कंदरिया महादेव मंदिर खजुराहो का सबसे बड़ा व प्रसिद्ध मंदिर। 872 मूर्तियां, 31 मीटर ऊंचाई, नागर वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण। संपूर्ण जानकारी, FAQs और MCQs।कंदरिया महादेव मंदिर: भारतीय मंदिर वास्तुकला का अद्वितीय रत्न | Kandariya Mahadev Temple: A Unique Gem of Indian Temple Architecture
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प्रस्तावना
कंदरिया महादेव मंदिर मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित भारतीय मंदिर वास्तुकला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। यह मंदिर न केवल अपनी भव्यता और विशालता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अद्वितीय शिल्पकला, जटिल मूर्तियों और वास्तुशिल्प की उत्कृष्टता के लिए भी विश्व भर में जाना जाता है। चंदेल राजवंश द्वारा निर्मित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और खजुराहो के मंदिर समूह में सबसे बड़ा और सबसे अलंकृत मंदिर माना जाता है।
1. सामान्य जानकारी और इतिहास

स्थान और भौगोलिक स्थिति
कंदरिया महादेव मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खजुराहो नगर में स्थित है। यह मंदिर खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह का हिस्सा है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध है। मंदिर का स्थान विंध्य पर्वत श्रृंखला के निकट है, जो इसे प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करता है।
निर्माणकर्ता और राजवंश
इस भव्य मंदिर का निर्माण चंदेल राजवंश के महाराजा विद्याधर (धंग) ने करवाया था। चंदेल राजवंश 9वीं से 13वीं शताब्दी तक मध्य भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र में शासन करता था। यह राजवंश कला, संस्कृति और धर्म का महान संरक्षक था।
निर्माण काल
कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण लगभग 1025-1050 ई. के बीच हुआ था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, इसका निर्माण 1030 ई. में पूर्ण हुआ था। यह चंदेल वास्तुकला के स्वर्णिम युग का प्रतिनिधित्व करता है।
नामकरण का इतिहास
“कंदरिया” शब्द संस्कृत के “कंदर” से आया है, जिसका अर्थ है “गुफा”। भगवान शिव को “कंदरिया” या “गुफा निवासी” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि वे हिमालय की गुफाओं में तपस्या करते थे। इसलिए यह मंदिर “कंदरिया महादेव” अर्थात “गुफा के महान देवता” को समर्पित है।
ऐतिहासिक महत्व
यह मंदिर चंदेल राजवंश की समृद्धि, कला के प्रति समर्पण और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है। मध्यकालीन भारत में यह मंदिर न केवल धार्मिक केंद्र था, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण स्थल था।
2. वास्तुकला – आयाम और संरचना

समग्र आयाम
कंदरिया महादेव मंदिर की कुल ऊंचाई लगभग 31 मीटर (102 फीट) है, जो इसे खजुराहो का सबसे ऊंचा मंदिर बनाती है। मंदिर की लंबाई लगभग 109 फीट और चौड़ाई लगभग 60 फीट है। मंदिर का आधार (जगती) लगभग 4 मीटर ऊंचा है।
वास्तुशिल्प शैली
यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। नागर शैली उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की पारंपरिक शैली है, जिसमें शिखर (टॉवर) प्रमुख विशेषता होता है। कंदरिया महादेव मंदिर में पंचायतन शैली का प्रयोग किया गया है, जिसमें मुख्य मंदिर के चारों कोनों पर चार छोटे मंदिर होते हैं।
मंदिर के प्रमुख विभाग
मंदिर की संरचना को निम्नलिखित पांच मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है:
- अर्धमंडप (प्रवेश कक्ष): यह मंदिर का प्रवेश द्वार है, जहां भक्त सबसे पहले प्रवेश करते हैं।
- मंडप (सभा कक्ष): यह एक बड़ा हॉल है जहां भक्त एकत्रित होते हैं और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
- महामंडप (मुख्य सभा कक्ष): यह मंडप से भी बड़ा और अधिक अलंकृत कक्ष है।
- अंतराल (वेस्टिबुल): यह गर्भगृह से पहले का संक्रमण कक्ष है।
- गर्भगृह (पवित्रतम कक्ष): यहां मुख्य शिवलिंग स्थापित है।
शिखर की संरचना
मंदिर का शिखर विमान शैली में निर्मित है, जो कई छोटे शिखरों (उरुश्रृंग) से घिरा हुआ है। मुख्य शिखर 84 छोटे शिखरों से सजा है, जो पर्वत शिखरों की श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह डिजाइन भू-लैंडस्केप सिद्धांत का अनुसरण करता है, जो हिमालय पर्वत के कैलाश पर्वत की अवधारणा को दर्शाता है।
जगती (आधार मंच)
मंदिर एक विशाल जगती पर निर्मित है, जो लगभग 4 मीटर ऊंची है। यह आधार न केवल मंदिर को ऊंचाई प्रदान करता है बल्कि इसे बाढ़ और नमी से भी बचाता है। जगती पर जटिल नक्काशी और छोटी मूर्तियां उकेरी गई हैं।
निर्माण सामग्री
मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थर से किया गया है, जो हल्के गुलाबी और बेज रंग का है। यह पत्थर स्थानीय खानों से प्राप्त किया गया था। पत्थरों को बिना किसी मोर्टार या सीमेंट के इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़ा गया है।
ज्यामितीय संतुलन
मंदिर की संरचना में स्वर्णिम अनुपात और वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों का सटीक अनुपालन किया गया है। प्रत्येक भाग का आकार और स्थान गणितीय रूप से निर्धारित है, जो संपूर्ण संरचना में सामंजस्य और संतुलन उत्पन्न करता है।
3. गर्भगृह और शिवलिंग
गर्भगृह की संरचना
गर्भगृह मंदिर का सबसे पवित्र और केंद्रीय भाग है। यह एक छोटा, अंधेरा कक्ष है जो आध्यात्मिक गहराई और ध्यान के लिए उपयुक्त है। गर्भगृह का आकार लगभग 2.4 मीटर गुणा 2.4 मीटर है, जो अंतरंगता और एकाग्रता की भावना उत्पन्न करता है।
