अजंता गुफ़ा चित्रकला

अजंता गुफ़ा चित्रकला

अजंता चित्रकला

महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में सह्याद्रि की पहाड़ियों में स्थित अजंता में कुल 30 गुफाएँ हैं।

घोड़े की नाल के आकार (अर्द्धवृत्ताकार) की ये गुफाएँ वगुर्ना नदी घाटी के बाएँ छोर पर एक आग्नेय चट्टान को काटकर बनाई गई हैं, जिसके निष्पादन में 8 शताब्दियों का समय (2nd Cent. B.C to 7th Cent. A.D) लगा।

गुफाओं की दीवारों (भित्ति) तथा छतों पर बनाए गए चित्रों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण चित्र जातक कथाओं (बुद्ध) से जुड़ा हुआ है।

अजंता की गुफा संख्या 9 और 10 में प्राचीनतम चित्रकलाएँ हैं जिनकी समानता अमरावती की मूर्तिकला और सातवाहन काल (2nd B.C) की मानव आकृतियों की वेशभूषा, आभूषणों तथा जातीय विशेषताओं से है।

गुफा संख्या 16&17 के चित्र पाँचवी सदी के दौरान बने हैं, इनमें आंध्र और वाकाटक शासकों की चर्चा भी है।

16वीं गुफा में सर्वश्रेष्ठ चित्र मरणासन्न राजकुमारी तथा महात्मा बुद्ध के उपदेश का है।

गुफा संख्या 1, 2 और 5 के चित्र पाँचवी सदी से छठी सदी में यानी सबसे बाद में बने।

इन गुफाओं (1, 2, 5) में अत्यधिक अलंकरण और आभूषणीय अभिकल्पों के साथ जातक की कहानियों को चित्रित किया गया है।

गुफा संख्या एक में पद्मपाणि अवलोकितेश्वर, मार-विजय तथा चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय और ईरान के ससानी साम्राज्य के बादशाह खुसरो द्वितीय के साथ दूतों के आदान-प्रदान का चित्र भी है।

अजंता की चित्रकला में रेखाओं के ज़रिये गहरे-चमकदार गुलाबी, भूरे, सिन्दूरी, हरे आदि रंगों से ऐसा चित्र बनाया गया है, जिसकी चमक हज़ारों साल बाद भी शेष है।

अजंता के चित्रों की एक खास विशेषता इसके पात्रों का स्वभाव चित्रण है।

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