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भूमिका
कला मानव सभ्यता की आत्मा है। जब मनुष्य ने बोलना, सोचना और महसूस करना सीखा, तभी से कला का जन्म हुआ। कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव की भावनाओं, विचारों, अनुभवों और सौंदर्य-बोध की सशक्त अभिव्यक्ति है। मानव जीवन के हर क्षेत्र—धर्म, संस्कृति, समाज और शिक्षा—में कला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कला का शाब्दिक अर्थ
‘कला’ शब्द संस्कृत भाषा की ‘कल्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है—
- सुंदर बनाना
- सजाना
- रचना करना
अतः शाब्दिक रूप से कला वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा किसी वस्तु, विचार या भावना को सौंदर्यपूर्ण रूप प्रदान किया जाता है।
कला का व्यापक अर्थ
कला मानव की सृजनात्मक शक्ति की अभिव्यक्ति है। यह वह माध्यम है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने मन के भावों, कल्पनाओं और अनुभूतियों को रेखा, रंग, रूप, ध्वनि और गति के माध्यम से व्यक्त करता है।
कला केवल आँखों से देखने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह मन और आत्मा को भी स्पर्श करती है।
कला की परिभाषाएँ (Definitions of Art)
1. प्लेटो के अनुसार
“कला प्रकृति की अनुकृति है।”
प्लेटो के अनुसार कला प्रकृति की नकल है, जिसमें कलाकार प्राकृतिक सौंदर्य को अपने ढंग से प्रस्तुत करता है।
2. अरस्तू के अनुसार
“कला प्रकृति का अनुकरण है, परंतु उसमें सुधार और चयन निहित होता है।”
अरस्तू ने कला को सृजनात्मक और चयनात्मक प्रक्रिया माना।
3. टॉल्सटॉय के अनुसार
“कला वह है, जिसके माध्यम से कलाकार अपनी अनुभूत भावनाओं को दूसरों तक पहुँचाता है।”
यह परिभाषा कला के भावात्मक पक्ष को उजागर करती है।
4. भारतीय दृष्टिकोण से कला
भारतीय चिंतन में कला को सत्यं, शिवं और सुंदरम् से जोड़ा गया है।
कला केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति का माध्यम भी है।
कला के प्रमुख तत्व
- सृजनशीलता (Creativity)
- सौंदर्य-बोध (Aesthetic Sense)
- भाव अभिव्यक्ति (Expression of Emotions)
- कौशल एवं तकनीक (Skill & Technique)
- अनुभूति एवं संवेदना (Experience & Sensitivity)
इन तत्वों के बिना कला अधूरी मानी जाती है।
कला के प्रकार
1. ललित कला (Fine Arts)
- चित्रकला
- मूर्तिकला
- स्थापत्य कला
2. प्रदर्शन कला (Performing Arts)
- नृत्य
- संगीत
- नाटक
3. उपयोगी कला (Applied Arts)
- डिजाइन
- हस्तशिल्प
- सजावटी कला
कला का सामाजिक महत्व
- कला समाज की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाती है।
- यह सामाजिक मूल्यों और विचारों का दर्पण होती है।
- कला समाज को संवेदनशील और जागरूक बनाती है।
कला का शैक्षिक महत्व
- कला रचनात्मक सोच को विकसित करती है।
- बच्चों में आत्मविश्वास और कल्पनाशक्ति बढ़ाती है।
- नैतिक और सौंदर्यबोध का विकास करती है।
कला और जीवन
कला और जीवन एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।
जीवन में उत्सव, शोक, प्रेम, संघर्ष—हर स्थिति में कला किसी न किसी रूप में उपस्थित रहती है।
घर की सजावट से लेकर मंदिर की मूर्ति तक, संगीत से लेकर चित्रकला तक—कला हर जगह है।
निष्कर्ष
कला का अर्थ केवल सुंदर वस्तु बनाना नहीं है, बल्कि यह मानव की आत्मा की अभिव्यक्ति है।
कला जीवन को अर्थ, सौंदर्य और संवेदना प्रदान करती है।
बिना कला के जीवन नीरस और यांत्रिक हो जाता है।
परीक्षा में लिखने योग्य निष्कर्ष पंक्ति
“कला मानव की सृजनात्मक शक्ति और भावनात्मक अभिव्यक्ति का सौंदर्यपूर्ण माध्यम है, जो जीवन को सार्थक और संवेदनशील बनाती है।”