गर्भगृह की दीवारें सादी हैं, लेकिन द्वार अत्यंत अलंकृत है। द्वार पर शिव के विभिन्न रूपों, गणेश, नदी देवियों (गंगा और यमुना) और द्वारपालों की मूर्तियां उकेरी गई हैं।
शिवलिंग की विशेषताएं
गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग लगभग 1 मीटर ऊंचा है। यह स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है, जो काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है। शिवलिंग के तीन भाग हैं:
- ब्रह्मभाग (निचला भाग): यह चौकोर आधार है जो ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करता है।
- विष्णुभाग (मध्य भाग): यह अष्टकोणीय भाग विष्णु का प्रतिनिधित्व करता है।
- रुद्रभाग (ऊपरी भाग): यह गोलाकार भाग शिव का प्रतिनिधित्व करता है और पूजा के लिए दृश्यमान होता है।
शिवलिंग के चारों ओर एक योनिपीठ है, जो देवी शक्ति का प्रतीक है और जीवन के स्रोत को दर्शाता है।
गर्भगृह की प्रकाश व्यवस्था
गर्भगृह में प्राकृतिक प्रकाश बहुत कम आता है, जो रहस्य और आध्यात्मिकता की भावना उत्पन्न करता है। केवल द्वार से आने वाली धुंधली रोशनी ही शिवलिंग को प्रकाशित करती है। यह डिजाइन भक्तों को अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा का प्रतीकात्मक अनुभव प्रदान करता है।
परिक्रमा पथ
गर्भगृह के चारों ओर एक संकीर्ण प्रदक्षिणा पथ है, जो भक्तों को शिवलिंग की परिक्रमा करने की अनुमति देता है। यह पथ भी अलंकृत स्तंभों और मूर्तियों से सजा है।
4. मंडप और छत
मंडप की संरचना
कंदरिया महादेव मंदिर में तीन मुख्य मंडप हैं – अर्धमंडप, मंडप और महामंडप। प्रत्येक मंडप पिछले से बड़ा और ऊंचा है, जो एक क्रमिक ऊर्ध्वाधर प्रगति का निर्माण करता है।
महामंडप सबसे विशाल और प्रभावशाली है, जहां लगभग 100-150 लोग एक साथ इकट्ठा हो सकते हैं। इसकी छत लगभग 20 फीट ऊंची है।
स्तंभ कला
मंडपों में कुल 64 स्तंभ हैं, जो अष्टकोणीय और अलंकृत हैं। प्रत्येक स्तंभ पर निम्नलिखित तत्व उकेरे गए हैं:
- कमल की पंखुड़ियां: स्तंभ के आधार पर
- घंटियां और मालाएं: मध्य भाग में
- मूर्तियां: देवी-देवताओं, अप्सराओं और पौराणिक दृश्यों की
- ज्यामितीय पैटर्न: पूरे स्तंभ पर
स्तंभ एक दूसरे के समान नहीं हैं; प्रत्येक में अद्वितीय डिजाइन और मूर्तियां हैं।
छत का अलंकरण
मंडपों की छत गोलाकार और त्रिकोणीय पैटर्न से सजी है। छत पर निम्नलिखित चित्रण हैं:
- कमल के फूल: केंद्रीय छत में विशाल कमल के फूल का डिजाइन
- ज्यामितीय मंडल: जटिल गणितीय पैटर्न
- छोटी मूर्तियां: देवताओं, गंधर्वों और किन्नरों की
- फूल और बेलें: प्राकृतिक सजावट
छत की नक्काशी इतनी जटिल है कि इसे देखने के लिए विशेष रोशनी की आवश्यकता होती है।
प्रकाश व्यवस्था का वास्तुशिल्प
मंडपों में प्राकृतिक प्रकाश की व्यवस्था बहुत सोच-समझकर की गई है। बड़ी खिड़कियां (जालीदार पत्थर की) और द्वार दिन के अलग-अलग समय पर विभिन्न प्रकार की रोशनी प्रदान करते हैं।
सुबह की सूर्य की किरणें पूर्वी खिड़कियों से आकर मूर्तियों पर पड़ती हैं, जो उन्हें जीवंत बना देती हैं। दोपहर में मंडप समान रूप से प्रकाशित होता है, जबकि शाम को पश्चिमी प्रकाश एक नाटकीय प्रभाव उत्पन्न करता है।
ध्वनि विज्ञान
मंडपों की संरचना में उत्कृष्ट ध्वनि विज्ञान का प्रयोग किया गया है। गर्भगृह में उच्चारित मंत्र मंडप के सभी कोनों में स्पष्ट सुनाई देते हैं। छत का गुंबद आकार ध्वनि को प्रवर्धित करता है और समान रूप से वितरित करता है।
5. मूर्तिकला – संख्या और विषय
मूर्तियों की संख्या और वितरण
कंदरिया महादेव मंदिर में लगभग 872 मूर्तियां हैं, जो इसे खजुराहो का सबसे अधिक मूर्तियों वाला मंदिर बनाती है। इन मूर्तियों का वितरण निम्नानुसार है:
- बाहरी दीवारों पर: लगभग 646 मूर्तियां
- आंतरिक दीवारों और स्तंभों पर: लगभग 226 मूर्तियां
- छत पर: लगभग 100 छोटी मूर्तियां
मूर्तियां तीन क्षैतिज पट्टियों (बैंड) में व्यवस्थित हैं, जो मंदिर की पूरी परिधि में चलती हैं।
मूर्तिकला की तकनीक
कंदरिया महादेव की मूर्तियां उत्कीर्णन (Carving) की उच्चतम तकनीक का प्रदर्शन करती हैं। शिल्पकारों ने निम्नलिखित तकनीकों का प्रयोग किया:
- उच्च राहत (High Relief): मूर्तियां पत्थर से लगभग 60-70% बाहर निकली हुई
- गहरी नक्काशी: छाया और गहराई के प्रभाव के लिए
- ड्रिल तकनीक: जटिल विवरण जैसे आभूषण, बाल और वस्त्र के लिए
- पॉलिशिंग: मूर्तियों को चिकना और चमकदार बनाने के लिए
मूर्तियों में त्रिभंग (तीन बेंड) मुद्रा का व्यापक उपयोग है, जो गति और जीवंतता प्रदान करता है।
मूर्तिकला के मुख्य विषय
कंदरिया महादेव की मूर्तियों में निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
1. धार्मिक और पौराणिक विषय (60%)
- शिव के विभिन्न रूप (नटराज, अर्धनारीश्वर, शिव-पार्वती)
- विष्णु के अवतार (वराह, नरसिंह, वामन)
- ब्रह्मा, सरस्वती, लक्ष्मी
- गणेश, कार्तिकेय
- दिक्पाल (दिशाओं के रक्षक)
- नदी देवियां (गंगा, यमुना)
2. अप्सराएं और सुरसुंदरियां (25%)
- विभिन्न मुद्राओं में नृत्य करती अप्सराएं
- श्रृंगार करती नायिकाएं
- संगीत वादन करती महिलाएं
3. मिथुन मूर्तियां (10%)
- प्रेमी युगल विभिन्न मुद्राओं में
- कामसूत्र के दृश्य
4. सामाजिक जीवन (3%)
- सैनिक, योद्धा
- शिकारी और पशु
- दैनिक जीवन के दृश्य
5. पशु और पौराणिक प्राणी (2%)
- हाथी, सिंह, मयूर
- नाग, गरुड़, मकर
मूर्तिकला की कलात्मक विशेषताएं
कंदरिया महादेव की मूर्तियां निम्नलिखित विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं:
- अभिव्यक्ति और भावना: चेहरों पर विभिन्न भावनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं
- शारीरिक सटीकता: मानव शरीर रचना का सटीक चित्रण
- आभूषणों का विवरण: कानों के झुमके, हार, कंगन, पायल सभी स्पष्ट रूप से उकेरे गए हैं
- वस्त्रों की बनावट: कपड़ों की सिलवटें और पारदर्शिता की भावना
