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जोगेन चौधरी | Jogen Chaudhary

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जोगेन चौधरी का जन्म पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के फरीदपुर नामक गाँव में 19 फरवरी 1939 ई० को एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। उनकी कला-सम्बन्धी शिक्षा कालेज आफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स कलकत्ता में हुई।  ⏰ जून 2026 से पहले LT Grade Art की तैयारी पूरी करें! हजारों छात्र पहले ही तैयारी शुरू कर चुके ...

जोगेन चौधरी का जन्म पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के फरीदपुर नामक गाँव में 19 फरवरी 1939 ई० को एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। उनकी कला-सम्बन्धी शिक्षा कालेज आफ आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स कलकत्ता में हुई। 

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इसी अवधि में कलकत्ता में रहने के परिणाम स्वरूप कलकत्ता महानगर के विभिन्न पक्षों से उनका साक्षात्कार हुआ। 1960 में जोगने ने वहाँ से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1965 से 1967 तक वे एक छात्रवृत्ति पर फ्रांस गये। 

वहाँ से लौटकर वे अपनी मौलिक शैली के विकास के प्रयत्न में लग गये आरम्भ में अपने चित्रों में वे ग्राम्य जीवन तथा कलकत्ता के विभिन्न पक्षों को चित्रित करते थे। 

उसके पश्चात् उनकी शैली में परिवर्तन आरम्भ हुआ। वे मछली, तितली, साँप आदि को व्यंजक रूपों में चित्रित करने लगे। 

वनस्पतियों को उन्होंने कहीं प्रफुल्ल और पंपल दिखाया है तो कहीं अध-सूखी, निचुडी हुई अथवा मुरझाई हुई तथा उदास स्थितियों में चित्रित किया है। 

उन्होंने गणेश के भी अनेक चित्र बनाये हैं जिनमें उन्हें दुबला-पतला दिखाया गया है और व्यंग्यात्मक पद्धति का सहारा लिया गया है। 

नारी आकृतियों के द्वारा जीवन के अन्तरंग अनुभवों को चित्रित किया है वे मांसल, सुन्दर, ऐन्द्रिय और शक्तिमती होने के साथ-साथ दुःखी भी चित्रित हुई हैं जोगेन का प्रकृति से भी घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है अतः उनके चित्रों में किसी स्त्री-पुरुष की आकृति में हाथ-पैर किसी लता की भाँति भी लग सकते हैं और अंगों के उभार फलों की भाँति भी।

जोगेन प्रायः कागज पर चित्र रचना के लिये स्याही तथा मोमी रंगों का प्रयोग करते हैं तथा कभी-कभी अन्य रंग भी प्रयोग में लाते हैं। 

तैल माध्यम में उन्होंने बहुत कम चित्रण किया है। वे एक स्वप्न के समान संसार के चित्र बनाते हैं जिसकी आकृतियाँ कभी बीभत्स और कभी सुन्दर प्रतीत होती हैं किन्तु ये अतियथार्थवादी कलाकार नहीं हैं। 

समकालीन परिवेश में आदमी के चेहरे बदल जाने की भयावह स्थिति को उन्होंने बड़ी मार्मिकता से अंकित किया है किन्तु फिर भी वे मनुष्य में कुछ अच्छाई का चित्रण करते हैं। 

वे जन सामान्य अथवा विशिष्ट जन, सभी आकृतियों को बहुत सवेदनशीलता से चित्रित करते हैं। देश-विदेश में उनकी अनेक प्रदर्शनियाँ हो चुकी हैं तथा उन्हें अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं। 

बाल खोले स्त्री, नटी विनोदिनी, तथा चांदनी रात में चीता आदि उनके प्रसिद्धे चित्र हैं। आजकल वे नई दिल्ली में “आर्ट टुडे” के सह-सम्पादक हैं तथा राष्ट्रपति भवन के चित्र-संग्रह के क्यूरेटर हैं।

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