोता के मन में भावनाएँ जागृत करती है और उन्हें प्रभावित करती है।
6. कौशल और तकनीक
कला के लिए कौशल और तकनीकी ज्ञान भी आवश्यक है। विचार और भावना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए माध्यम पर नियंत्रण होना चाहिए।
कला के प्रकार
ललित कला (Fine Arts)
ललित कला वह कला है जो मुख्यतः सौंदर्य और अभिव्यक्ति के लिए रची जाती है। इसमें शामिल हैं:
चित्रकला (Painting): रंगों और रेखाओं के माध्यम से भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति। विभिन्न शैलियाँ जैसे यथार्थवाद, अमूर्तवाद, प्रभाववाद आदि।
मूर्तिकला (Sculpture): त्रिआयामी रूप में कला की अभिव्यक्ति। पत्थर, मिट्टी, धातु आदि का उपयोग।
वास्तुकला (Architecture): भवन निर्माण में सौंदर्य और उपयोगिता का समावेश। मंदिर, स्मारक, आवासीय भवन आदि।
फोटोग्राफी (Photography): कैमरे के माध्यम से यथार्थ और कल्पना का सुंदर संयोजन।
प्रदर्शन कला (Performing Arts)
प्रदर्शन कला वह है जो जीवंत प्रस्तुति के माध्यम से अभिव्यक्त होती है:
संगीत (Music): स्वर, लय और ताल के माध्यम से भावनाओं की अभिव्यक्ति। शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, आधुनिक संगीत।
नृत्य (Dance): शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से कलात्मक अभिव्यक्ति। शास्त्रीय नृत्य (भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी), लोक नृत्य, समकालीन नृत्य।
नाट्य कला (Drama/Theatre): अभिनय, संवाद और प्रस्तुति के माध्यम से कहानी कहना। संस्कृत नाट्य परंपरा, आधुनिक रंगमंच।
साहित्यिक कला (Literary Arts)
शब्दों के माध्यम से कलात्मक अभिव्यक्ति:
काव्य (Poetry): छंद, लय और अलंकारों के माध्यम से भावनाओं की गहन अभिव्यक्ति।
कथा साहित्य (Fiction): कहानी, उपन्यास आदि जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत करते हैं।
नाटक (Drama): साहित्यिक रूप में नाटकीय रचना।
अनुप्रयुक्त कला (Applied Arts)
उपयोगिता और सौंदर्य का समावेश:
हस्तशिल्प (Handicrafts): मिट्टी के बर्तन, बुनाई, कढ़ाई, लकड़ी का काम आदि।
औद्योगिक डिजाइन (Industrial Design): उत्पादों की सुंदर और उपयोगी डिजाइन।
फैशन डिजाइन (Fashion Design): वस्त्रों में कलात्मकता और उपयोगिता।
शिक्षा में कला का महत्व
संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास
कला शिक्षा बच्चों के बौद्धिक, भावनात्मक, सामाजिक और शारीरिक विकास में सहायक है। यह व्यक्तित्व के सभी पहलुओं को संतुलित करती है।
सृजनात्मकता और कल्पनाशीलता का विकास
कला शिक्षा बच्चों में सृजनात्मक चिंतन और कल्पनाशीलता को बढ़ावा देती है। यह उन्हें समस्याओं के नवीन समाधान खोजने में सक्षम बनाती है।
भावनात्मक अभिव्यक्ति और मानसिक स्वास्थ्य
कला बच्चों को अपनी भावनाओं को स्वस्थ तरीके से व्यक्त करने का माध्यम देती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है।
सौंदर्य बोध का विकास
कला शिक्षा बच्चों में सौंदर्य की समझ और प्रशंसा की क्षमता विकसित करती है। यह उन्हें जीवन में सुंदरता देखने और सृजन करने के लिए प्रेरित करती है।
सांस्कृतिक चेतना और मूल्यों का संरक्षण
कला के माध्यम से बच्चे अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ते हैं और पारंपरिक मूल्यों को समझते हैं। यह सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है।
सामाजिक कौशल और सहयोग
सामूहिक कला गतिविधियाँ बच्चों में टीम वर्क, सहयोग और सामाजिक संवाद की क्षमता विकसित करती हैं।
आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान
कला में सफलता बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाती है और उन्हें अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना सिखाती है।
संज्ञानात्मक विकास
कला शिक्षा बच्चों की अवलोकन शक्ति, एकाग्रता, स्मृति और समस्या समाधान कौशल को बढ़ाती है।
मोटर कौशल का विकास
चित्रकारी, मूर्तिकला और अन्य कला गतिविधियाँ बच्चों के सूक्ष्म और स्थूल मोटर कौशल को विकसित करती हैं।
कला शिक्षण के उद्देश्य
सौंदर्यात्मक उद्देश्य
- विद्यार्थियों में सौंदर्य बोध और प्रशंसा की क्षमता विकसित करना
- कला के विभिन्न रूपों की समझ विकसित करना
- प्राकृतिक और कृत्रिम सौंदर्य के प्रति संवेदनशीलता जागृत करना
अभिव्यक्तिपरक उद्देश्य
- विद्यार्थियों को अपने विचारों और भावनाओं को कलात्मक रूप से व्यक्त करने में सक्षम बनाना
- आत्म-अभिव्यक्ति के लिए विभिन्न कला माध्यमों का उपयोग करना सिखाना
- व्यक्तिगत कलात्मक शैली विकसित करने में सहायता करना
कौशल विकास उद्देश्य
- कला की विभिन्न तकनीकों और माध्यमों में दक्षता विकसित करना
- हाथ और आँख के समन्वय को बढ़ाना
- उपकरणों और सामग्री के उचित उपयोग की क्षमता विकसित करना