- बालों की जटिलता: विभिन्न प्रकार के केश विन्यास
- गतिशीलता: नृत्य और गति की जीवंत अनुभूति
6. विशिष्ट मूर्तियां और देवी-देवता
शिव की प्रमुख मूर्तियां
कंदरिया महादेव मंदिर में शिव की कई महत्वपूर्ण मूर्तियां हैं:
1. नटराज शिव
दक्षिणी दीवार पर स्थित यह मूर्ति शिव को ब्रह्मांडीय नर्तक के रूप में दिखाती है। उनके 10 हाथ हैं, जिनमें विभिन्न शस्त्र और मुद्राएं हैं। उनके एक पैर पर नृत्य करते हुए अपस्मार (अज्ञान) को रौंदते हुए दिखाया गया है।
2. अर्धनारीश्वर
यह मूर्ति शिव और पार्वती के संयुक्त रूप को दर्शाती है – आधा पुरुष और आधा नारी। यह पुरुष और स्त्री ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक है।
3. शिव-पार्वती विवाह
पूर्वी दीवार पर यह मूर्ति शिव और पार्वती के विवाह दृश्य को दर्शाती है। ब्रह्मा पुजारी के रूप में और अन्य देवता साक्षी के रूप में उपस्थित हैं।
4. भैरव
शिव का उग्र रूप, जिसमें वे खोपड़ी की माला पहने हुए हैं।
विष्णु की मूर्तियां
1. वराह अवतार
विष्णु के सूअर अवतार की यह मूर्ति उन्हें पृथ्वी देवी को समुद्र से बचाते हुए दिखाती है।
2. नरसिंह अवतार
आधा मनुष्य और आधा सिंह के रूप में विष्णु, हिरण्यकशिपु का वध करते हुए।
3. वामन अवतार
बौने ब्राह्मण के रूप में विष्णु, राजा बलि से तीन पग भूमि मांगते हुए।
त्रिमूर्ति
उत्तरी दीवार पर एक विशेष मूर्ति में ब्रह्मा, विष्णु और महेश को एक साथ दिखाया गया है, जो सृष्टि, पालन और संहार की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दिक्पाल (दिशाओं के रक्षक)
मंदिर की आठ दिशाओं में आठ दिक्पालों की मूर्तियां हैं:
- इंद्र (पूर्व) – ऐरावत हाथी पर
- अग्नि (दक्षिण-पूर्व) – मेष पर
- यम (दक्षिण) – भैंसे पर
- निरुति (दक्षिण-पश्चिम) – असुर रूप में
- वरुण (पश्चिम) – मकर पर
- वायु (उत्तर-पश्चिम) – हिरण पर
- कुबेर (उत्तर) – मनुष्य पर
- ईशान (उत्तर-पूर्व) – वृषभ पर
गणेश और कार्तिकेय
प्रवेश द्वार के दोनों ओर गणेश और कार्तिकेय की सुंदर मूर्तियां हैं। गणेश को मोदक (लड्डू) धारण करते हुए और कार्तिकेय को मोर पर सवार दिखाया गया है।
नदी देवियां
गर्भगृह के द्वार पर गंगा और यमुना की प्रसिद्ध मूर्तियां हैं:
- गंगा: मकर (मगरमच्छ) पर खड़ी
- यमुना: कछुआ पर खड़ी
दोनों देवियां अपने वाहनों के साथ त्रिभंग मुद्रा में हैं और विभिन्न आभूषणों से सजी हैं।
7. अप्सराएं और सुरसुंदरियां
नायिका मूर्तियों का महत्व
कंदरिया महादेव मंदिर में लगभग 220 अप्सरा और सुरसुंदरी (खूबसूरत स्त्री) मूर्तियां हैं। ये मूर्तियां भारतीय मूर्तिकला की सर्वोच्च उपलब्धि मानी जाती हैं।
विभिन्न मुद्राएं और गतिविधियां
अप्सराओं को विभिन्न दैनिक और कलात्मक गतिविधियों में दर्शाया गया है:
1. श्रृंगार दृश्य (30%)
- दर्पण देखती नायिका: अपनी सुंदरता की प्रशंसा करती
- काजल लगाती हुई: आंखों में काजल लगाने की क्रिया
- बाल सजाती हुई: जटिल केश विन्यास बनाती
- आभूषण पहनती हुई: कानों में झुमके या गले में हार
- वस्त्र बदलती हुई: साड़ी या अन्य वस्त्र पहनने की प्रक्रिया
2. नृत्य मुद्राएं (25%)
- ताण्डव नृत्य: ऊर्जावान, शक्तिशाली नृत्य
- लास्य नृत्य: कोमल, सुंदर नृत्य
- त्रिभंग मुद्रा: तीन बेंड वाली स्थिति
- चौकी मुद्रा: वर्गाकार स्थिर मुद्रा
3. संगीत और कला (15%)
- वीणा बजाती हुई
- मृदंग या ढोलक बजाती हुई
- बांसुरी बजाती हुई
- नृत्य करते समय घुंघरू बजाती हुई
4. दैनिक जीवन (20%)
- पत्र लिखती या पढ़ती हुई
- फूल तोड़ती हुई
- पानी में स्नान करती हुई
- तोता या मोर के साथ खेलती हुई
- बच्चे के साथ
5. प्रेम और रोमांस (10%)
- नायक की प्रतीक्षा करती हुई
- शर्मीली मुद्रा में
- प्रेमी के साथ
आभूषण और अलंकार
अप्सराओं की मूर्तियों में विस्तृत आभूषणों का चित्रण है:
- मुकुट और केश आभूषण: विभिन्न प्रकार की मुकुट शैलियां
- कर्णफूल: बड़े, भारी झुमके
- हार: कई परतों के हार, कुछ बहुत लंबे (कंठमाला, हारमाला)
- बाजूबंद: ऊपरी भुजाओं पर
- कंगन: कलाइयों पर
- कमरबंद: कमर पर जटिल डिजाइन के
- पायल और बिछुए: पैरों में
शारीरिक विशेषताएं
मूर्तियों में आदर्श स्त्री सुंदरता की विशेषताएं:
- त्रिभंग मुद्रा: S-आकार की मुद्रा जो लालित्य प्रदान करती है
- पूर्ण स्तन: उर्वरता और स्त्रीत्व का प्रतीक
- संकीर्ण कमर: आदर्श अनुपात
- व्यापक कूल्हे: स्त्रीत्व का प्रतीक
- लंबे, सुंदर बाल: विभिन्न शैलियों में
- बड़ी, अभिव्यंजक आंखें: भावनाओं को व्यक्त करती
विशिष्ट अप्सरा मूर्तियां
1. “काजल लगाती अप्सरा”
दक्षिणी दीवार पर यह मूर्ति अत्यंत प्रसिद्ध है। अप्सरा एक हाथ में दर्पण और दूसरे में काजल की डिब्बी पकड़े हुए अपनी आंखों में काजल लगा रही है। उसकी त्रिभंग मुद्रा और अभिव्यक्ति अद्वितीय है।
2. “कांटा निकालती अप्सरा”
यह मूर्ति एक युवती को अपने पैर से कांटा निकालते हुए दिखाती है। यह साधारण दैनिक क्रिया भी मूर्तिकार ने अत्यंत सुंदरता से दर्शाई है।
3. “वीणा वादिनी”
संगीत में लीन एक अप्सरा वीणा बजा रही है। उसकी अंगुलियां तारों पर और चेहरे पर संगीत की तन्मयता स्पष्ट है।
8. मिथुन मूर्तियां
मिथुन मूर्तियों का उद्देश्य और दर्शन
कंदरिया महादेव मंदिर में लगभग 90-100 मिथुन मूर्तियां (प्रेमी युगलों की मूर्तियां) हैं। ये मूर्तियां केवल कामुकता का चित्रण नहीं हैं, बल्कि गहरे धार्मिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक अर्थ रखती हैं।
धार्मिक और दार्शनिक महत्व
मिथुन मूर्तियों के कई व्याख्याएं हैं:
1. तंत्र दर्शन
तांत्रिक परंपरा में, यौन मिलन शिव (चेतना) और शक्ति (ऊर्जा) के मिलन का प्रतीक है। यह सृष्टि की मूल शक्ति को दर्शाता है।
2. जीवन का उत्सव
हिंदू दर्शन में काम (इच्छा) चार पुरुषार्थों (जीवन के लक्ष्यों) में से एक है। मिथुन मूर्तियां जीवन की प्राकृतिक इच्छाओं का स्वीकार और उत्सव हैं।
3. उर्वरता प्रतीक
ये मूर्तियां उर्वरता, समृद्धि और जीवन की निरंतरता का प्रतीक हैं। प्राचीन समय में, ये शुभ माने जाते थे।
4. बिजली से सुरक्षा
लोक मान्यता के अनुसार, ये मूर्तियां मंदिर को बिजली से बचाती हैं, क्योंकि देवताओं को ये दृश्य शर्मसार करते हैं और वे दूर रहते हैं।
5. कामसूत्र का चित्रण
ये मूर्तियां वात्स्यायन के कामसूत्र के विभिन्न आसनों और तकनीकों का चित्रण हैं, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को संरक्षित करती हैं।
स्थान और व्यवस्था
मिथुन मूर्तियां मंदिर के बाहरी दीवारों पर स्थित हैं, मुख्य रूप से:
- उत्तरी और दक्षिणी दीवारों के केंद्रीय भागों में
- प्रवेश द्वार के दोनों ओर
- जगती (आधार) के ऊपरी भाग में
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये मूर्तियां गर्भगृह के पास नहीं हैं, जो पवित्र और आध्यात्मिक रहता है।
मिथुन मूर्तियों की विशेषताएं
1. कलात्मक उत्कृष्टता
- शारीरिक रचना की सटीकता
- भावनाओं और अभिव्यक्तियों का चित्रण
- वस्त्रों और आभूषणों का विस्तृत विवरण
- संतुलित संरचना और मुद्राएं
2. विविधता
- एकल युगल (2 व्यक्ति)
- समूह दृश्य (3-4 व्यक्ति)
- विभिन्न मुद्राएं और स्थितियां
- सहायक पात्रों के साथ (सखियां, सेवक)
3. संदर्भ
कुछ मिथुन मूर्तियां स्पष्ट रूप से यौन नहीं हैं, बल्कि:
- प्रेम और स्नेह का चित्रण
- रोमांटिक क्षण
- दैवीय युगल (शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण)
समकालीन व्याख्या
आधुनिक विद्वानों के अनुसार:
- ये मूर्तियां संपूर्ण मंदिर मूर्तिकला का केवल 10% हैं
- वे मानव जीवन के संपूर्ण अनुभव का हिस्सा हैं
- वे पाखंड और झूठी नैतिकता के खिलाफ हैं
- वे प्रकृति और मानवता के साथ सामंजस्य दर्शाती हैं
9. अलंकरण और डिज़ाइन
पुष्प अलंकरण
कंदरिया महादेव मंदिर में पुष्प डिज़ाइन का व्यापक उपयोग है:
1. कमल (Lotus)
- सबसे प्रमुख पुष्प प्रतीक
- छत पर विशाल कमल के फूल का डिज़ाइन
- स्तंभों पर कमल की पंखुड़ियां
- पवित्रता और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक
2. अन्य फूल
- गुलाब, चमेली, मोगरा
- फूलों की मालाएं (Garlands)
- पुष्प बेलें और लताएं
3. वनस्पति पैटर्न
- पत्तियों के डिज़ाइन
- बेल-बूटे (Creepers)
- पेड़ों की शाखाएं
ज्यामितीय पैटर्न
मंदिर में विभिन्न गणितीय और ज्यामितीय डिज़ाइन हैं:
1. मंडल (Mandala)
- वृत्ताकार पैटर्न छत पर
- केंद्रीय बिंदु से बाहर की ओर फैलते डिज़ाइन
- ब्रह्मांड और समय चक्र का प्रतीक
2. ज्यामितीय आकार
- त्रिकोण (Triangles)
- षट्कोण (Hexagons)
- अष्टकोण (Octagons)
- वर्ग और आयत
3. जाली कार्य (Lattice Work)
- पत्थर की जालीदार खिड़कियां
- प्रकाश और छाया का खेल
- वायु संचार के लिए व्यावहारिक डिज़ाइन
बॉर्डर और फ्रीज़
मंदिर की दीवारों पर कई सजावटी बॉर्डर हैं:
- फूलों की बॉर्डर: निरंतर पुष्प पैटर्न
- पशु बॉर्डर: हाथी, सिंह, घोड़े की लगातार मूर्तियां
- ज्यामितीय बॉर्डर: दोहराए जाने वाले पैटर्न
- कथा बॉर्डर: छोटी कहानियों का चित्रण
कीर्तिमुख (Glory Face)
मंदिर के विभिन्न भागों पर कीर्तिमुख (सिंह का चेहरा) डिज़ाइन है। यह:
- बुरी शक्तियों से रक्षा करता है
- द्वारों और खिड़कियों के ऊपर स्थित है
- शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है
मकर (Mythical Crocodile)
मकर (पौराणिक जीव – आधा मगरमच्छ, आधा मछली) का उपयोग:
- मेहराबों पर
- सीढ़ियों की रेलिंग पर (Torana)
- द्वारों के दोनों ओर
- नदी और जल का प्रतीक
गज-सिंह युद्ध
कई स्थानों पर हाथी और सिंह के युद्ध के दृश्य हैं:
- शक्ति का प्रदर्शन
- अच्छाई और बुराई का संघर्ष
- राजशक्ति का प्रतीक
छोटे विवरण (Miniature Details)
मूर्तिकारों ने सूक्ष्म विवरणों पर भी ध्यान दिया:
- आभूषणों पर छोटे रत्न
- वस्त्रों की महीन सिलवटें
- नाखून और उंगलियों का विवरण
- बालों के प्रत्येक तार का चित्रण
10. संरक्षण और महत्व
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भूमिका
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) 1951 से कंदरिया महादेव मंदिर का संरक्षण कर रहा है। ASI के प्रमुख कार्य:
1. नियमित रखरखाव
- साप्ताहिक सफाई और निरीक्षण
- वनस्पति नियंत्रण (मंदिर पर उगने वाले पौधों को हटाना)
- जल निकासी व्यवस्था की देखभाल
2. संरक्षण कार्य
- क्षतिग्रस्त पत्थरों की मरम्मत
- मूर्तियों की सफाई और संरक्षण
- रासायनिक उपचार से पत्थर की मजबूती
3. दस्तावेज़ीकरण
- प्रत्येक मूर्ति का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड
- 3D स्कैनिंग और डिजिटल संरक्षण
- नियमित स्थिति रिपोर्ट
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
1986 में, खजुराहो के मंदिर समूह (जिसमें कंदरिया महादेव शामिल है) को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। इसके कारण:
- उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य: मानव रचनात्मकता की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति
- वास्तुशिल्प उत्कृष्टता: नागर शैली का सर्वोत्तम उदाहरण
- सांस्कृतिक महत्व: मध्यकालीन भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व
- कलात्मक उपलब्धि: मूर्तिकला की उच्चतम उपलब्धि
संरक्षण की चुनौतियां
1. प्राकृतिक कारक
- अपक्षय (Weathering): हवा, बारिश, तापमान परिवर्तन से पत्थर का क्षरण
- जैविक विकास: काई, लाइकेन, पौधों की जड़ें
- भूकंप: भूकंप की संभावना वाले क्षेत्र में स्थित
2. मानवीय कारक
- पर्यटक प्रभाव: हजारों पर्यटकों द्वारा स्पर्श से क्षति
- वायु प्रदूषण: वाहनों और उद्योगों से प्रदूषण
- विकास दबाव: आसपास के क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां
3. तकनीकी चुनौतियां
- मूल तकनीक का अज्ञान: प्राचीन निर्माण तकनीक की पूर्ण समझ का अभाव
- सामग्री मिलान: मूल पत्थर जैसी सामग्री मिलना कठिन
- आधुनिक हस्तक्षेप: पुराने सीमेंट मरम्मत को हटाना
संरक्षण के उपाय
1. निवारक संरक्षण
- मंदिर के चारों ओर सुरक्षा बाड़
- पर्यटकों को मूर्तियों को छूने से रोकना
- नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था
2. उपचारात्मक संरक्षण
- रासायनिक उपचार: पत्थर को मजबूत करने के लिए विशेष रसायन
- पुनर्स्थापन: गिरे हुए पत्थरों को वापस जोड़ना
- सफाई: विशेष तकनीकों से मूर्तियों की सफाई
3. डिजिटल संरक्षण
- 3D स्कैनिंग: मंदिर और मूर्तियों का डिजिटल मॉडल
- फोटोग्राफिक दस्तावेज़ीकरण: उच्च रिज़ॉल्यूशन फोटोग्राफी
- वर्चुअल रियलिटी: भविष्य की पीढ़ियों के लिए डिजिटल संरक्षण
वास्तुकला में स्थान और महत्व
कंदरिया महादेव मंदिर का भारतीय और विश्व वास्तुकला में विशिष्ट स्थान है:
1. भारतीय वास्तुकला में
- नागर शैली का शिखर: उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला का सर्वोच्च उदाहरण
- मूर्तिकला का संगम: वास्तुकला और मूर्तिकला का सर्वोत्तम समन्वय
- तकनीकी उत्कृष्टता: बिना मोर्टार के निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण
2. विश्व वास्तुकला में
- मध्यकालीन वास्तुकला: 11वीं शताब्दी की विश्व की सर्वश्रेष्ठ इमारतों में से एक
- मूर्तिकला घनत्व: किसी भी धार्मिक भवन में सबसे अधिक मूर्तियों में से एक
- कलात्मक अभिव्यक्ति: मानव कलात्मकता की चरम अभिव्यक्ति
3. तुलनात्मक महत्व
विश्व के अन्य महान धार्मिक स्मारकों के साथ तुलना:
- अंकोरवाट (कंबोडिया): समान युग, समान जटिलता
- बोरोबुदुर (इंडोनेशिया): बौद्ध समकक्ष
- नोट्रे-डेम (फ्रांस): यूरोपीय समकालीन
11. विशिष्ट तथ्य
निर्माण तकनीक की विशिष्टताएं
1. बिना मोर्टार निर्माण
- संपूर्ण मंदिर बिना किसी सीमेंट, चूने या मोर्टार के बना है
- पत्थरों को इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़ा गया है
- पत्थरों में विशेष नाली और खांचे बनाकर फिट किया गया है
- यह तकनीक भूकंप प्रतिरोधी है
2. पत्थर का चयन और तैयारी
- स्थानीय चंदेरी बलुआ पत्थर का उपयोग
- प्रत्येक पत्थर को सटीक आकार में काटा गया
- पत्थरों को जमीन पर तैयार कर फिर ऊपर चढ़ाया गया
- अनुमान है कि लगभग 10,000 पत्थरों का उपयोग किया गया
3. मूर्तिकला की प्रक्रिया
- मूर्तियां सीटू में (जगह पर) उकेरी गईं, न कि अलग से बनाकर लगाई गईं
- पहले मोटा आकार, फिर विस्तृत नक्काशी
- विशेष उपकरण: छेनी, हथौड़ा, ड्रिल
- अंतिम पॉलिशिंग विशेष पत्थरों से
4. भार वितरण
- मंदिर का भार समान रूप से वितरित है
- खोखले स्थान (Hollow Spaces) भार कम करने के लिए
- स्तंभों की सटीक गणना और स्थापना
समय और श्रम
- निर्माण अवधि: लगभग 20-25 वर्ष
- कार्यबल: अनुमानतः 2000-3000 श्रमिक और शिल्पकार
- विशेषज्ञ शिल्पकार: लगभग 500 मूर्तिकार
- कुल लागत: समकालीन मूल्य में अनुमानित ₹50-100 करोड़ (आधुनिक मुद्रा में कई अरब)
गणितीय और खगोलीय पहलू
1. वास्तु पुरुष मंडल
- मंदिर का डिज़ाइन 81 वर्गों के मंडल पर आधारित
- प्रत्येक वर्ग एक विशिष्ट देवता का प्रतिनिधित्व करता है
- गर्भगृह केंद्रीय वर्ग (ब्रह्म स्थान) में
2. सूर्य के साथ संरेखण
- मंदिर का मुख्य प्रवेश पूर्व दिशा में
- विशेष दिनों (विषुव) पर सूर्य की किरणें सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं
- छाया का खेल दिन भर मूर्तियों को अलग तरीके से प्रकाशित करता है
3. स्वर्णिम अनुपात
- मंदिर के विभिन्न भागों में स्वर्णिम अनुपात (1:1.618) का पालन
- यह अनुपात प्राकृतिक सुंदरता और सामंजस्य उत्पन्न करता है
तुलनात्मक तथ्य
1. खजुराहो के अन्य मंदिरों से तुलना
- सबसे बड़ा: खजुराहो का सबसे बड़ा मंदिर
- सबसे ऊंचा: सबसे ऊंचा शिखर (31 मीटर)
- सबसे अधिक मूर्तियां: 872 मूर्तियां
- सबसे जटिल: सबसे जटिल वास्तुकला
2. भारत के अन्य शिव मंदिरों से तुलना
- बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर: बड़ा लेकिन अलग शैली (द्रविड़)
- केदारनाथ मंदिर: प्राचीन लेकिन सरल
- सोमनाथ मंदिर: ऐतिहासिक महत्व, भिन्न वास्तुकला
3. विश्व के समकालीन स्मारकों से
- नोट्रे-डेम, पेरिस (1163): समान युग, भिन्न शैली
- अंकोरवाट, कंबोडिया (1113-1150): समकालीन, हिंदू-बौद्ध
- पीसा का झुका हुआ टॉवर (1173): समकालीन यूरोपीय
सांस्कृतिक महत्व
1. धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक
- मंदिर में हिंदू धर्म की सभी परंपराओं का समावेश
- शैव, वैष्णव, शाक्त – सभी का प्रतिनिधित्व
- जैन मंदिर भी पास में (धार्मिक सहिष्णुता)
2. कला और धर्म का संगम
- कला को धर्म से अलग नहीं देखा गया
- मूर्तिकला केवल सजावट नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शिक्षा का माध्यम
- शिल्पी (शिल्पकार) को उतना ही सम्मान जितना पुजारी को
3. स्त्री सशक्तिकरण
- अप्सराओं और नायिकाओं को केंद्रीय स्थान
- महिलाओं को विभिन्न भूमिकाओं में दिखाया गया
- स्त्री सौंदर्य और शक्ति का उत्सव
4. जीवन का समग्र दृष्टिकोण
- पुरुषार्थ (जीवन के चार लक्ष्य) का प्रतिनिधित्व:
- धर्म (कर्तव्य): धार्मिक मूर्तियां
- अर्थ (संपत्ति): राजसी दृश्य
- काम (इच्छा): मिथुन मूर्तियां
- मोक्ष (मुक्ति): गर्भगृह में शिवलिंग
रहस्य और अनसुलझे प्रश्न
1. मंदिर का वास्तविक उद्देश्य
- केवल पूजा स्थल या कुछ और?
- तांत्रिक अनुष्ठानों का केंद्र?
- शिक्षा और सांस्कृतिक केंद्र?
2. मिथुन मूर्तियों का सटीक अर्थ
- विद्वान अभी भी बहस करते हैं
- कई सिद्धांत, कोई अंतिम उत्तर नहीं
3. निर्माण की गुप्त तकनीकें
- बड़े पत्थरों को कैसे उठाया गया?
- सटीक नक्काशी कैसे की गई?