सृजनात्मक उद्देश्य
- मौलिक और नवीन विचारों को प्रोत्साहित करना
- समस्या समाधान में सृजनात्मक दृष्टिकोण विकसित करना
- कल्पनाशीलता और नवोन्मेष को बढ़ावा देना
सामाजिक-सांस्कृतिक उद्देश्य
- भारतीय कला और संस्कृति की समझ विकसित करना
- विभिन्न कला परंपराओं और शैलियों का ज्ञान देना
- सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान और सराहना की भावना जागृत करना
मनोवैज्ञानिक उद्देश्य
- भावनात्मक स्थिरता और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना
- आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान में वृद्धि करना
- तनाव और चिंता को कम करने में सहायता करना
व्यावसायिक उद्देश्य
- कला संबंधी व्यवसायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना
- व्यावसायिक कौशल विकसित करने में सहायता करना
- आजीविका के साधन के रूप में कला की संभावनाओं से परिचित कराना
B.Ed. के लिए कला का महत्व
शिक्षक प्रशिक्षण में कला का स्थान
B.Ed. पाठ्यक्रम में कला का अध्ययन भावी शिक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उन्हें विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कला आधारित शिक्षण विधियों से परिचित कराता है।
कला समेकित शिक्षण (Art Integrated Learning)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में कला समेकित शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है। B.Ed. में प्रशिक्षु शिक्षक विभिन्न विषयों को कला के साथ जोड़कर पढ़ाने की विधियाँ सीखते हैं। उदाहरण के लिए, इतिहास को नाटक के माध्यम से, गणित को चित्रकला के माध्यम से, या विज्ञान को मॉडल बनाकर पढ़ाना।
समावेशी शिक्षा में कला की भूमिका
कला सभी प्रकार के विद्यार्थियों, विशेष रूप से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है। B.Ed. में यह सिखाया जाता है कि कला के माध्यम से समावेशी कक्षा कक्ष कैसे बनाया जाए।
शिक्षण विधियों में विविधता
कला आधारित शिक्षण विधियाँ कक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बनाती हैं। B.Ed. में शिक्षक विभिन्न कला माध्यमों का उपयोग करके शिक्षण को आकर्षक बनाना सीखते हैं।
मूल्यांकन के वैकल्पिक तरीके
कला के माध्यम से विद्यार्थियों का मूल्यांकन करने के नए और प्रभावी तरीके B.Ed. में सिखाए जाते हैं, जो पारंपरिक परीक्षाओं से परे जाते हैं।
कक्षा प्रबंधन और अनुशासन
कला गतिविधियाँ बच्चों को व्यस्त और केंद्रित रखती हैं, जिससे कक्षा प्रबंधन आसान हो जाता है। B.Ed. में यह सिखाया जाता है कि कला को कक्षा अनुशासन के सकारात्मक साधन के रूप में कैसे उपयोग किया जाए।
पाठ्यक्रम विकास में कला
B.Ed. में प्रशिक्षु शिक्षक कला समेकित पाठ्यक्रम विकसित करना सीखते हैं, जो राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
शोध और नवाचार
B.Ed. में कला शिक्षण के क्षेत्र में शोध और नवीन प्रयोगों को प्रोत्साहित किया जाता है। प्रशिक्षु शिक्षक कला आधारित शैक्षिक प्रयोगों का अध्ययन और क्रियान्वयन करते हैं।
व्यावसायिक विकास
B.Ed. में कला का अध्ययन शिक्षकों के व्यावसायिक विकास में योगदान देता है। यह उन्हें 21वीं सदी के कौशलों से युक्त बनाता है और शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप
NEP 2020 में कला और संगीत को शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। B.Ed. में यह सुनिश्चित किया जाता है कि भावी शिक्षक इस दृष्टिकोण को कार्यान्वित करने में सक्षम हों।
निष्कर्ष
कला मानव जीवन और शिक्षा का अभिन्न अंग है। यह केवल मनोरंजन या सौंदर्य का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षा में कला का समावेश विद्यार्थियों को संपूर्ण, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक बनाने में सहायक है।
B.Ed. पाठ्यक्रम में कला का अध्ययन भावी शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि कैसे कला के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावी, समावेशी और आनंददायक बनाया जा सकता है। जैसा कि प्लेटो, अरस्तू, टैगोर और गांधी जैसे महान विचारकों ने कहा है, कला जीवन को समृद्ध करती है और मानवीय मूल्यों की स्थापना करती है।
21वीं सदी में, जब शिक्षा में नवाचार और सृजनात्मकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, कला शिक्षा का महत्व और भी बढ़ गया है। B.Ed. करने वाले शिक्षकों को कला की इस शक्ति को पहचानना और अपने शिक्षण में समाविष्ट करना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य की पीढ़ी को संपूर्ण और सृजनशील नागरिक बना सकें।
कला केवल एक विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है, और शिक्षा में इसका स्थान सर्वोपरि है।