- कुछ तकनीकें अभी भी रहस्य हैं
आधुनिक प्रभाव
1. पर्यटन
- प्रति वर्ष लगभग 3-4 लाख पर्यटक
- स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार
- रोजगार सृजन
2. शिक्षा और अनुसंधान
- वास्तुकला और मूर्तिकला के छात्रों के लिए अध्ययन स्थल
- अंतर्राष्ट्रीय शोध परियोजनाएं
- डिजिटल संरक्षण के प्रयोग
3. राष्ट्रीय गौरव
- भारतीय कला और संस्कृति का प्रतीक
- अंतर्राष्ट्रीय मान्यता
- सांस्कृतिक कूटनीति में उपयोग
12. दर्शन और यात्रा जानकारी
मंदिर के दर्शन का समय
- सुबह: 6:00 AM से 12:00 PM
- शाम: 3:00 PM से 7:00 PM
- सोमवार: विशेष पूजा और आरती
- महाशिवरात्रि: विशेष उत्सव और रात्रि जागरण
प्रवेश शुल्क
- भारतीय नागरिक: ₹40 प्रति व्यक्ति
- विदेशी पर्यटक: ₹600 प्रति व्यक्ति
- 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे: निःशुल्क
- साउंड एंड लाइट शो: अलग से टिकट
कैसे पहुंचें
1. हवाई मार्ग
- खजुराहो हवाई अड्डा: मंदिर से 5 किमी
- दिल्ली, मुंबई, वाराणसी से सीधी उड़ानें
2. रेल मार्ग
- खजुराहो रेलवे स्टेशन: मंदिर से 5 किमी
- महोबा, झांसी से जुड़ा हुआ
3. सड़क मार्ग
- अच्छी सड़क संपर्क
- झांसी (175 किमी), सतना (117 किमी), महोबा (63 किमी) से बस सेवा
आसपास के अन्य आकर्षण
- लक्ष्मण मंदिर: विष्णु मंदिर, खजुराहो पश्चिमी समूह
- विश्वनाथ मंदिर: शिव मंदिर
- चतुर्भुज मंदिर: विष्णु मंदिर
- जैन मंदिर समूह: पार्श्वनाथ, आदिनाथ मंदिर
- पन्ना राष्ट्रीय उद्यान: 50 किमी दूरी पर
- रनेह फॉल्स: प्राकृतिक जलप्रपात, 20 किमी
ठहरने की व्यवस्था
- लक्जरी होटल: ताज, रेडिसन, जास ओबेरॉय
- मध्यम श्रेणी: कई विकल्प उपलब्ध
- बजट होटल और गेस्टहाउस
- ASI द्वारा संचालित गेस्टहाउस
सर्वोत्तम यात्रा का समय
- अक्टूबर से मार्च: सबसे अच्छा समय, सुखद मौसम
- फरवरी-मार्च: खजुराहो नृत्य महोत्सव
- जुलाई-सितंबर: मानसून, कम पर्यटक
- अप्रैल-जून: गर्मी, बचने योग्य
फोटोग्राफी
- सामान्य फोटोग्राफी अनुमत
- वीडियो के लिए अलग शुल्क
- ड्रोन फोटोग्राफी के लिए विशेष अनुमति आवश्यक
- मूर्तियों को स्पर्श न करें
निष्कर्ष
कंदरिया महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि मानव सभ्यता की सर्वोच्च कलात्मक और वास्तुशिल्प उपलब्धियों में से एक है। यह मंदिर चंदेल राजवंश की समृद्धि, भारतीय शिल्पकारों की प्रतिभा, और हिंदू दर्शन की गहराई का प्रमाण है।
872 मूर्तियों में उकेरा गया जीवन का प्रत्येक पहलू – धर्म, कला, प्रेम, सौंदर्य, शक्ति – हमें याद दिलाता है कि भारतीय संस्कृति जीवन को समग्रता में देखती है। यहां पवित्र और लौकिक के बीच कोई विभाजन नहीं है; सब कुछ दिव्य अनुभव का हिस्सा है।
31 मीटर ऊंचा शिखर केवल पत्थरों का ढेर नहीं है, बल्कि मानव आकांक्षाओं का प्रतीक है – पृथ्वी से आकाश की ओर, भौतिक से आध्यात्मिक की ओर, नश्वर से अमर की ओर। प्रत्येक मूर्ति, प्रत्येक नक्काशी, प्रत्येक डिजाइन एक कहानी कहता है, एक संदेश देता है, एक सत्य प्रकट करता है।
आज, जब हम इस महान स्मारक के सामने खड़े होते हैं, हम न केवल अतीत की महानता को देखते हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रेरणा भी पाते हैं। कंदरिया महादेव मंदिर हमें सिखाता है कि सच्ची कला समय की सीमाओं को पार करती है, सच्चा धर्म जीवन को उत्सव बनाता है, और सच्ची सभ्यता वह है जो सुंदरता को संरक्षित करती है और ज्ञान को प्रसारित करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. कंदरिया महादेव मंदिर कहां स्थित है?
उत्तर: यह मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खजुराहो में स्थित है। यह खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह का हिस्सा है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल है।
2. मंदिर का निर्माण कब और किसने करवाया?
उत्तर: मंदिर का निर्माण लगभग 1025-1050 ई. के बीच चंदेल राजवंश के महाराजा विद्याधर (धंग) ने करवाया था।
3. मंदिर की ऊंचाई कितनी है?
उत्तर: कंदरिया महादेव मंदिर की कुल ऊंचाई लगभग 31 मीटर (102 फीट) है, जो इसे खजुराहो का सबसे ऊंचा मंदिर बनाती है।
4. मंदिर में कितनी मूर्तियां हैं?
उत्तर: मंदिर में लगभग 872 मूर्तियां हैं, जो इसे खजुराहो का सबसे अधिक मूर्तियों वाला मंदिर बनाती हैं।
5. मंदिर की वास्तुकला किस शैली की है?
उत्तर: यह मंदिर नागर शैली (उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला) की पंचायतन शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
6. “कंदरिया” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: “कंदरिया” संस्कृत के “कंदर” से आया है, जिसका अर्थ है “गुफा”। यह भगवान शिव को “गुफा निवासी” के रूप में संदर्भित करता है।
7. मंदिर का निर्माण किस सामग्री से हुआ है?
उत्तर: मंदिर का निर्माण स्थानीय चंदेरी बलुआ पत्थर से किया गया है, जो हल्के गुलाबी और बेज रंग का है।
8. क्या मंदिर के निर्माण में मोर्टार या सीमेंट का उपयोग किया गया था?
उत्तर: नहीं, संपूर्ण मंदिर बिना किसी सीमेंट, चूने या मोर्टार के इंटरलॉकिंग तकनीक से बनाया गया है।
9. मंदिर में मिथुन मूर्तियां क्यों हैं?
उत्तर: मिथुन मूर्तियों के कई अर्थ हैं – तांत्रिक दर्शन, जीवन के चार पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में काम का प्रतिनिधित्व, उर्वरता का प्रतीक, और कामसूत्र का चित्रण।
10. मंदिर कितने बजे खुलता है?
उत्तर: मंदिर सुबह 6:00 AM से 12:00 PM तक और शाम 3:00 PM से 7:00 PM तक खुला रहता है।
11. प्रवेश शुल्क कितना है?
उत्तर: भारतीय नागरिकों के लिए ₹40 और विदेशी पर्यटकों के लिए ₹600 प्रति व्यक्ति।
12. खजुराहो कैसे पहुंचें?
उत्तर: खजुराहो में हवाई अड्डा है जो दिल्ली, मुंबई, वाराणसी से जुड़ा है। रेलवे स्टेशन भी है, और सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
13. खजुराहो जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा समय है जब मौसम सुखद होता है। फरवरी-मार्च में खजुराहो नृत्य महोत्सव भी होता है।
14. क्या मंदिर में फोटोग्राफी की अनुमति है?
उत्तर: हां, सामान्य फोटोग्राफी की अनुमति है। वीडियो के लिए अलग शुल्क लगता है।
15. मंदिर में कौन सा मुख्य देवता है?
उत्तर: मंदिर के गर्भगृह में एक शिवलिंग स्थापित है। यह भगवान शिव को समर्पित है।
16. मंदिर की मूर्तियों के मुख्य विषय क्या हैं?
उत्तर: मूर्तियों में धार्मिक दृश्य (60%), अप्सराएं और सुरसुंदरियां (25%), मिथुन दृश्य (10%), सामाजिक जीवन (3%), और पशु-पक्षी (2%) शामिल हैं।
17. मंदिर में कितने मंडप हैं?
उत्तर: मंदिर में तीन मुख्य मंडप हैं – अर्धमंडप (प्रवेश कक्ष), मंडप (सभा कक्ष), और महामंडप (मुख्य सभा कक्ष)।
18. मंदिर का संरक्षण कौन करता है?
उत्तर: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) 1951 से मंदिर का संरक्षण कर रहा है।
19. मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल कब घोषित किया गया?
उत्तर: 1986 में खजुराहो के मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
20. मंदिर निर्माण में कितना समय लगा?
उत्तर: मंदिर के निर्माण में लगभग 20-25 वर्ष लगे थे।
21. क्या खजुराहो में केवल हिंदू मंदिर हैं?
उत्तर: नहीं, खजुराहो में जैन मंदिर भी हैं, जो धार्मिक सहिष्णुता का प्रमाण हैं।
22. मंदिर में स्तंभों की संख्या कितनी है?
उत्तर: मंदिरों के मंडपों में कुल 64 अलंकृत स्तंभ हैं।
23. गर्भगृह में प्रकाश की क्या व्यवस्था है?
उत्तर: गर्भगृह में प्राकृतिक प्रकाश बहुत कम है, केवल द्वार से आने वाली धुंधली रोशनी शिवलिंग को प्रकाशित करती है। यह डिजाइन आध्यात्मिक अनुभव के लिए है।
24. मंदिर के शिखर की विशेषता क्या है?
उत्तर: मुख्य शिखर 84 छोटे शिखरों (उरुश्रृंग) से घिरा है, जो हिमालय पर्वत श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करते हैं।
25. क्या मंदिर में पूजा होती है?
उत्तर: हां, मंदिर में नियमित पूजा होती है, विशेष रूप से सोमवार को और महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन होते हैं।
26. अप्सराओं की मूर्तियों की क्या विशेषता है?
उत्तर: अप्सराओं को विभिन्न मुद्राओं में दिखाया गया है – श्रृंगार करते हुए, नृत्य करते हुए, संगीत वादन करते हुए। उनमें त्रिभंग मुद्रा, विस्तृत आभूषण और अभिव्यक्तिपूर्ण चेहरे की विशेषताएं हैं।
27. मंदिर में दिक्पाल कौन हैं?
उत्तर: आठ दिक्पाल (दिशाओं के रक्षक) हैं – इंद्र (पूर्व), अग्नि (दक्षिण-पूर्व), यम (दक्षिण), निरुति (दक्षिण-पश्चिम), वरुण (पश्चिम), वायु (उत्तर-पश्चिम), कुबेर (उत्तर), और ईशान (उत्तर-पूर्व)।
28. मंदिर के आसपास अन्य कौन से आकर्षण हैं?
उत्तर: लक्ष्मण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, जैन मंदिर समूह, पन्ना राष्ट्रीय उद्यान (50 किमी), और रनेह फॉल्स (20 किमी)।
29. क्या साउंड एंड लाइट शो होता है?
उत्तर: हां, शाम को साउंड एंड लाइट शो होता है जो खजुराहो के इतिहास को प्रस्तुत करता है। इसके लिए अलग टिकट लेना होता है।
30. मंदिर निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?
उत्तर: बिना मोर्टार के विशाल पत्थरों को सटीकता से जोड़ना, 31 मीटर की ऊंचाई तक निर्माण करना, और 872 जटिल मूर्तियों को उकेरना मुख्य चुनौतियां थीं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
सामान्य ज्ञान और इतिहास
1. कंदरिया महादेव मंदिर किस राज्य में स्थित है? A) उत्तर प्रदेश
B) मध्य प्रदेश
C) राजस्थान
D) बिहार
उत्तर: B) मध्य प्रदेश
2. मंदिर का निर्माण किस राजवंश ने करवाया? A) गुप्त राजवंश
B) मुग़ल राजवंश
C) चंदेल राजवंश
D) पल्लव राजवंश
उत्तर: C) चंदेल राजवंश
3. मंदिर का निर्माण लगभग कब हुआ था? A) 800-850 ई.
B) 1025-1050 ई.
C) 1200-1250 ई.
D) 1400-1450 ई.
उत्तर: B) 1025-1050 ई.
4. “कंदरिया” शब्द का अर्थ क्या है? A) पर्वत
B) गुफा
C) नदी
D) वन
उत्तर: B) गुफा
5. मंदिर किस देवता को समर्पित है? A) विष्णु
B) ब्रह्मा
C) शिव
D) गणेश
उत्तर: C) शिव
वास्तुकला और संरचना
6. मंदिर की कुल ऊंचाई कितनी है? A) 20 मीटर
B) 25 मीटर
C) 31 मीटर
D) 40 मीटर
उत्तर: C) 31 मीटर
7. मंदिर किस वास्तुशिल्प शैली का उदाहरण है? A) द्रविड़ शैली
B) नागर शैली
C) वेसर शैली
D) मुगल शैली
उत्तर: B) नागर शैली
8. मंदिर में कुल कितने मुख्य विभाग हैं? A) तीन
B) चार
C) पांच
D) छह
उत्तर: C) पांच
9. मंदिर के निर्माण में किस सामग्री का उपयोग किया गया? A) ग्रेनाइट
B) संगमरमर
C) बलुआ पत्थर
D) ईंट
उत्तर: C) बलुआ पत्थर
10. मंदिर में पत्थरों को जोड़ने के लिए किस तकनीक का उपयोग किया गया? A) मोर्टार और सीमेंट
B) इंटरलॉकिंग तकनीक
C) लोहे की कीलें
D) गोंद
उत्तर: B) इंटरलॉकिंग तकनीक
मूर्तिकला
11. मंदिर में लगभग कितनी मूर्तियां हैं? A) 500
B) 650
C) 872
D) 1000
उत्तर: C) 872
12. मूर्तियों में कौन सा विषय सबसे अधिक प्रतिशत में है? A) मिथुन दृश्य
B) धार्मिक और पौराणिक विषय
C) अप्सराएं
D) पशु-पक्षी
उत्तर: B) धार्मिक और पौराणिक विषय
13. मंदिर में अप्सराओं और सुरसुंदरियों की लगभग कितनी मूर्तियां हैं? A) 100
B) 150
C) 220
D) 300
उत्तर: C) 220
14. मूर्तियों में कौन सी मुद्रा का सबसे अधिक उपयोग हुआ है? A) पद्मासन
B) त्रिभंग
C) चौकी
D) कमलासन
उत्तर: B) त्रिभंग
15. मंदिर में लगभग कितनी मिथुन मूर्तियां हैं? A) 50-60
B) 70-80
C) 90-100
D) 120-130
उत्तर: C) 90-100
देवी-देवता और धार्मिक पहलू
16. गर्भगृह के द्वार पर कौन सी नदी देवियां हैं? A) गंगा और सरस्वती
B) गंगा और यमुना
C) यमुना और सरस्वती
D) गोदावरी और कावेरी
उत्तर: B) गंगा और यमुना
17. मंदिर में कितने दिक्पाल हैं? A) चार
B) छह
C) आठ
D) दस
उत्तर: C) आठ
18. शिवलिंग के कितने मुख्य भाग होते हैं? A) एक
B) दो
C) तीन
D) चार
उत्तर: C) तीन
19. शिवलिंग के ऊपरी भाग को क्या कहते हैं? A) ब्रह्मभाग
B) विष्णुभाग
C) रुद्रभाग
D) शक्तिभाग
उत्तर: C) रुद्रभाग
20. मंदिर में कौन से त्रिमूर्ति की मूर्ति है? A) ब्रह्मा, विष्णु, महेश
B) ब्रह्मा, शिव, गणेश
C) विष्णु, शिव, कृष्ण
D) शिव, पार्वती, गणेश
उत्तर: A) ब्रह्मा, विष्णु, महेश
संरक्षण और महत्व
21. खजुराहो के मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल कब घोषित किया गया? A) 1975
B) 1980
C) 1986
D) 1990
उत्तर: C) 1986
22. मंदिर का संरक्षण कौन सी संस्था करती है? A) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
B) संयुक्त राष्ट्र
C) मध्य प्रदेश सरकार
D) केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय
उत्तर: A) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
23. ASI कब से कंदरिया महादेव मंदिर का संरक्षण कर रहा है? A) 1947
B) 1951
C) 1960
D) 1970
उत्तर: B) 1951
24. मंदिर की सबसे बड़ी संरक्षण चुनौती क्या है? A) भूकंप
B) अपक्षय और पर्यटक प्रभाव
C) बाढ़
D) आग
उत्तर: B) अपक्षय और पर्यटक प्रभाव
25. खजुराहो में प्रति वर्ष लगभग कितने पर्यटक आते हैं? A) 1-2 लाख
B) 3-4 लाख
C) 5-6 लाख
D) 10 लाख
उत्तर: B) 3-4 लाख
निर्माण और तकनीक
26. मंदिर के निर्माण में लगभग कितना समय लगा? A) 10-15 वर्ष
B) 20-25 वर्ष
C) 30-35 वर्ष
D) 40-50 वर्ष
उत्तर: B) 20-25 वर्ष
27. मंदिर की जगती (आधार) की ऊंचाई कितनी है? A) 2 मीटर
B) 3 मीटर
C) 4 मीटर
D) 5 मीटर
उत्तर: C) 4 मीटर
28. मंदिर के मुख्य शिखर के चारों ओर कितने छोटे शिखर हैं? A) 50
B) 64
C) 84
D) 100
उत्तर: C) 84
29. मंदिर के मंडपों में कुल कितने स्तंभ हैं? A) 32
B) 48
C) 64
D) 80
उत्तर: C) 64
30. मंदिर में लगभग कितने पत्थरों का उपयोग किया गया? A) 5,000
B) 10,000
C) 15,000
D) 20,000
उत्तर: B) 10,000
भौगोलिक और पर्यटन जानकारी
31. खजुराहो किस जिले में स्थित है? A) सागर
B) छतरपुर
C) जबलपुर
D) ग्वालियर
उत्तर: B) छतरपुर
32. खजुराहो हवाई अड्डा मंदिर से कितनी दूरी पर है? A) 2 किमी
B) 5 किमी
C) 10 किमी
D) 15 किमी
उत्तर: B) 5 किमी
33. खजुराहो जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? A) अप्रैल-जून
B) जुलाई-सितंबर
C) अक्टूबर-मार्च
D) पूरा साल
उत्तर: C) अक्टूबर-मार्च
34. भारतीय नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क कितना है? A) ₹20
B) ₹40
C) ₹60
D) ₹100
उत्तर: B) ₹40
35. विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क कितना है? A) ₹300
B) ₹450
C) ₹600
D) ₹800
उत्तर: C) ₹600
विशिष्ट विशेषताएं
36. मंदिर का मुख्य प्रवेश किस दिशा में है? A) उत्तर
B) दक्षिण
C) पूर्व
D) पश्चिम
उत्तर: C) पूर्व
37. गर्भगृह का आकार लगभग कितना है? A) 1×1 मीटर
B) 2.4×2.4 मीटर
C) 3×3 मीटर
D) 4×4 मीटर
उत्तर: B) 2.4×2.4 मीटर
38. मंदिर के डिज़ाइन में किस गणितीय अनुपात का उपयोग किया गया? A) पाई (π)
B) स्वर्णिम अनुपात
C) फिबोनाची अनुक्रम
D) साधारण अनुपात
उत्तर: B) स्वर्णिम अनुपात
39. वास्तु पुरुष मंडल में कितने वर्ग होते हैं? A) 49
B) 64
C) 81
D) 100
उत्तर: C) 81
40. मंदिर की छत पर मुख्य पुष्प प्रतीक कौन सा है? A) गुलाब
B) कमल
C) चमेली
D) गेंदा
उत्तर: B) कमल
सांस्कृतिक और दार्शनिक पहलू
41. हिंदू धर्म में कितने पुरुषार्थ हैं? A) दो
B) तीन
C) चार
D) पांच
उत्तर: C) चार
42. चार पुरुषार्थों में कौन सा शामिल नहीं है? A) धर्म
B) अर्थ
C) शक्ति
D) मोक्ष
उत्तर: C) शक्ति
43. मिथुन मूर्तियां किस पुरुषार्थ का प्रतिनिधित्व करती हैं? A) धर्म
B) अर्थ
C) काम
D) मोक्ष
उत्तर: C) काम
44. अर्धनारीश्वर मूर्ति किसका प्रतीक है? A) शिव की शक्ति
B) पुरुष और स्त्री ऊर्जा का संतुलन
C) विष्णु का अवतार
D) ब्रह्मा की रचना
उत्तर: B) पुरुष और स्त्री ऊर्जा का संतुलन
45. खजुराहो में कितने मंदिर समूह हैं? A) एक
B) दो
C) तीन
D) चार
उत्तर: C) तीन (पश्चिमी, पूर्वी, दक्षिणी)
तुलनात्मक प्रश्न
46. खजुराहो का सबसे ऊंचा मंदिर कौन सा है? A) लक्ष्मण मंदिर
B) कंदरिया महादेव मंदिर
C) विश्वनाथ मंदिर
D) चतुर्भुज मंदिर
उत्तर: B) कंदरिया महादेव मंदिर
47. खजुराहो में सबसे अधिक मूर्तियों वाला मंदिर कौन सा है? A) लक्ष्मण मंदिर
B) कंदरिया महादेव मंदिर
C) विश्वनाथ मंदिर
D) पार्श्वनाथ मंदिर
उत्तर: B) कंदरिया महादेव मंदिर
48. नागर शैली मुख्यत: किस क्षेत्र की है? A) दक्षिण भारत
B) उत्तर भारत
C) पूर्वी भारत
D) पश्चिमी भारत
उत्तर: B) उत्तर भारत
49. द्रविड़ शैली मुख्यत: किस क्षेत्र की है? A) दक्षिण भारत
B) उत्तर भारत
C) पूर्वी भारत
D) पश्चिमी भारत
उत्तर: A) दक्षिण भारत
50. कंदरिया महादेव मंदिर की तुलना में कौन सा विश्व स्मारक समकालीन है? A) ताज महल
B) नोट्रे-डेम कैथेड्रल (निर्माण शुरू)
C) एफिल टॉवर
D) सेंट पीटर बेसिलिका
उत्तर: B) नोट्रे-डेम कैथेड्रल (निर्माण शुरू)
संदर्भ और आगे के अध्ययन के लिए
पुस्तकें
- “खजुराहो” – देवांगना देसाई
- “द टेम्पल्स ऑफ खजुराहो” – कृष्णा देवा
- “इंडियन आर्किटेक्चर” – पर्सी ब्राउन
- “हिंदू आर्ट एंड आर्किटेक्चर” – जॉर्ज मिशेल
वेबसाइट
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI): www.asi.nic.in
- यूनेस्को विश्व धरोहर: whc.unesco.org
- मध्य प्रदेश पर्यटन: www.mptourism.com
संग्रहालय
- खजुराहो पुरातत्व संग्रहालय
- राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली
- भारत कला भवन, वाराणसी
नोट: यह लेख कंदरिया महादेव मंदिर की व्यापक जानकारी प्रदान करता है। हालांकि, मंदिर की वास्तविक भव्यता और आध्यात्मिक अनुभव को केवल व्यक्तिगत दर्शन से ही अनुभव किया जा सकता है। पाठकों को खजुराहो की यात्रा करने और इस अद्वितीय धरोहर को प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।











